रांची22 घंटे पहले
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दावा : 6 माह में लोन प्रक्रिया व अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी
झारखंड के सबसे बड़े स्वास्थ्य प्रोजेक्ट ‘रिम्स-2’ का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से शुरू हो जाएगा। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की तैयारियों, वित्तीय प्रक्रिया, निर्माण मॉडल और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की फैक्ट फाइंडिंग मिशन टीम भी शामिल हुई, जो प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना की व्यवहारिकता, वित्तीय संरचना और तकनीकी जरूरतों का आकलन करने रांची पहुंची है। बैठक में बताया गया कि अगले छह महीनों में लोन प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को अंतिम रूप देने की तैयारी है। इसके बाद निर्माण एजेंसी का चयन और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा कर काम शुरू किया जाएगा।
बता दें, राज्य सरकार चाहती है कि परियोजना की गति शुरुआत से ही तेज रहे, ताकि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा हो सके। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के हर चरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी स्तर पर देरी न हो। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव ध्रुव प्रसाद, जेएसबीसीसीएल के अधिकारी, विभागीय पदाधिकारी और एडीबी के प्रतिनिधि मौजूद थे।
वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी 4200 करोड़ की परियोजना, 2600 करोड़ का लोन देगा एडीबी बैठक में बताया गया कि रिम्स-2 परियोजना पर कुल लगभग 4200 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें एशियन डेवलपमेंट बैंक करीब 2600 करोड़ रुपए का लोन उपलब्ध कराएगा। शेष राशि राज्य सरकार और अन्य स्रोतों से जुटाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा निवेश साबित हो सकती है।
बैठक में वित्तीय व्यवस्था व अस्पताल के संचालन मॉडल पर भी हुई चर्चा उच्चस्तरीय बैठक में केवल फंडिंग ही नहीं, बल्कि पूरे अस्पताल के संचालन मॉडल और भविष्य की जरूरतों पर भी गहन चर्चा हुई। इस दौरान लोन रेडिनेस और वित्तीय जांच-पड़ताल, कंसल्टेंट चयन की समय सीमा, फंड फ्लो मैनेजमेंट, अस्पताल का स्टाफिंग पैटर्न, पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा मानक, तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की वर्ल्ड क्लास डिजाइन, भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप क्षमता विस्तार आदि पर वार्ता हुई। एडीबी टीम ने परियोजना से जुड़े कई तकनीकी और प्रशासनिक सुझाव भी दिए।
सिर्फ अस्पताल नहीं, समग्र हेल्थ इंस्टीट्यूट होगा रिम्स-2 : अजय कुमार सिंह बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि रिम्स-2 को केवल एक अस्पताल के रूप में नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी इलाज, रिसर्च और आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी से लैस समग्र स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है – गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए झारखंड के लोगों को दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। इसके लिए अस्पताल का इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी व्यवस्था और मेडिकल सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार की जाएंगी।
सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल पर होगा फोकस : बैठक में अस्पताल को सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल पर विकसित करने को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसका उद्देश्य ऐसा संस्थान तैयार करना है, जो भविष्य में आर्थिक रूप से भी मजबूत रहे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार कर सके। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अस्पताल के संचालन, रिसर्च, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और मेडिकल एजुकेशन को इस तरह जोड़ा जाए कि संस्थान लंबे समय तक टिकाऊ मॉडल पर काम कर सके।
