’30 साल उम्र हो गई है। पांच साल से जेपीएससी-जेएसएससी की तमाम परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं। समझ नहीं आ रहा क्या होगा मेरा। एक तो झारखंड में समय पर परीक्षाएं नहीं होती। परीक्षा होती है तो उसमें धांधली सामने आ जाती है।
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उम्र खत्म होने का डर सताने लगा है। किसान परिवार से आता हूं। परीक्षा के फॉर्म भर सकूं, इसलिए छोटे-छोटे काम करता हूं। समझ नहीं आता अब नौकरी मिलेगी या नहीं। ‘
यह कहना है कोडरमा से प्रोटेस्ट में शामिल होने पहुंचे रवि की। रांची में विधानसभा घेराव करने प्रदेश से आए हजारों युवाओं में अधिकांश की लगभग ऐसी ही कहानी है। कई छात्रों ने कहा- दिन पढ़ाई, ग्रुप स्टडी, मॉक टेस्ट में बीत जाता है, लेकिन रात को घर पहुंचता हूं तो पैरेंट्स से नजर नहीं मिला पाता हूं। माता-पिता की नजरें ऐसी होती हैं कि मानो पूछना चाह रहे हों कि तुम्हारी नौकरी कब मिलेगी?
छात्रों की कहानी पढ़ने से पहले विधानसभा घेराव की तस्वीरें देखें….

राज्यभर से आए छात्रों ने विधानसभा का घेराव किया।

हजारों की संख्या में आए छात्रों ने घेराव के दौरान जम कर नारेबाजी की।

विधानसभा तक छात्र न पहुंचे इसलिए कंटीले तारों से बैरिकैडिंग की गई थी।

छात्रों ने घेराव के दौरान विभिन्न वेषभूषा में प्रदर्शन भी किया।
तैयारी करते 9 साल बीत गए, नौकरी नहीं लगी
प्रोटेस्ट में शामिल होने आए कोडरमा के गोरेलाल बताते हैं कि 2017 से JPSC और JSSC की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अब तक JPSC की दो परीक्षाएं दी हैं। इनमें 7वीं से 10वीं और 11वीं से 14वीं सिविल सेवा परीक्षा शामिल हैं। इसके अलावा JSSC की CGL परीक्षा भी दी है। लेकिन एक भी ऐसी परीक्षा नहीं रही, जिसमें धांधली के आरोप न लगे हों। यही वजह है कि मेरा सेलेक्शन नहीं हो पा रहा है।
गोरेलाल ने कहा कि घर पर ही सेल्फ स्टडी और ग्रुप स्टडी करते हैं। इसके बावजूद हर महीने स्टडी मैटेरियल, मैगजीन आदि खरीदने में करीब 1000 से 1200 रुपए खर्च हो जाते हैं। एक तरफ आर्थिक बोझ है, तो दूसरी तरफ सामाजिक और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ रहा है।
हम चाहते है कि हर परीक्षा की जांच हो। साल 2020 से अब तक जितनी भी परीक्षाएं हुई हैं, उनमें किसी न किसी तरह की गड़बड़ी सामने आई है। अब उम्र भी बढ़ने लगी है और 30 साल की उम्र पार हो चुकी है। राज्य में सरकारी नौकरी देने की रफ्तार को देखते हुए अब यह उम्मीद खत्म होने लगी है कि नौकरी मिल पाएगी।

झारखंड के हर प्रतियोगी परीक्षा में होती है धांधली
गोड्डा से आंदोलन में शामिल होने पहुंचे ऋषभ ने बताया कि पिछले चार साल से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान छह से अधिक परीक्षाएं दी हैं। परीक्षा देने के बाद जब कटऑफ मिलता था, तभी पता चल जाता था कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। अब तो लगने लगा है कि सब कुछ छोड़ दें और कोई परीक्षा ही न दें। निराश होने लगा हूं।
ऋषभ कहते हैं कि अब तो पैरेंट्स के पास जाने से डर लगता है। परीक्षाओं की तैयारी बोझ लगने लगी है। हमारे पिता प्राइवेट जॉब करते हैं। परीक्षा की तैयारी का खर्च निकालने के लिए हम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं।
सरकार 500 पदों के लिए भी परीक्षा ले, लेकिन सही तरीके से ले। कम से कम परीक्षा जेन्युइन हो। यहां तो बेईमानी की पराकाष्ठा हो गई है।

प्रदर्शन के दौरान छात्र हाथों में कई तरह के पोस्टर लिए हुए थे।
मानसिक स्थिति ऐसी हो गई है कि हर रात रो कर ही सोना पड़ता है
महगामा से आए सनोज मंडल बताते हैं कि यहां परीक्षाएं समय पर और सही तरीके से नहीं होती हैं। अगर JSSC-CGL की बात करें तो इसका सिलेबस ऐसा है कि आप दूसरी किसी परीक्षा की तैयारी ही नहीं कर सकते। स्नातक पूरा करने के बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। पिछले छह साल से सिर्फ JSSC की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं।
अगर परीक्षा निष्पक्ष तरीके से ली जाए तो वह रैंकर रह सकते हैं। हाल ही में फिल्ड वर्कर की परीक्षा हुई थी, जिसमें उन्होंने 82 फीसदी अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद सेलेक्शन नहीं हो सका।
JSSC की लगभग सभी परीक्षाओं में शामिल हुए हैं। अब मानसिक स्थिति ऐसी हो गई है कि हर रात रोकर सोना पड़ता है। हमारे पिता किसान हैं, जबकि बड़े भाई प्राइवेट जॉब करते हैं। बड़े भाई की मदद से ही हम अब तक परीक्षाओं की तैयारी कर पा रहे हैं।