बिहार-यूपी से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक पिछले हफ्ते खूब झमाझम बारिश ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी थी. इस जोरदार जोरदार बारिश से ऐसा लगा कि मानसून आखिरकार रफ्तार पकड़ चुका है और एल नीनो को लेकर जताई जा रही चिंता अब दूर हो गई है. कई राज्यों में झमाझम बारिश के बाद खेतों में हलचल बढ़ी और किसानों के चेहरों पर उम्मीद लौट आई. हालांकि यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी. मानसून ने एक बार अपनी चाल बदल ली है और देश में बारिश का घाटा फिर बढ़ने लगा है, जिससे देश के 60 करोड़ किसानों पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, जून के आखिर तक देश में सामान्य से 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी. जुलाई के पहले हफ्ते में अच्छी बारिश होने से यह कमी घटकर 14 फीसदी रह गई थी, लेकिन अब बारिश की रफ्तार थमने के कारण यह घाटा फिर बढ़कर 18 फीसदी पहुंच गया है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले छह से सात दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत, पश्चिम-मध्य भारत के मैदानी इलाकों और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है.
खेती पर सबसे बड़ा असर
मानसून की इस सुस्ती का सीधा असर खेती पर दिखाई देने लगा है. पिछले सप्ताह बारिश के चलते खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई थी, लेकिन अब कई इलाकों में किसान फिर आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं. धान, दालें, तिलहन और दूसरी खरीफ फसलों का रकबा अब भी पिछले साल के मुकाबले कम है. सबसे ज्यादा चिंता बिहार-यूपी जैसे राज्यों के उन इलाकों के लिए है, जहां खेती पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है और सिंचाई के सीमित साधन हैं.
15 राज्यों में 20 फीसदी कम बारिश
आईएमडी के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 12 जुलाई के बीच देश के 15 राज्यों में सामान्य से 20 फीसदी या उससे अधिक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. बिहार, झारखंड, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश की कमी लगातार बनी हुई है. कुछ इलाकों में यह कमी 70 फीसदी से भी ज्यादा दर्ज की गई है.
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है. पूरे क्षेत्र में सामान्य से 37 फीसदी कम बारिश हुई है. बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में कमजोर मानसून का असर साफ दिखाई दे रहा है.
बारिश होगी, लेकिन घाटा भरना मुश्किल
आईएमडी का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी अगले चार-पांच दिनों तक कुछ स्थानों पर अच्छी बारिश के आसार हैं. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बारिश फिलहाल मानसून के कुल घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होगी.
एल नीनो बढ़ा रहा मुश्किलें
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि इस साल एल नीनो का असर भी मानसून पर साफ दिखाई दे रहा है. एल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिसका असर भारत में मानसूनी बारिश पर पड़ता है. ऐसे वर्षों में आमतौर पर बारिश कम होती है और गर्मी ज्यादा पड़ती है. यही कारण है कि इस बार भी मानसून लगातार उतार-चढ़ाव दिखा रहा है.
कृषि आंकड़ों पर भी उठे सवाल
इसी बीच टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सांख्यिकी मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट में कृषि आंकड़ों के संग्रह को लेकर गंभीर खामियों का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार फसल रकबा और उत्पादन का आकलन करने वाली गिरदावरी प्रक्रिया कई राज्यों में समय पर पूरी नहीं हो रही है. वर्ष 2023-24 में आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में गिरदावरी पूरी न होने की दर काफी अधिक रही.
फसल उत्पादन के सटीक आंकड़े सरकार के लिए बेहद अहम होते हैं. इन्हीं के आधार पर निर्यात पर रोक, आयात शुल्क में बदलाव या महंगाई नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक जारी करने जैसे बड़े फैसले लिए जाते हैं. ऐसे में अगर आंकड़े समय पर और सही तरीके से उपलब्ध नहीं होंगे तो खाद्य सुरक्षा और कृषि नीति दोनों प्रभावित हो सकती हैं.