जामताड़ा: झारखंड के समाहरणालय से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासन संवेदनशील हो तो आम लोगों की आवाज सिर्फ सुनी ही नहीं जाती, बल्कि उस पर तुरंत कार्रवाई भी होती है. जामताड़ा डीसी का जनता दरबार एक ऐसा मंच है. जहां दूर-दराज गांवों से लोग अपनी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. जब उनकी बात सुनी जाती है तो लोगों का भरोसा प्रशासन पर और मजबूत हो जाता है. यहां जनता दरबार में जब एक बुजुर्ग ने रोते हुए डीसी से न्याय की गुहार लगाई.
बिहार के भोजपुर से पहुंचे बुजुर्ग फरियादी ठाकुरजी यादव ने डीसी को अपनी पीड़ा सुनाई. रोते आंख.. कांपती आवाज…आंखों में उम्मीद…और दिल में न्याय की आस लेकर आए हुए फरियादी ठाकुरजी यादव ने रोते हुए डीसी आलोक कुमार से गुहार लगाकर कहा कि बड़ी मेहनत से और पाई-पाई जोड़कर उसने 4 महीने पूर्व पशु मेला से 13 दुधारू गायों को खरीद कर पशुपालन के उद्देश्य से ले जा रहे थे, मिहिजाम थाना की पुलिस के द्वारा वाहन जांच के क्रम में पर्याप्त दस्तावेज नहीं रहने के कारण सभी पशुओं को जब्त कर लिया.
DM ने एसडीओ को लगाया फोन, बुजुर्ग को मिला न्याय
13 गायों को पुलिस ने जबरन किया जब्त
जबकि सभी पशु दुधारू हैं और पशुपालन के उद्देश्य से खरीद कर ले जा रहे थे. जब्त किए गए पशुओं को श्री कृष्ण गौशाला में रखा गया है, जहां उनमें से 11 गर्भवती गायों ने बछड़े को जन्म दिया है एवं इनमें से 6 बछड़ों की मौत हो गई है एवं गायें भी बीमार है, जिसे समुचित देखभाल की आवश्यकता है. चार महीने से यह बुजुर्ग इंसाफ की आस में थाना और अनुमंडल कार्यालय के चक्कर काट रहा है. सबसे दर्दनाक बात यह है कि जब्त गायों के चारा, दवा और देखभाल का खर्च भी उसी को उठाना पड़ रहा है. यह दर्द सुनाते-सुनाते उसकी आवाज भर्रा गई. जनता दरबार में जब उसने डीसी के सामने अपनी व्यथा रखी तो उसका दर्द आंसुओं में बदल गया. वह बार-बार बस यही कह रहा था.
‘साहब मेरी गाय ही सबकुछ है’
‘साहब, गाय ही मेरा सबकुछ है… इन्हीं से मेरा घर चलता है… इन्हें बचा लीजिए… ‘यह कहकर उन्होंने डीसी से उचित कार्रवाई एवं न्याय की गुहार लगाई. जनता दरबार में मौजूद लोग भी उस वक्त भावुक हो गए, लेकिन इसके बाद जो हुआ…उसने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया. आलोक कुमार ने कागजात देखकर मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एसडीओ को फोन लगाकर जब्त करने का कारण पूछा.
उन्होंने पशु मेला से गाय खरीद की रसीद होने के बावजूद जब्त किए जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की. डीसी ने कड़ा निर्देश दिया कि जल्द से जल्द नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जब्त किए गए दुधारू पशुओं को उनके पशुपालक को सुपुर्द करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें. डीसी ने जनता दरबार के माध्यम से अधिकारियों को स्पष्ट रूप से दिशा निर्देश देते हुए कहा की आमजनों की समस्याओं के संदर्भ में लापरवाही एवं शिथिलता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसे में अधिकारी सुनिश्चित करें कि उन्हें कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े, जो भी कार्य नियमनुसार किए जा सकते हैं, उसे बिना अनावश्यक विलंब के पूर्ण करें एवं प्रशासन की संवेदनशीलता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.
डीसी की तारीफ कर रहे हैं लोग
जनता दरबार में डीसी के इस सख्त और संवेदनशील रवैये को देखकर वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर संतोष नजर आया. डीसी की बात सुनकर बुजुर्ग की आंखों में फिर से उम्मीद की चमक लौट आई. चार महीनों से टूट चुका वह इंसान पहली बार यह महसूस कर रहा था कि शायद अब उसे न्याय मिल सकेगा. ऐसे में लोगों का कहना था कि अगर इसी तरह प्रशासन आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुने तो गरीब और जरूरतमंद लोगों को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. फिलहाल जनता दरबार में उठी यह आवाज अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है,और लोग डीसी के इस फैसले और तत्परता की सराहना कर रहे हैं.
आपको बता दें कि डीसी आलोक कुमार ने अपने कार्यालय प्रकोष्ठ में जनता दरबार का आयोजन कर आमजनों की समस्याओं/शिकायतों को सुना. यहां आयोजित जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों से आये करीब 40 से अधिक फरियादियों ने अपनी समस्याओं/शिकायतों को डीसी के समक्ष रखा. डीसी ने प्राप्त आवेदनों के जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को आवेदनों को बढ़ाते हु एक सप्ताह के अंदर हल करने एवं डीसी कार्यालय को अवगत कराने का निर्देश दिया. वहीं, मौके पर कई शिकायतों को ऑन द स्पॉट हल कर दिया गया.
बच्ची ने लगाई जन्म प्रणाण पत्र की फरियाद
वहीं, जनता दरबार के दौरान अपने परिजन के साथ आई एक बच्ची ने बताया कि उसका जन्म 2010 में सदर अस्पताल में हुआ है, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं रहने के कारण उनका जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है, साथ ही डीसी से इसमें हस्तक्षेप की मांग की. डीसी ने उनके आवेदन को एसडीओ को अग्रसारित करते हुए प्रमाण पत्र निर्गत करने की दिशा में समुचित कार्रवाई का तुरंत निर्देश दिया.
इसके अलावा जनता दरबार में केसीसी ऋण माफी को आस लेकर पहुंची एक महिला ने डीसी से गुहार लगाते हुए बताया कि करीब 2 साल पहले उनके पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. हाल में वह भी दुर्घटना में घायल हो गई, उसके छोटे -छोटे बच्चे हैं, जिसकी जिम्मेदारी उसके ऊपर है. कोई सहारा नहीं है. बैंक द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड ऋण को वे चुकाने में असमर्थ हैं, ऋण माफी को लेकर महिला के द्वारा लगाए गुहार पर डीसी ने प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जिला कृषि पदाधिकारी एवं एलडीएम को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया.
वहीं, जनता दरबार में ऐसे कई मामले आए, जो अवैध कब्जा, भूमि विवाद, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, मारपीट, निजी जमीन पर घर नहीं बनाने देने से संबंधित थे. इसके अलावा बिजली कनेक्शन देने, 11000 वोल्ट के पोल को साइड करने, अंबेडकर आवास देने, जालमीनार की समस्या सहित विभिन्न बिंदुओं पर यथोचित समाधान से संबंधित अधिकारियों को अग्रसारित किया. जबकि सिविल कोर्ट से हल योग्य मामले को उन्होंने संबंधित कोर्ट में अपील करने के लिए लोगों को जानकारी दी.