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Investment Tips : 2 साल से ज्यादा टाइम के लिए करना है...


नई दिल्ली. निवेशकों को अक्सर ऐसे विकल्प की तलाश रहती है जहां उन्हें अच्छा रिटर्न तो मिले ही, टैक्स बचाने में भी कारगर साबित हो. अगर आप भी ऐसे ही किसी निवेश विकल्प की तलाश में हैं तो निप्पॉन इंडिया का नया फंड ऑफर (NFO) आपकी इस दोहरी इच्छा को पूरा कर सकता है. यह फंड 17 अगस्त को बाजार में उतारा गया है और इसमें 31 अगस्त, 2026 तक निवेश का मौका है. एनएफओ भी एक तरह का आईपीओ होता है, जो किसी नए म्यूचुअल फंड को लॉन्च करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. निप्पॉन का यह म्यूचुअल फंड उतार-चढ़ाव से बचाने के साथ ही टैक्स बचाने में भी कारगर है.

निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड (NIMF) ने उतार-चढ़ाव वाले बाजार से निवेशकों को बचाने के लिए नया फंड ऑफर (NFO) पेश किया है. इसका नाम निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड है, जो कम उतार-चढ़ाव और बेहतर टैक्स-एफिशिएंसी के साथ बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न देता है. इसका मतलब है कि इस फंड पर जोखिम कम, रिटर्न स्थिर और ज्यादा टैक्स बचत का तिहरा लाभ मिलता है. इस एनएफओ में 17 अगस्त से 31 अगस्त, 2026 तक निवेश किया जा सकता है.

कैसे काम करता है फंड
निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंडअपने पूरे फंड (95% से 100%) का निवेश आर्बिट्राज म्यूचुअल फंड, एक्टिव और पैसिव डेट म्यूचुअल फंड के कॉम्बिनेशन में करता है. इसका अधिकतम 5% हिस्सा डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जा सकता है. यह आर्बिट्राज फंड में कम से कम 35% निवेश करता है, जबकि एक्टिव डेट फंड, पैसिव डेट फंड और मनी मार्केट में निवेश किसी भी समय 65% से कम ही रहेगा.

क्यों फायदेमंद है यह फंड
निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्रेज ओम्नी फंड ऑफ फंड का नेचर और बनावट इसे टैक्स के लिहाज से बहुत फायदेमंद बनाता है. चूंकि, यह फंड 65% से कम निवेश करता है, लिहाजा इसकी बनावट उन निवेशकों के लिए भी इसे टैक्स-एफिशिएंट बनाती है जिनका निवेश का समय कम से कम दो साल का है. अगर यूनिट्स को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है, तो मुनाफे पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के तौर पर 12.5% टैक्स लगता है. 24 महीने से कम समय तक रखने पर इस पर लगने वाला टैक्स निवेशक के स्लैब रेट के हिसाब से लगता है.

टैक्स के अलावा और क्या फायदे
यह फंड शुद्ध डेट और आर्बिट्रेज फंड्स की तुलना में कई अन्य फायदे भी देता है. जहां डेट-ओरिएंटेड फंड्स मुख्य रूप से डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं और आर्बिट्रेज फंड्स हेज्ड इक्विटी पोजीशन के जरिये आर्बिट्रेज रणनीति अपनाते हैं. यह NFO इन दोनों का कॉम्बिनेशन एक ही पोर्टफोलियो में लाता है. फंड मैनेजर अंडरलाइंग स्कीम के चयन और एलोकेशन का फैसला लेता है, जिससे निवेशकों को एक ही विक्ल्प में कई रणनीतियों का फायदा मिलता है. निवेशक खुद अलग-अलग स्कीम के बीच स्विच किए बिना या कई तरह की अंडरलाइंग स्ट्रेटजी का फायदा उठा सकते हैं. फंड मैनेजर जरूरत के हिसाब से ‘फंड ऑफ फंड’ में शामिल अंडरलाइंग स्कीम को रीबैलेंस कर सकता है.

कैसे मिलता है बेहतर रिटर्न
इस फंड का मकसद टैक्स बचाने के साथ ही बेहतर रिटर्न देना भी है. इसका डेट वाला हिस्सा बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न देता है, जबकि आर्बिट्राज वाला हिस्सा इक्विटी मार्केट स्प्रेड का फायदा उठाता है. यह निवेश का विकल्प उन निवेशकों के लिए बहुत अच्छा है जो ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम लेना चाहते हैं, एक्रूअल रिटर्न (समय के साथ मिलने वाला रिटर्न) चाहते हैं और जिनके निवेश का समय दो से तीन साल का है.

(Disclaimer: यहां बताए गए फंड ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्‍टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)



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