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Dharmendra Pradhan Educational Qualification | कितने पढ़े-लिखे हैं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान,...


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Dharmendra Pradhan News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में से एक हैं. ओडिशा के तालचेर में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ओडिशा से हासिल की. उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी (मानवशास्त्र) में एमए किया. छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने एबीवीपी से जुड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. प्रधान भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. चलिए एक नजर डालते हैं प्रधान की शैक्षणिक योग्यता, छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय मंत्री बनने तक का सफर.

डिजिटल संसद पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ था. उनके पिता डॉ. देबेंद्र प्रधान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री थे. राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार में जन्म हुआ, तो राजनीति में हमेशा से लगाव रहा.

धर्मेंद्र प्रधान की शुरुआती शिक्षा ओडिशा में ही हुई. प्राथमिक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हायर एजुकेशन के लिए तालचेर कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. कॉलेज के दिनों से ही उनकी दिलचस्पी राजानीति की ओर रही. तालचेर कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद प्रसिद्ध उत्कल यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई की.

उत्कल यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने एंथ्रोपोलॉजी (मानवशास्त्र) विषय को अपनी उच्च शिक्षा के लिए चुना. उन्होंने एंथ्रोपोलॉजी में मास्टर (एमए) की डिग्री हासिल की. स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान वह विश्वविद्यालय में छात्रों के मुद्दों को लेकर काफी मुखर रहने लगे. यहीं से उनकी छात्र राजनीति में सक्रियता और अधिक बढ़ गई, जिसने उनके भविष्य का मार्ग तय किया.

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छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के बाद धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में शामिल हुए. उन्होंने युवा मोर्चा में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर संगठन के पदानुक्रम में आगे बढ़े. उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली को देखते हुए आगे चलकर उन्हें भाजयुमो का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर युवा संगठन को और मजबूत किया.

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र में ही छात्र कार्यकर्ता के रूप में की थी. विश्वविद्यालय की पढ़ाई के दौरान ही वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ गए थे. एबीवीपी के साथ जुड़कर उन्होंने छात्रों के अधिकारों और विभिन्न मुद्दों के लिए निरंतर संघर्ष किया. उनके समर्पण और नेतृत्व कौशल ने उन्हें जल्द ही साथियों और वरिष्ठ नेताओं के बीच एक लोकप्रिय युवा नेता बना दिया.

संगठन में उन्होंने अपनी कौशल साबित करने के बाद धर्मेंद्र प्रधान की राह मुख्यधारा की राजनीति की ओर मुड़ी. साल 2000 में वह पहली बार ओडिशा विधानसभा के सदस्य चुने गए. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा. साल 2004 में पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. बाद में उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य किया. वर्तमान में वह ओडिशा की संबलपुर सीट से सांसद हैं.

केंद्रीय राजनीति में अपनी पकड़ बनाने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण और बड़े मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है. शिक्षा मंत्रालय से पहले उन्होंने भारत सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में लंबा कार्यकाल पूरा किया. इसके अलावा उन्होंने इस्पात मंत्री तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के रूप में भी कई नीतिगत सुधार और फैसले लिए, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर उनका राजनीतिक कद मजबूत हुआ.दे

धर्मेंद्र प्रधान को जुलाई 2021 में भारत सरकार के बेहद महत्वपूर्ण शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई. जुलाई 2021 में पदभार ग्रहण करने के बाद से वह लगातार देश के शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वह देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत हैं और आज भी इस जिम्मेदारी को निष्ठापूर्वक संभाल रहे हैं.

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