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‘E-20 पर नहीं चलेगी जबरदस्ती’, केजरीवाल ने सरकार के सामने रखीं तीन...


नई दिल्‍ली. आम आदमी पार्टी की ओर से शनिवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन ब्लब में आयोजित नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20 का मुद्दा छाया रहा. इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने देशवासियों की तरफ से केंद्र सरकार के सामने तीन मांगे रखी. पहला, पेट्रोल पंप पर ई-20 और शुद्ध पेट्रोल का विकल्प होना चाहिए. दूसरा, शुद्ध पेट्रोल से ई-20 सस्ता होना चाहिए और तीसरा, पेट्रोल का दाम 84 रुपए प्रति लीटर से कम होना चाहिए.

उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार ट्रम्प को खुश करने के लिए हमारे देश के लोगों पर जबरदस्ती इथेनॉल थोप रही हैं. अमेरिका इथेनॉल का उत्पादन करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है. पिछले साल भारत ने अमेरिका से 1 बिलियन लीटर इथेनॉल आयात किया था. इस साल ई-20 लागू होने के बाद भारत पिछले साल की तुलना में अमेरिका से 5 गुना अधिक इथेनॉल इंपोर्ट करेगा. ट्रम्प को खुश करने के लिए केंद्र सरकार देश की जनता को बर्बाद कर रही है.

उन्होंने देश के लोगों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीदना बंद कर दें. जब तक देश में ई-100 की गाड़ियां बननी शुरू न हो जाएं, तब तक गाड़ी न खरीदें. नहीं तो यह सरकार आपको बर्बाद कर देगी.

आवाज उठाने वालों को बता रहे हैं एंटी नेशनल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम मोदी ने ई-20 मिलावटी पेट्रोल हमारे देश के ऊपर थोपा है. इससे देश की जनता बहुत ज्यादा परेशान है. 7 लाख से ज्यादा लोग इस मुद्दे पर अपना समर्थन प्रकट करने के लिए जुड़े हैं. मुझे पूरा यकीन है कि केंद्र सरकार भी यह कार्यक्रम देख रही होगी. जब भी इनके मंत्री आते हैं, तब कहते हैं कि ई-20 सेफ है, ई-20 से कोई प्रॉब्लम नहीं है. ई-20 के खिलाफ आवाज उठाने वाले एंटी-नेशनल हैं.

मैं उनसे कहना चाहता हूं कि आज हमने इतनी सारी टेस्टिमनीज उनके सामने रखीं और इतने सबूत रखे. लोकल सर्कल्स नाम की एक संस्था ने देशभर में गाड़ियां इस्तेमाल करने वाले 45 हजार लोगों का सर्वे किया है. उसमें पता चला कि 67 फीसद लोगों की माइलेज कम हो गई और 45 फीसद लोगों के इंजन खराब हो गए. आज इतने लोगों ने अपनी व्यथा रखी, क्या ये सारे झूठे हैं और यह सारा गलत है? फिर भी इनके मंत्री आकर कहते हैं कि ई20 ठीक है.

ई-20 पर कोई स्टडी है रखें देख के सामने
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार जवाब में कोई रिपोर्ट, कोई वैज्ञानिक स्टडी या कोई इंजीनियरिंग की बात तो रखे, लेकिन वे कुछ नहीं रखेंगे. वे कहते हैं कि उन्होंने स्टडी करा ली है. अगर स्टडी करा ली है तो उसकी कोई रिपोर्ट तो होगी, वे उस रिपोर्ट को दिखाएं. हम भी पढ़े-लिखे हैं और उनसे ज्यादा ही पढ़े-लिखे हैं. उनकी डिग्री तो नकली है, लेकिन हमारी डिग्री असली है. मेरी डिग्री लोगों ने आरटीआई के तहत मांग रखी है और मेरे इंस्टिट्यूट आईआईटी खड़गपुर ने वह दी हुई है. मैंने उनकी डिग्री मांग ली, तो मेरे खिलाफ क्रिमिनल केस कर दिया गया. गुजरात में मेरे खिलाफ ट्रायल चल रहा है कि मैंने उनकी डिग्री क्यों मांगी? अगर उनकी कोई रिपोर्ट है तो वे रिपोर्ट दिखाएं. देश के अंदर इस पर बातचीत तो होनी चाहिए.

केजरीवाल बोले- सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन खरीदें
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि सरकार कह रही है कि ई-25, ई-30 या ई-40 अभी नहीं ला रहे. अभी स्टडी चल रही है. वे बस यह देख रहे हैं कि यह मुद्दा कितने दिन में ठंडा पड़ता है. जैसे ही मुद्दा शांत होगा वे ई-25, ई-30 और ई-40 ले आएंगे. वे कोई स्टडी नहीं कर रहे, गुंडागर्दी कर रहे हैं और देश के साथ जबरदस्ती कर रखी है. इसलिए मेरी अपील है कि पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां खरीदना बंद कर दो. जैसे ई-10 वाली गाड़ियों में धक्का करके ई-20 ले आए और गाड़ियां खराब हो गईं. अगले साल ई-10 वाली गाड़ी में ई-25, ई-30 और ई-40 ले आएंगे और भट्ठा बैठ जाएगा.

अभी ई-20 वाली गाड़ियां मार्केट में मिल रही हैं, कल उसमें ई-30 आ गया तो वो भी खराब हो जाएंगी. पहले सरकार को ई-100 ले आने दो, उसके बाद गाड़ी खरीदना. खरीदनी हो तो इलेक्ट्रिकल व्हीकल खरीदना. डीजल वाली भी मत खरीदना, क्योंकि ये लोग डीजल में भी मिलावट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. जब तक भारत के अंदर ई-100 की गाड़ी बनना शुरू न हो जाए, कोई गाड़ी मत खरीदना. ये धोखा दे रहे हैं, ई-10 की गाड़ी में ई-20 डालेंगे, ई-20 की गाड़ी में ई-50 डालेंगे, 50 की गाड़ी में ई-100 डालेंगे.

