कर्नाटक के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के संकट मोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार शनिवार को उद्धव ठाकरे से मिलने उनके घर मातोश्री पहुंचे. शिवसेना (यूबीटी) में जारी अंदरूनी संकट और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए सियासी समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है.
डीके शिवकुमार की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह लोकसभा सांसदों के बागी तेवर चर्चा में हैं. इन सांसदों के संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं होने के बाद पार्टी के भीतर बड़े विभाजन की आशंका जताई जा रही है. राजनीतिक गलियारों में इसे 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत की पुनरावृत्ति के रूप में देखा जा रहा है.
मातोश्री में हुई इस मुलाकात के दौरान उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे, युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे और राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद रहे. इस मुलाकात के बाद डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के साथ गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया.
क्या कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के बीच पक रही कोई खिचड़ी?
डीके शिवकुमार की इस मुलाकात के बाद कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के रिश्तों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ राजनीतिक हलकों में दोनों दलों के बीच और अधिक राजनीतिक समन्वय या भविष्य में किसी बड़े कदम की अटकलें लगाई जा रही हैं.
हालांकि उद्धव ठाकरे ने हाल ही में शिवसेना स्थापना दिवस के कार्यक्रम में इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा था कि शिवसेना कांग्रेस में विलय नहीं करेगी. उन्होंने कहा था, ‘कुछ लोग सोचते हैं कि शिवसेना कांग्रेस में मिल जाएगी, ऐसा कभी नहीं होगा.’
बागी सांसदों पर सख्त हुई पार्टी
उधर लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने बैठक से गैरहाजिर रहने वाले सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया है.
नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं मिला तो माना जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है. इसके बाद उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
छह सांसदों का गणित क्यों अहम?
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा में कुल नौ सांसद हैं. इनमें से छह सांसद यदि एक साथ अलग रास्ता चुनते हैं तो यह संख्या दो-तिहाई के बराबर होगी. ऐसे में अगर वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय का दावा करते हैं तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है.
यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं. सूत्रों का दावा है कि बागी सांसदों और शिंदे गुट के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है.
अमित शाह का बड़ा बयान
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कोल्हापुर की एक जनसभा में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. अमित शाह ने कहा कि अब शिवसेना में कोई गुट नहीं बचा है और केवल एक ही शिवसेना है, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं.
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब उद्धव ठाकरे की पार्टी संभावित टूट की आशंकाओं से जूझ रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं.
गौरतलब है कि डीके शिवकुमार मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे. इसी दौरान उन्होंने मातोश्री जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की, जिसने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है. (IANS इनपुट के साथ)