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Lunar Crater Study: रांची के BIT मेसरा की 2 महिला प्रोफसेर और एक पीएचडी के स्टूडेंट ने ऐतिहासिक रिसर्च किया है तीनों ने Crater Morpho टूल से चांद के crater की सफल स्टडी पूरी की है. अब ISRO इसे सैटेलाइट लैंडिंग में अपनाएगा. वहीं, NASA ने भी प्रोजेक्ट की सराहना की है.
रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित बीआईटी मेशरा के कंप्यूटर साइंस ब्रांच की 2 प्रोफेसर और एक पीएचडी स्टूडेंट ने मिलकर चांद के क्रेटर ( चांद के ऊपर जो गड्ढे होते हैं) की स्टडी सफलतापूर्वक की है. अब इनकी इस स्टडी को इसरो अपने सैटेलाइट लॉन्च में इस्तेमाल करेगा. इतना ही नहीं, नासा ने भी इनके प्रोजेक्ट की तारीफ की है. दरअसल, crater की सटीक जानकारी से सेटेलाइट लैंड करने में काफी आसानी हो जाती है.
इसे स्टडी करने के लिए कस्टमाइज टूल क्रेटर Morpho भी बनाया है. यह टूल उन्होंने खुद ही बनाया है. इस टूल की मदद से मंगल और शुक्र तक में अब अपने सैटेलाइट सफलतापूर्वक उतार सकते हैं. डॉ संचिता पॉल ने बताया कि यह जो कस्टमाइज टूल हम लोगों ने बनाया है. इसकी मदद से भविष्य में ग्रहों पर ऑटोमेटिक ही crater की पहचान हो पाएगी.
होंगे ये सारे फायदे
इससे उसका रेडियस, डायमीटर, उसका खुद्रपन, उसकी ढाल हर एक चीज पता चल जाएगी. इसकी स्टडी से यह भी पता चलेगा कि चांद व अन्य ग्रह पर कितना तूफान आया, कितना वोल्कानिक इरप्शन हुआ, कितने स्टेरॉयड (steriods) टकराये हैं. धरती की इवैल्यूएशन और सोलर सिस्टम को समझने में भी काफी मदद मिलेगी. ब्रह्मांड में क्या गतिविधि हो रही है. यह भी समझने में काफी मदद मिलेगी.
रिमोट सेंसिंग डिपार्टमेंट की डॉ. मिली घोष बताती हैं कि यह स्टडी तो हमने फिलहाल चांद के एक एरिया में किया है, लेकिन यह आगे चलकर अन्य ग्रहों के विश्लेषण में काफी अहम भूमिका निभाने वाली है. हम मंगल और शुक्र तक में इसके जरिए कई सारी अहम जानकारी जुटा पाएंगे.
लैंडिंग में crater की होती है अहम भूमिका
सीनियर रिसर्चर में मिमास्ना ने बताया, जब भी कोई सैटेलाइट लैंड करता है तो उसमें crater की अहम भूमिका होती है. अगर एक भी Crater टकराता है तो सब कुछ बर्बाद हो सकता है. ऐसे मे crater स्टडी काफी महत्वपूर्ण होती है. यह सेंसर ऑटोमेटिक crater को डिटेक्ट कर लेगा और हम किसी भी सैटेलाइट को किसी भी ग्रह में सफलतापूर्वक लैंड कर सकते हैं.