JPSC PT Result Controversy: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर विवादों में है. 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच आयोग के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा राजभवन भेजा जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया.एल.खियांग्ते का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब आयोग के मुख्यालय पर सीआईडी की टीम ने छापेमारी की थी. इसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. इस बीच JPSC पहले से ही कई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर ACB, CID और CBI जैसी एजेंसियों की जांच का सामना कर रहा है.
कौन हैं एल. खियांग्ते?
एल.खियांग्ते (L.Khiangte)का पूरा नाम लालबिआकतलुआंगा खियांग्ते है.वह 1988 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं. उनका जन्म 26 अक्टूबर 1964 को हुआ था.वे मूल रूप से मिजोरम के आदिवासी समुदाय से आते हैं.उन्होंने इतिहास विषय में स्नातक (Graduation)किया और उसके बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए. लंबे प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें झारखंड के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता रहा है.
किन किन पदों पर रहे हैं एल. खियांग्ते
एल. खियांग्ते ने अपने करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. झारखंड बनने से पहले वे एकीकृत बिहार के बक्सर जिले के जिला अधिकारी (DM)भी रहे.शुरुआत में वे AGMUT कैडर का हिस्सा थे. बाद में वर्ष 2008 में अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति के जरिए झारखंड कैडर में शामिल हुए.उन्होंने झारखंड सरकार में मुख्य सचिव,अपर मुख्य सचिव,प्रमुख सचिव,परीक्षा नियंत्रक,उप विकास आयुक्त, आदिवासी कल्याण आयुक्त और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (ATI) के महानिदेशक जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया.वे 6 दिसंबर 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक झारखंड के मुख्य सचिव रहे.सरकारी सेवा से 31 अक्टूबर 2024 को सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने मार्च 2025 में उन्हें JPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया.
JPSC अध्यक्ष बनने के बाद क्यों बढ़े विवाद?
मार्च 2025 में JPSC की कमान संभालने के बाद आयोग की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में आ गईं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT)के परिणाम को लेकर हुई. परीक्षार्थियों ने परिणाम में अनियमितता, OMR शीट और मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए. लगातार विरोध-प्रदर्शन और छात्रों के दबाव के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच CID को सौंप दी गई.
CID की छापेमारी के बाद बढ़ा मामला
जांच शुरू होने के बाद सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय में छापेमारी की. घंटों चली कार्रवाई के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, मेरिट लिस्ट और परीक्षा से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए.जांच एजेंसी ने परीक्षा संचालन से जुड़े कई कर्मचारियों से पूछताछ भी की. इसी कार्रवाई के कुछ घंटों बाद एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा का जिम्मा
JPSC के ताजा विवादों में परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी TDPL भी जांच के घेरे में है.आरोप है कि यह एजेंसी पहले ही झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC)द्वारा ब्लैकलिस्ट की जा चुकी थी. इसके बावजूद JPSC ने इसी एजेंसी को इतनी महत्वपूर्ण सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंप दी.यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस पूरे फैसले की भी जांच कर रही हैं.
JPSC पर पहले से चल रही हैं कई जांच
JPSC का विवाद केवल 14वीं PT परीक्षा तक सीमित नहीं है.आयोग के गठन के बाद से कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार आरोप लगते रहे हैं.केंद्रीय जांच एजेंसी CBI पहली और दूसरी JPSC सिविल सेवा परीक्षा सहित 11 प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच कर रही है.सीबीआई कई मामलों में अधिकारियों और अभ्यर्थियों के खिलाफ चार्जशीट और पूरक चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है.ये मामले फिलहाल अदालत में लंबित हैं.
ACB और CID भी कर रही हैं जांच
झारखंड में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)भी कर रही है.वहीं हाल के मामलों में CID को भी जांच की जिम्मेदारी दी गई है.14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े विवाद में CID ने एफआईआर दर्ज कर कई स्थानों पर छापेमारी की और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है.
इन भर्ती परीक्षाओं पर भी उठ चुके हैं सवाल
एल.खियांग्ते के कार्यकाल में जिन परीक्षाओं को लेकर सवाल उठे उनमें प्रमुख रूप से
- 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा
- फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर भर्ती
- सहायक वन संरक्षक भर्ती
- झारखंड पात्रता परीक्षा
- परियोजना प्रबंधक भर्ती
- सिविल जज (जूनियर डिवीजन)
- मेडिकल कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
- एपीपी भर्ती जैसी परीक्षाएं शामिल हैं.
राजभवन ने स्वीकार किया इस्तीफा
एल.खियांग्ते का इस्तीफा राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया है हालांकि सरकार या राजभवन की ओर से उनके इस्तीफे के कारणों पर कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CID, ACB और CBI की अलग-अलग जांच के बाद JPSC से जुड़े इन मामलों में आगे क्या कार्रवाई होती है और आयोग की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल करने के लिए सरकार कौन से कदम उठाती है.