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JPSC Student protest: JSSC CGL क्या है, जिसे लेकर झारखंड में मचा...


Jharkhand student protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब JSSC-CGL तक पहुंच गया है. 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द होने के बाद भी छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. अभ्यर्थी JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. ऐसे में जिस परीक्षा को लेकर झारखंड में इतना बवाल मचा है, आखिर वह JSSC-CGL है क्या? इससे कौन-कौन सी सरकारी नौकरियां मिलती हैं और चयन होने के बाद कितनी सैलरी मिलती है? आइए समझते हैं…

JSSC-CGL क्या है?

JSSC-CGL यानी झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की ओर से आयोजित की जाने वाली प्रमुख भर्ती परीक्षा है. इसके जरिए झारखंड सरकार के अलग-अलग विभागों और कार्यालयों में ग्रुप ‘बी’ और ग्रुप ‘सी’ के कई पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं.इस परीक्षा की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना जरूरी होता है यानी अलग-अलग विषयों में ग्रेजुएशन करने वाले युवा इस तरह की भर्ती में शामिल हो सकते हैं बशर्ते वे भर्ती के लिए निर्धारित अन्य पात्रता शर्तें पूरी करते हों.

जिस JSSC-CGL को लेकर आंदोलन, उसमें क्या है विवाद?

झारखंड में JSSC-CGL को लेकर पहले भी पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं. इसी वजह से इस परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के एक वर्ग में लंबे समय से नाराजगी है.मामला अदालत तक भी पहुंचा.झारखंड हाईकोर्ट ने दिसंबर 2024 में JSSC-CGL के अंतिम परिणाम पर रोक लगाई थी.बाद में दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने SIT जांच जारी रखते हुए परिणाम जारी करने की अनुमति दे दी थी.अब मौजूदा छात्र आंदोलन में अभ्यर्थियों की मांग है कि JSSC-CGL से जुड़े पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और इसे CBI को सौंपा जाए.छात्र परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और परीक्षा कराने वाली एजेंसी की भूमिका की भी जांच चाहते हैं.वहीं सरकार का कहना है कि JSSC-CGL से जुड़ा मामला अदालतों की प्रक्रिया और निर्देशों से जुड़ा हुआ है.सरकार का तर्क है कि परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा निगरानी में हुई थी इसलिए राज्य सरकार के पास इसे अपनी तरफ से सीधे रद्द करने या मामले को CBI को सौंपने का अधिकार नहीं है. सरकार ने इसके समाधान के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी समिति का प्रस्ताव भी रखा है लेकिन छात्र फिलहाल इससे संतुष्ट नहीं हैं और CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं.

JSSC-CGL से कौन-कौन सी सरकारी नौकरियां मिलती हैं?

JSSC-CGL सिर्फ एक पद की भर्ती परीक्षा नहीं है. इसके जरिए झारखंड सरकार के अलग-अलग विभागों में कई तरह के पदों पर नियुक्ति का रास्ता खुलता है.

सहायक शाखा अधिकारी यानी ASO:असिस्‍टेंट ब्रांच ऑफ‍िसर (Assist ant Branch Officer यानी ASO झारखंड सचिवालय से जुड़ा महत्वपूर्ण पद है.इस पद पर नियुक्त कर्मचारी को सरकारी कार्यालय के प्रशासनिक और शाखा से जुड़े काम संभालने होते हैं.फाइलों पर काम करने, सरकारी पत्राचार और विभागीय कार्यों में सहयोग जैसी जिम्मेदारियां इस नौकरी का हिस्सा हो सकती हैं.

जूनियर ऑडिटर: Junior Auditor यानी कनीय अंकेक्षक का काम मुख्य रूप से खातों और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा होता है.इस पद पर सरकारी विभागों के वित्तीय दस्तावेजों और लेखा संबंधी काम की जांच की जिम्मेदारी होती है.

श्रम प्रवर्तन अधिकारी: लेबर इंफोर्समेंट ऑफ‍िसर (Labour Enforcement Officer)यानी श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्रम विभाग से जुड़ा पद है.इसमें श्रम कानूनों और नियमों के पालन से संबंधित निरीक्षण और विभागीय कार्रवाई जैसे काम शामिल होते हैं.

ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर: ब्‍लॉक वेलफेयर ऑफ‍िसर (Block Welfare Officer)यानी प्रखंड कल्याण अधिकारी का काम कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े विभागीय कार्यों से संबंधित होता है.यह पद ब्लॉक स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और संबंधित कार्यों से जुड़ा होता है.

ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर: ब्‍लॉक सप्‍लाई ऑफ‍िसर (Block Supply Officer)यानी BSO आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था से जुड़े काम देखता है. यह पद ब्लॉक स्तर पर सप्लाई से संबंधित सरकारी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

योजना सहायक:Planning Assist ant यानी योजना सहायक सरकारी योजनाओं और विभागीय योजना से जुड़े कामों में सहयोग करता है. इस पद पर योजनाओं से संबंधित रिकॉर्ड, आंकड़ों और विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़े काम किए जाते हैं.

इसके अलावा JSSC-CGL के माध्यम से भर्ती के अलग-अलग विज्ञापनों में पदों के अनुसार अन्य नियुक्तियां भी हो सकती हैं इसलिए हर भर्ती के लिए जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में पदों की सूची और संबंधित योग्यता देखना जरूरी होता है.

JSSC-CGL में कितनी सैलरी मिलती है?

JSSC-CGL के जरिए मिलने वाली सैलरी पद के अनुसार अलग-अलग होती है. दिए गए वेतनमान के मुताबिक अलग-अलग पदों का वेतन लगभग ₹19,900 से ₹1,42,400 तक के पे लेवल/वेतनमान में हो सकता है.सहायक शाखा अधिकारी (ASO) का वेतनमान करीब ₹44,900 से ₹1,42,400 बताया गया है.जूनियर सचिवालय सहायक (JSA)का वेतनमान करीब ₹19,900 से ₹63,200 तक है.ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO)का वेतनमान करीब ₹35,400 से ₹1,12,400 तक बताया गया है.प्लानिंग असिस्टेंट का वेतनमान करीब ₹29,200 से ₹92,300 तक हो सकता है.यह ध्यान रखना जरूरी है कि पे-स्केल और वास्तविक इन-हैंड सैलरी एक ही चीज नहीं होती.कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक मासिक राशि में मूल वेतन के साथ लागू भत्ते और कटौतियां भी शामिल होती हैं इसलिए किसी पद की सटीक इन-हैंड सैलरी संबंधित भर्ती के मौजूदा नियमों और पोस्टिंग के आधार पर अलग हो सकती है.

सैलरी के साथ कौन-कौन से भत्ते मिलते हैं?

JSSC-CGL के जरिए सरकारी नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को मूल वेतन के अलावा नियमों के अनुसार अलग-अलग भत्तों का लाभ भी मिल सकता है.इनमें महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA), चिकित्सा संबंधी सुविधा, ईंधन या वाहन से जुड़े भत्ते और अन्य विभागीय भत्ते शामिल हो सकते हैं.दिए गए विवरण में विदेश यात्रा, प्रतिनियुक्ति, जलपान, निर्वाह, भविष्य निधि, दैनिक भत्ता, ब्रीफकेस भत्ता, कैश हैंडलिंग भत्ता और बाल शिक्षा भत्ता जैसे लाभों का भी उल्लेख है हालांकि हर कर्मचारी को हर भत्ता एक जैसा नहीं मिलता.यह पद, विभाग, पोस्टिंग और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करता है.

प्रोबेशन पीरियड कितना होता है?

JSSC-CGL के जरिए चयनित उम्मीदवारों को नौकरी की शुरुआत में प्रोबेशन पीरियड से गुजरना पड़ सकता है. दिए गए विवरण के अनुसार यह अवधि आम तौर पर एक से दो साल तक बताई गई है.इस दौरान कर्मचारी के काम, व्यवहार और प्रदर्शन को देखा जाता है. प्रोबेशन की शर्तें संबंधित पद और सेवा नियमों के अनुसार लागू होती हैं इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर पद पर प्रोबेशन की अवधि बिल्कुल समान होगी.उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र और संबंधित सेवा नियमों में इसकी पूरी जानकारी देखनी चाहिए.

नौकरी मिलने के बाद प्रमोशन कैसे होता है?

JSSC-CGL के जरिए सरकारी नौकरी पाने के बाद करियर यहीं खत्म नहीं होता. अलग-अलग विभागों में सेवा नियमों के अनुसार कर्मचारियों को आगे पदोन्नति के अवसर मिलते हैं.प्रमोशन में वरिष्ठता, कर्मचारी का प्रदर्शन, विभागीय परीक्षा, सेवा अवधि और लागू विभागीय नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.कई मामलों में कर्मचारी को विभागीय परीक्षाएं पास करनी पड़ती हैं. वहीं लंबे समय तक संतोषजनक सेवा पूरी करने पर भी पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं. प्रशिक्षण, कौशल विकास और नियमित प्रदर्शन मूल्यांकन भी करियर में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं.

JSSC-CGL युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच JSSC-CGL की काफी अहमियत है. इसकी वजह यह है कि एक ही प्रतियोगी परीक्षा के जरिए राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में कई तरह के पदों पर जाने का मौका मिलता है.ग्रेजुएशन पूरी कर चुके उम्मीदवारों के लिए यह परीक्षा प्रशासन, लेखा, श्रम, आपूर्ति, कल्याण और योजना जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में सरकारी करियर का रास्ता खोलती है लेकिन मौजूदा आंदोलन ने इस परीक्षा के साथ एक दूसरा बड़ा सवाल भी जोड़ दिया है-भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का भरोसा कैसे कायम रखा जाए.यही वजह है कि 14वीं JPSC परीक्षा का विवाद खत्म होने के बाद भी छात्रों का आंदोलन JSSC-CGL को लेकर जारी है. छात्र चाहते हैं कि परीक्षा से जुड़े आरोपों और कथित अनियमितताओं की ऐसी जांच हो, जिससे पूरी प्रक्रिया पर उनका भरोसा वापस आ सके.

JPSC से शुरू हुआ विवाद अब JSSC-CGL तक क्यों पहुंचा?

दरअसल, झारखंड में अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों ने छात्रों की नाराजगी को बढ़ाया है. 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के मामले में सरकार ने 9 अगस्त को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. इसके साथ ही 2023 और 2025 की JPSC बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गई.सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और अन्य कदमों की घोषणा भी की है लेकिन छात्र अब JSSC-CGL को लेकर अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं.उनका कहना है कि सिर्फ JPSC परीक्षा रद्द करने से उनकी सभी चिंताएं खत्म नहीं होतीं. वे JSSC-CGL से जुड़े मामले की भी स्वतंत्र जांच चाहते हैं और इसी मांग को लेकर आंदोलन आगे बढ़ा रहे हैं.

अभी सबसे बड़ा सवाल क्या है?

फिलहाल झारखंड के छात्रों और सरकार के बीच सबसे बड़ा गतिरोध JSSC-CGL की कथित गड़बड़ियों की जांच और परीक्षा को लेकर कार्रवाई पर है.सरकार का कहना है कि अदालतों की निगरानी में हुई JSSC-CGL प्रक्रिया को राज्य सरकार सीधे रद्द नहीं कर सकती जबकि छात्र इस तर्क से सहमत नहीं हैं.वे पूरे कथित परीक्षा सिंडिकेट की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं.इसलिए 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द होने के बावजूद झारखंड में छात्रों का आंदोलन जारी है और अब इसके केंद्र में JSSC-CGL परीक्षा का विवाद है.आने वाले दिनों में सरकार, छात्र संगठनों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच होने वाली कार्रवाई से यह तय होगा कि इस विवाद का अगला रास्ता क्या निकलता है.



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