कई ऑटो कंपनियां ने माना ई-20 सुरक्षित नहीं
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैंने भारत में पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर बनाने वाली 29 कंपनियों को चिट्ठी लिखी. मैंने उनसे दो ही चीजें पूछीं कि 2023 से पहले बनी उनकी गाड़ियों में ई-20 इस्तेमाल हो सकता है क्या? अगर हो सकता है और किसी की गाड़ी खराब हो जाए या माइलेज कम आए, तो क्या वे लिखकर देंगे कि हर्जाना वे देंगे? किसी का लिखित जवाब नहीं आया, लेकिन नौ कंपनियों के अफसरों से मेरी डिटेल में बात हुई. वे बोले कि 2023 के पहले वाली गाड़ियां ई-10 थीं, उनमें ई-20 इस्तेमाल नहीं हो सकता.

पेट्रोल से महंगा है इथेनॉल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इथेनॉल पेट्रोल से महंगा है. सारे टैक्स हटा दें तो पेट्रोल 50 रुपए और एथेनॉल 70 रुपए पड़ता है. कैलोरीफिक वैल्यू कम होने के कारण एथेनॉल की माइलेज भी कम है. सरकार कह रही थी कि एथेनॉल से फॉरेन एक्सचेंज बचती है, लेकिन कई कैलकुलेशन से साफ हो गया है कि इससे कोई फॉरेन एक्सचेंज नहीं बचती. एथेनॉल से किसान को भी कोई फायदा नहीं हो रहा है, बल्कि जहां इसके प्लांट लगे हैं वहां 20-20 किमी तक पानी और जमीन बर्बाद हो गई है, जिससे किसान दुखी है. अगर एथेनॉल से कोई फायदा नहीं है तो मोदी जी इसे पूरे देश में जबरदस्ती क्यों थोप रहे हैं?

5 बिलियन लीटर एथेनॉल इंपोर्ट करेगी सरकार
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की रिसर्च में सामने आया है कि भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील साइन हुई है. उसमें लिखा है कि अगले 5 साल में भारत को अमेरिका से 100 बिलियन डॉलर का सामान खरीदना कंपलसरी है. अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक है लेकिन वहां इसकी खपत नहीं है. अमेरिका में ई-10 से भी कम का इस्तेमाल होता है और वहां भी पेट्रोल पंप पर ऑप्शन मिलती है. ई-20 लागू करने के बाद इस साल भारत, पिछले साल के मुकाबले पांच गुना ज्यादा एथेनॉल इंपोर्ट करेगा और यह सारा अमेरिका से आएगा. पिछले साल 1 बिलियन लीटर एथेनॉल अमेरिका से इंपोर्ट किया गया था. इस साल 5 बिलियन लीटर एथेनॉल इंपोर्ट किया जाएगा. ट्रंप को खुश करने के लिए भारत के ऊपर जबरदस्ती एथेनॉल थोपा जा रहा है.

केजरीवाल ने पूछा- आखिर क्‍या है मजबूरी
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 2018 में केंद्र सरकार ने ऐलान किया था कि 2030 तक देश के अंदर ई-20 लागू करेंगे, लेकिन ट्रंप के आने के बाद पीएम मोदी कह रहे हैं कि 2025-2026 में ही ई-20 लागू कर दिए. 5 बिलियन लीटर का मतलब हुआ लगभग ढाई बिलियन डॉलर. एक साल में ढाई बिलियन डॉलर का एथेनॉल भारत अमेरिका से खरीदेगा. 5 साल में 15 से 20 बिलियन डॉलर का एथेनॉल हम खरीदेंगे. 100 बिलियन डॉलर के सामान में से 20 बिलियन डॉलर का एथेनॉल हम अमेरिका से खरीदेंगे, जिसकी हमें कोई जरूरत नहीं है. पीएम मोदी की जो भी मजबूरी हो, लेकिन उन्होंने लोगों की गाड़ियां खराब कर दीं हैं.

डर खत्म हुआ तो डोलेगा सिंहासन- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि युवाओं का आंदोलन अभी सफल हुआ और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. उसका टर्निंग पॉइंट क्या था? केंद्र सरकार को बड़ा गुरूर था कि इन बच्चों को तो वे देख लेंगे. एक दिन उन्होंने सोनम वांगचुक को जबरदस्ती वहां से उठा दिया. उनको लगा कि सोनम वांगचुक को उठा देंगे तो धरना खत्म हो जाएगा, लेकिन धरना और बढ़ गया. फिर 20 जुलाई को उनको लगा कि इनको डंडे मारो, आंसू गैस छोड़ो. उन्होंने अपने ही बच्चों के सर फोड़ दिए, टांगे तोड़ दीं और खूब मारा. उनको लगा कि मां-बाप और बच्चे डर जाएंगे. लोग डर भी जाते हैं, मां-बाप कहते हैं कि खबरदार जो गया. लेकिन कुछ तो चमत्कार हुआ. एक बार तो जंतर-मंतर खाली हो गया था, लेकिन रात होते-होते 20 जुलाई की रात को 4-5 हजार से लेकर 10 हजार लोग जंतर-मंतर पहुंच गए. जब जनता के बीच से डंडे का डर खत्म हो जाता है, तो सिंहासन डोलने लगता है. 20 जुलाई की रात ने ही तय कर दिया था और उसी दिन मैंने अपने दोस्तों को बोल दिया था कि अब तो धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ेगा.



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