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पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में ईको टूरिज्म का नया मॉडल तैयार किया गया है. अब बारिश के मौसम में भी नए लोकेशन पर जंगल सफारी चालू रहेगी. इसके लिए किला-कमलदह सर्किट और 400 हेक्टेयर का नया ग्रासलैंड विकसित किया गया है. इस पहल से स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा.
पलामूः झारखंड का इकलौता टाइगर रिजर्व पलामू में है. जिसका इतिहास आज भी लोगों को हैरान करता है. वहीं पर्यटकों को वन्य जीव से जोड़ने और सुविधाएं बढ़ाने के लिए आज भी वन विभाग के द्वारा एक से बढ़कर एक प्रयास किए जा रहे है. जिसमें अब जंगल सफारी के लिए नए लोकेशन को तैयार किया जा रहा है.
बता दें कि बेतला नेशनल पार्क भारत देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता है. जहां की लगभग 1980 के दशक में यहां जंगल सफारी की शुरुआत की गई थी. उस समय इसका उद्देश्य लोगों को वन्यजीवों और प्रकृति के करीब लाना, जंगल संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना था. बेतला में शुरू हुआ यह मॉडल आगे चलकर देश के कई अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में भी अपनाया गया.
वहीं, समय के साथ जंगल सफारी वन्यजीव पर्यटन का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई. अब बदलती परिस्थितियों और पर्यटकों की नई अपेक्षाओं को देखते हुए बेतला नेशनल पार्क में सफारी का एक नया मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिससे वर्षा ऋतु में भी पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों से जोड़ने का अवसर मिल सके. इसके लिए नए तरीके से नए लोकेशन पर तैयार किया जा रहा है.
PTR के डिप्टी डायरेक्टर ने क्या कहा?
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने लोकल18 को बताया कि देश के सभी टाइगर रिजर्व में बारिश के मौसम के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन (ब्रीडिंग) सीजन को ध्यान में रखते हुए जंगल सफारी पर नियमानुसार प्रतिबंध रहता है. बेतला टाइगर रिजर्व में भी निर्धारित अवधि तक कोर एरिया की सफारी बंद रहती है. हालांकि इस दौरान पेरिफेरल और बफर क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुले रहते हैं, जहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ वन्यजीवों की गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं. इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए वन विभाग अब एक नई पर्यटन योजना पर काम कर रहा है.
उन्होंने आगे बताया कि नई योजना के तहत किला–कमलदह सर्किट को विकसित किया जा रहा है, जिसे पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस क्षेत्र में ऐतिहासिक पलामू किला, कमलदह झील, प्राकृतिक जलस्रोत और घने जंगल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं. यहां अक्सर जंगली जानवरों का आवागमन होता है. जिससे सफारी का अनुभव और रोमांचक बनता है. वन विभाग का प्रयास है कि बारिश के मौसम में भी पर्यटकों को सुरक्षित और आकर्षक जंगल भ्रमण का विकल्प उपलब्ध कराया जाए.
स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी है. किला–कमलदह क्षेत्र के आसपास के गांवों के युवाओं को ड्राइवर और नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं पर्यटकों को क्षेत्र की जैव विविधता, इतिहास और संस्कृति की बेहतर जानकारी भी मिल सकेगी. स्थानीय समुदाय की भागीदारी से जंगल संरक्षण और पर्यटन के बीच मजबूत समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है.
उन्होंने यह भी बताया कि इस नए सफारी मॉडल में बेतला नेशनल पार्क के नव विकसित 400 हेक्टेयर ग्रासलैंड क्षेत्र, ऐतिहासिक पलामू किला और कमलदह झील के पूरे इलाके को शामिल किया जाएगा. इस ग्रासलैंड के विकास का उद्देश्य वन्यजीवों के लिए बेहतर आवास तैयार करना और पर्यटकों को वन्यजीवों के सहज दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है. यह नया मॉडल न केवल वर्षा ऋतु में पर्यटन गतिविधियों को गति देगा, बल्कि बेतला को देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में नई पहचान भी दिलाएगा.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.