दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर रोज अपनी बाइक से जॉब पर निकलने वाले लाखों राइडर्स के लिए बेंगलुरु का एक फैसला बहुत बड़ी वॉर्निंग बेल है. बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने अपने सबसे व्यस्त एयरपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी एलिवेटेड कॉरिडोर्स से टू-व्हीलर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. अब सोचिए, अगर यही बैन दिल्ली-एनसीआर के सबसे बिजी NH-48 और IGI एयरपोर्ट रूट पर थोप दिया जाए, तो क्या होगा? एक तरफ जहां एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरने वाली कारों को रेड-कारपेट वाइब्स मिलेंगी, वहीं दूसरी तरफ नीचे की संकरी सर्विस लेन्स पर राइडर्स का महा-क्लेश शुरू हो जाएगा. मेट्रो में पैर रखने की जगह नहीं बचेगी और आपके फेवरेट स्विगी-ज़ोमैटो डिलीवरीज का टाइमिंग पूरी तरह क्रैश हो जाएगा. आइए समझते हैं कि कैसे यह एक फैसला पूरे दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक सिस्टम हिलाकर रख देगा.
1. नीचे की मुख्य सड़कों पर अचानक से अप्रत्याशित ट्रैफिक दबाव
दिल्ली-गुरुग्राम रूट पर प्रतिदिन लाखों लोग यात्रा करते हैं. इसमें खासकर कॉर्पोरेट कर्मचारी, डिलीवरी एजेंट्स और रोजाना के नौकरीपेशा लोग यदि शामिल हैं. ऊपर एलिवेटेड और एक्सप्रेसवे लेन से टू-व्हीलर्स हटते हैं तो यह पूरा ट्रैफिक नीचे की सर्विस लेन, महिपालपुर और कैंट की अंदरूनी सड़कों पर शिफ्ट हो जाएगा. पहले से ही बेहद संकरी सर्विस लेन पर दोपहिया वाहनों का जनसैलाब उमड़ पड़ेगा जिससे लोकल बॉटलेनेक पैदा होंगे.
2. दिल्ली मेट्रो और रैपिड मेट्रो पर अत्यधिक भीड़
जब बाइक और स्कूटर सवार एक्सप्रेसवे का उपयोग नहीं कर पाएंगे तो बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक परिवहन का रुख करेंगे. इससे दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन (हुडा सिटी सेंटर/समयपुर बादली) और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर अचानक से यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाएगी. पीक आवर्स यानी सुबह 8 से 11 और शाम 5 से 8 के दौरान राजीव चौक, नई दिल्ली और धौला कुआं जैसे प्रमुख स्टेशनों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बचेगी.
3. डिलीवरी इकोसिस्टम और क्विक-कॉमर्स पर सीधा असर
आज दिल्ली-एनसीआर का क्विक-कॉमर्स (Zomato, Blinkit, Swiggy, Dunzo आदि) पूरी तरह से टू-व्हीलर चालकों पर निर्भर है. गुरुग्राम और दिल्ली के बीच एक्सप्रेसवे के जरिए ही बहुत से पार्सल और कूरियर तेजी से डिलीवर होते हैं. टू-व्हीलर बैन होने से डिलीवरी का समय बढ़ जाएगा, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और इस सेक्टर से जुड़े हजारों गिग वर्कर्स की आजीविका पर असर पड़ेगा.
4. फोर-व्हीलर्स की रफ्तार में मामूली सुधार बनाम गंभीर दुर्घटनाएं
• सकारात्मक पहलू: एक्सप्रेसवे पर कारों और बसों के लिए लेन अनुशासन बेहतर होगा. तेज रफ्तार गाड़ियों और टू-व्हीलर्स के बीच होने वाले जानलेवा हादसों में भारी कमी आएगी.
• नकारात्मक पहलू: सर्विस लेन में टू-व्हीलर्स की अत्यधिक भीड़ होने के कारण वहां छोटे-मोटे हादसों और पैदल यात्रियों के लिए जोखिम काफी बढ़ जाएगा.
दिल्ली-एनसीआर बनाम बेंगलुरु: बुनियादी अंतर
| मानक | बेंगलुरु (एयरपोर्ट/ई-सिटी कॉरिडोर) | दिल्ली-गुरुग्राम (NH-48 / IGI रूट) |
|---|---|---|
| वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन | मेट्रो कनेक्टिविटी सीमित / प्रगति पर है | मजबूत मेट्रो नेटवर्क (येलो लाइन, एयरपोर्ट एक्सप्रेस) मौजूद |
| डेली कम्यूटर्स की संख्या | मध्यम से उच्च | अत्यधिक (लाखों अंतरराज्यीय यात्री) |
| सर्विस रोड की चौड़ाई | संकरी और सीमित | कहीं चौड़ी, तो कहीं अत्यधिक संकुचित (महिपालपुर) |
दिल्ली-गुरुग्राम रूट पर टू-व्हीलर्स का पूर्ण प्रतिबंध एक्सप्रेसवे पर चलने वाली कारों के लिए तो राहत भरा हो सकता है और एक्सप्रेसवे पर मृत्यु दर को कम कर सकता है, लेकिन लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तैयार न होने की स्थिति में यह पूरे एनसीआर के यातायात को पंगु बना देगा. इसे लागू करने से पहले दिल्ली-गुरुग्राम के बीच इलेक्ट्रिक बस फ्लीट और डेडिकेटेड टू-व्हीलर कॉरिडोर्स को विकसित करना अनिवार्य होगा.
सवाल-जवाब
क्या दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर टू-व्हीलर्स के लिए अलग से डेडिकेटेड लेन बनाना संभव है?
मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में महिपालपुर और सरहौल बॉर्डर जैसे बॉटलेनेक्स के कारण जगह कम है, इसलिए एक्सप्रेसवे चौड़ा किए बिना डेडिकेटेड लेन बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण है.
बेंगलुरु की तरह दिल्ली में इस नियम को लागू करने से पहले क्या कदम उठाने चाहिए?
सबसे पहले एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड्स को चौड़ा और अतिक्रमण मुक्त करना होगा तथा मेट्रो और एसी बसों की फ्रीक्वेंसी बढ़ानी होगी.