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E20 vs E10 vs Pure Petrol : सरकार ने ई-20 पर जारी विवादों के बीच साफ कर दिया है कि देश के करीब सवा लाख पेट्रोल पंप पर अलग-अलग ग्रेड के ईंधन उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा. ऐसा करने के लिए विशाल लॉजिस्टक्स की जरूरत तो होगी ही, भारी-भरकम निवेश भी करना पड़ेगा.
सरकार ने साफ कर दिया है कि ई-20 पेट्रोल का विकल्प देना संभव नहीं है.
नई दिल्ली. ई-20 पेट्रोल पर तमाम विवादों के बाद सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपना पक्ष सामने रख दिया है. इस विवाद के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि लोगों को ई-20 पेट्रोल के साथ ही शुद्ध पेट्रोल और कम एथनॉल वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाएगा. लेकिन, अब पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जब बेहतर क्वालिटी वाला ई-20 पेट्रोल उपलब्ध है तो ई-10 अथवा शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने की कोई जरूरत ही नहीं. सरकार ने यह भी कहा है कि ई-20 पेट्रोल की कीमत भी कम करना संभव नहीं है, क्योंकि इसका मकसद आयात का बोझ घटाना है, न कि पेट्रोल की कीमत घटाना.
सरकार ने ई-20 के साथ अन्य विकल्प उपलब्ध कराने को लेकर साफ कह दिया है कि ऐसा करना संभव नहीं है. सरकार ने कहा है कि देश में कई ग्रेड के ईंधन उपलब्ध कराना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए लॉजिस्टक्स की बड़ी चुनौती है. देश के कोने-कोने में अलग-अलग ग्रेथ के ईंधन पहुंचाना आसान नहीं है. फिलहाल 20 फीसदी एथनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल वाला ई-20 ईंधन कहीं बेहतर, शुद्ध और स्वच्छ है. अब अगर कम एथनॉल वाला पेट्रोल बनाना है तो इसके लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी.
भारत ने 5 साल पहले पूरा कर लिया लक्ष्य
भारत सरकार ने वैसे तो पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिलाने का लक्ष्य साल 2030 तक रखा था, लेकिन इसे पिछले साल ही हासिल कर लिया. वर्तमान में देशभर में ई-20 पेट्रोल ही बेचा जा रहा है. हालांकि, पिछले दिनों तमाम उपभोक्ताओं ने इस ईंधन से माइलेज कम होने और इंजन पर असर पड़ने की शिकायत की थी. उनका कहना था कि ऐसे वाहनों के इंजन जो एथनॉल के इस्तेमाल के लिए नहीं बने हैं, उन पर ई-20 ईंधन का खराब असर पड़ सकता है.
सरकार ने क्यों बताया बेहतर
सरकार का कहना है कि ई-20 पेट्रोल से भले ही पुराने वाहनों का माइलेज 3 से 5 फीसदी कम हो जाए लेकिन इसके अन्य कई फायदे भी हैं. यह ईंधन ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग वाला है, जो एंटी नॉक विशेषता भी रखता है. इसके अलावा यह ईंधन तेजी से जलने के साथ पिकअप भी बेहतर करता है और वाहन की गति भी तेज करता है. इतना ही नहीं, ई-20 ईंधन की वजह से वाहन का इंजन भी आगे चलकर साफ हो जाता है. सरकार ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि ई-20 ईंधन से वाहनों के इंजन को कोई नुकसान हो सकता है.
कई ग्रेड के ईंधन देना संभव नहीं
सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत जैसे विशाल देश में ई-20 के साथ कई ग्रेड के ईंधन को उपलब्ध कराना संभव नहीं है. जैसा कि अन्य देशों में ई-10 और ई-20 दोनों ग्रेड के ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार का कहना है कि जब स्वच्छ, तेज और कम प्रदूषण वाला ईंधन उपलब्ध है तो इसका विकल्प क्यों खोजा जाए. देश के हर पेट्रोल पंप पर ई-20, ई-10 और शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा. देश के कोने-कोने में रिफाइनरी, डिपो और पाइपलाइंस के जिरये ईंधन भेजा जाता है, जो करीब सवाल लाख पेट्रोल पंप पर जाता है. ऐसे में हर ग्रेड के ईंधन को उपलब्ध कराना संभव नहीं है. इससे लागत तो बढ़ेगी ही, लॉजिस्टक्स को लेकर भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें