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Chennakeshava Temple: वैसे तो भगवान नारायण के देशभर में कई मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जो तारे के आकार का है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1258 ईस्वी में करवाया गया था. बताया जाता है कि होयसला काल की इस उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. आइए जानते हैं मंदिर की खास बातें…
Chennakeshava Temple: दुनिया भर में भगवान नारायण को समर्पित कई देवालय हैं, जिनकी बनावट मनमोहक है तो भक्ति से भरी कथा भक्तों के विश्वास को और भी मजबूत बनाती है. ऐसा ही एक देवालय कर्नाटक राज्य के मैसूर में है. तारे के आकार के नारायण को समर्पित मंदिर का निर्माण 1258 ईस्वी में हुआ है और इस प्रसिद्ध मंदिर में तीन गर्भगृह हैं. बताया जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और सभी तरह के दोषों से मुक्ति भी मिलती है. मंदिर की उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. आइए जानते हैं तारे के आकार का नारायण को समर्पित विशेष मंदिर के बारे में…
मंदिर में तीन अलग-अलग गर्भगृह
कर्नाटक के मैसूर से करीब 35 किलोमीटर दूर कावेरी नदी के तट पर स्थित सोमनाथपुर का चेन्नाकेशव मंदिर भारत की अद्भुत वास्तुकला का एक शानदार नमूना है. यह मंदिर तारे के आकार में बना है और भगवान विष्णु के सुंदर रूप चेन्ना केशव को समर्पित है. 1258 ईस्वी में निर्मित इस मंदिर में तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं, जहां भगवान केशव, वेणुगोपाल और जनार्दन विराजमान हैं. इसे 2023 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला है. होयसला काल की इस उत्कृष्ट कृति को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं.
सेनापति ने 1258 ईस्वी में कराया था निर्माण
चेन्ना केशव मंदिर को सोमनाथपुर मंदिर भी कहा जाता है, जिसका निर्माण होयसला राजा नरसिम्हा तृतीय के सेनापति सोमनाथ दंडनायक ने 1258 ईस्वी में कराया था. यह मंदिर होयसला राजवंश की कला और भक्ति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहा जा सकता है. यह मंदिर आज भी अपने मूल स्वरूप में मौजूद है, जो उस समय की उत्कृष्ट कारीगरी को पेश करता है. चेन्नाकेशव का अर्थ है सुंदर केशव. मंदिर का पूरा नाम ही इसकी सुंदरता को व्यक्त करता है.
तारे के आकार का नारायण मंदिर
चेन्ना केशव मंदिर तारे के आकार के पांच-स्तरीय चबूतरे पर बना है, जो होयसला शैली की खासियत है. इस अनोखे डिजाइन की वजह से मंदिर की दीवारों पर हजारों मूर्तियां और नक्काशी आसानी से दिखाई देती हैं. मंदिर की हर इंच जगह पर बारीक नक्काशी की गई है. यहां देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, दैनिक जीवन के दृश्यों, फूलों, जानवरों और ज्यामितीय पैटर्न्स को सूक्ष्मता से उकेरा गया है.
तीनों मूर्तियां बेहद सुंदर और कलात्मक
मंदिर की सबसे खास बात इसका त्रिकूट डिजाइन है. इसमें तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं, मध्य गर्भगृह में भगवान केशव, एक में वेणुगोपाल यानी बांसुरी बजाते कृष्ण और तीसरे में जनार्दन विराजमान हैं. तीनों ही मूर्तियां बेहद सुंदर और कलात्मक हैं. मंदिर के खंभे, छत और द्वारों पर भी अद्भुत नक्काशी है. केंद्रीय छत पर कमल के आकार का भव्य मंडलम है.
मंदिर के आसपास ये खास जगहें
मंदिर संरक्षित स्मारक है, जहां बैकुंठ एकादशी और जन्माष्टमी जैसे पर्व पर विशेष आयोजन होते हैं. सोमनाथपुर मंदिर मैसूर की सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके पास ही भव्य मैसूर पैलेस, चामुंडेश्वरी मंदिर (चामुंडी पहाड़ी) और सेंट फिलोमेना चर्च जैसे दर्शनीय स्थल हैं.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें