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JPSC JSSC Students Protest: 14वीं JPSC रद्द, परीक्षा से विधानसभा मार्च तक,...


JPSC Students Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब बड़े टकराव की स्थिति में पहुंच गया है. 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन अब JSSC-CGL तक पहुंच चुका है. सरकार ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के साथ 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति दे दी है. साथ ही परीक्षा गड़बड़ियों से जुड़े आपराधिक मामलों की CID जांच, वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की बात कही गई है. इसके बावजूद छात्र आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उनकी सबसे बड़ी मांग JSSC-CGL समेत संबंधित परीक्षाओं की CBI जांच है. सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है.

10 अगस्त 2026 को छात्रों ने झारखंड विधानसभा घेराव का मार्च निकालने का फैसला किया है. इससे पहले सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन CBI जांच के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई. आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ, कब-कब क्या हुआ, छात्रों की क्या मांग है और सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं.

विवाद की शुरुआत 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा से हुई

14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाने शुरू किए.बाद में परिणाम जारी होने के बाद इन सवालों ने आंदोलन का रूप ले लिया.JPSC के उपलब्ध परीक्षा कार्यक्रम के मुताबिक यह संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा चक्र 2025 से संबंधित था.

2 जुलाई को रिजल्ट आया और विवाद और बढ़ गया

JPSC ने 2 जुलाई 2026 को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया. 103 पदों के लिए हुई परीक्षा में 1,772 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किए गए. रिजल्ट जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने कटऑफ, स्कोर और OMR से जुड़ी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए. राजनीतिक दलों की ओर से भी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई.यहीं से छात्रों का विरोध धीरे-धीरे बड़ा होने लगा.अभ्यर्थियों की मुख्य चिंता यह थी कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उन्हें पर्याप्त जानकारी और पारदर्शिता नहीं मिल रही है.

जुलाई के मध्य में OMR को लेकर विवाद ने पकड़ा जोर

जुलाई के मध्य में सोशल मीडिया पर एक सफल अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी वायरल हुई. इसके आधार पर परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए. छात्रों ने आरोप लगाया कि कम सवाल सही करने वाले अभ्यर्थी को भी सफल घोषित किया गया हालांकि वायरल OMR और उससे जुड़े दावों को अपने आप में किसी गड़बड़ी का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. इसी वजह से इस पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई. छात्रों ने इसी आधार पर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग तेज कर दी.

CID की कार्रवाई और JPSC अध्यक्ष का इस्तीफा

विवाद बढ़ने के बाद 21 जुलाई को CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय और परीक्षा कराने वाली एजेंसी के ठिकानों पर छापेमारी की. जांच टीम ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल सामग्री जब्त की.इसी घटनाक्रम के बीच JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने पद से इस्तीफा दे दिया.22 जुलाई को CID ने मामले में FIR दर्ज की और शुरुआती कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया.इनमें JPSC की डिप्टी एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी TDPL कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे.

पूर्व JPSC अध्यक्ष के घर पर भी छापेमारी

23 जुलाई को CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के रांची स्थित आवास की तलाशी ली. जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया, रिजल्ट तैयार करने और डिजिटल डेटा के प्रबंधन समेत कई पहलुओं की जांच कर रही थी.इसके बाद पूर्व अध्यक्ष से पूछताछ का सिलसिला भी चला. 10 अगस्त तक सामने आई जानकारी के अनुसार खियांग्ते से CID कई बार पूछताछ कर चुकी थी. इसी दौरान मामले में गिरफ्तारियों की संख्या भी बढ़ती गई और 10 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी.

25 जुलाई के आसपास आंदोलन ने लिया बड़ा रूप

जुलाई के आखिरी सप्ताह तक छात्रों का विरोध रांची में बड़े आंदोलन में बदल गया. छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार प्रदर्शन करने लगे. आंदोलन का नेतृत्व अलग-अलग छात्र संगठनों और JPSC-JSSC सुधार मंच से जुड़े नेताओं ने किया.छात्रों की मांग सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही.वे परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, पारदर्शी मूल्यांकन, OMR और कटऑफ की जानकारी, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती परीक्षाओं का नियमित कैलेंडर जारी करने की मांग करने लगे.

JSSC-CGL का मुद्दा भी आंदोलन के केंद्र में आया

इस आंदोलन में JSSC-CGL परीक्षा का मुद्दा भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया. JSSC-CGL यानी झारखंड जनरल ग्रेजुएट लेवल कंबाइंड कंपटेटिव एग्‍जामिनेशन (Jharkhand General Graduate Level Combined Competitive Examination 2023-24) की परीक्षा सितंबर 2024 में हुई थी. इस परीक्षा को लेकर पहले से ही पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं.इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट के 3 दिसंबर 2025 के फैसले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर SIT जांच हुई थी. अदालत ने कहा था कि संगठित तरीके से मूल प्रश्नपत्र लीक होने का पर्याप्त प्रमाण जांच में सामने नहीं आया था और केवल आरोपों के आधार पर CBI जांच का आदेश देने का आधार नहीं बनता. अदालत ने JSSC को परिणाम जारी करने और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था, जबकि SIT को जांच जारी रखने को कहा गया था.इसके बाद दिसंबर 2025 में JSSC-CGL का अंतिम परिणाम जारी हुआ और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी.यही वजह है कि अब JSSC-CGL को लेकर छात्रों और सरकार के बीच सबसे बड़ा मतभेद सामने आया है.

2 अगस्त को भूख हड़ताल शुरू हुई

आंदोलन और तेज होने के बाद 2 अगस्त के आसपास छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें नहीं मानी जातीं तब तक आंदोलन जारी रहेगा.10 अगस्त तक यह भूख हड़ताल आठ दिन तक पहुंच चुकी थी. रिपोर्टों के अनुसार छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे और उनमें से कुछ की तबीयत भी बिगड़ने लगी थी.

6 अगस्त को कई परीक्षाएं स्थगित कीं

छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच JPSC ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत आने वाली कई परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया. इससे साफ हो गया कि विवाद का असर आयोग के परीक्षा कैलेंडर पर भी पड़ रहा है.छात्र लगातार कह रहे थे कि सिर्फ किसी एक परीक्षा की बात नहीं है, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की जरूरत है.

8 अगस्त को मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

8 अगस्त को कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई. याचिका में परीक्षा को रद्द करने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई.इस बीच रांची में प्रदर्शन भी जारी रहा और छात्र संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाए रखा.

9 अगस्त को परीक्षा रद्द करने पर सहमति

9 अगस्त 2026 आंदोलन का सबसे बड़ा दिन रहा. सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद राज्य सरकार ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने पर सहमति जताई.इसके साथ 2023 और 2025 की JPSC बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही गई. सरकार ने यह भी कहा कि परीक्षा में कथित आपराधिक गड़बड़ियों की CID जांच जारी रहेगी और वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच की जाएगी.सरकार ने परीक्षा से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और जांच शुरू होने के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की बात भी कही है.

परीक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए IIT के विशेषज्ञ आएंगे

सरकार ने भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रस्ताव भी रखा है. इसमें IIT-ISM धनबाद, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर के विशेषज्ञों को शामिल किया जाना है.यह समिति परीक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुझाव देगी. सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक मानक प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने और छात्रों से सुझाव लेने की बात भी कही है.

JPSC के तीनों सदस्यों ने भी दिया इस्तीफा

9 अगस्त को JPSC के तीनों मौजूदा सदस्यों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इनमें डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हंसदा और डॉ. जमाल अहमद शामिल हैं.राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया.इन सदस्यों को CID ने पूछताछ के लिए समन किया था. उपलब्ध जानकारी के अनुसार अजीता भट्टाचार्य को 10 अगस्त, जमाल अहमद को 12 अगस्त और अनिमा हंसदा को 14 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया गया है.इससे पहले JPSC के अध्यक्ष एल. खियांग्ते 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे चुके थे.

फिर भी छात्रों का आंदोलन क्यों नहीं रुका?

यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है. सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली हैं. 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने के साथ बैकलॉग परीक्षाओं पर भी कार्रवाई, CID जांच, ED जांच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और विशेषज्ञ समिति जैसे कदमों की घोषणा की गई है लेकिन छात्र सरकार के इस 98 प्रतिशत मांगें मानने वाले दावे से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि उनकी सबसे अहम मांग अभी पूरी नहीं हुई है और वह है JSSC-CGL समेत कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच.छात्रों का तर्क है कि सिर्फ राज्य एजेंसियों की जांच से उनका भरोसा बहाल नहीं होगा. वे चाहते हैं कि पूरे कथित परीक्षा सिंडिकेट की स्वतंत्र केंद्रीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

JSSC-CGL को रद्द करने पर सरकार ने क्या कहा?

JSSC-CGL को लेकर सरकार का रुख अलग है.सरकार का कहना है कि यह परीक्षा पहले ही न्यायिक प्रक्रिया से गुजर चुकी है और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और निगरानी से जुड़ी रही है. इसके परिणाम जारी हो चुके हैं और सफल उम्मीदवारों की नियुक्तियां भी हो चुकी हैं. ऐसे में राज्य सरकार के लिए इसे अपने स्तर पर रद्द करना आसान या सीधे संभव नहीं है.सरकार ने JSSC-CGL से जुड़े विवाद की जांच के लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली समिति का विकल्प भी रखा है, लेकिन छात्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया है. उनकी मांग अभी भी CBI जांच पर टिकी हुई है.

विधानसभा मार्च, आंदोलन अभी जारी

आज छात्रों ने झारखंड विधानसभा के घेराव के लिए मार्च निकाला है. छह दौर की बातचीत के बावजूद सरकार और छात्रों के बीच CBI जांच के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है. छात्र नेताओं ने कहा है कि उनका विधानसभा मार्च शांतिपूर्ण रहेगा और उनका मुख्य मुद्दा CBI जांच है. पुलिस ने भी कहा है कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को परेशान नहीं किया जाएगा. मिली जानकारी के अनुसार स्‍टूडेंंट विधानसभा के सामने पहुंच गए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.



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