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Gumla 52 kothi 53 darwaza Dharohar: झारखंड का गुमला जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. जिसमें पालकोट प्रखंड नागवंशी राजाओं का प्रमुख गढ़ रहा है. यहां का ’52 कोठरी 53 दरवाजा’ महल अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए मशहूर है. लेकिन वर्तमान में यह ऐतिहासिक धरोहर देखरेख के अभाव में खंडहर बन रही है. जानिए इस महल और पालकोट के अन्य रहस्यमयी स्थलों का गौरवशाली इतिहास.
गुमला: गुमला जिला चारों ओर जंगल पेड़ पौधे पहाड़ ऐतिहासिक स्थल, धार्मिक स्थल व पर्यटन स्थलों से भरा पड़ा है. इसी में से जिले का पालकोट प्रखंड है. जो नागवंशी राजाओं का गढ़ हुआ करता था. यहां देखने व घूमने लायक एक से बढ़कर एक धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल से भरा पड़ा है. यहां नागवंशी काल के समय का प्राचीन मां दशभुजी मंदिर, सुग्रीव गुफा, शीतलपुर, मलमल पुर, निर्झर, पंपापुर, गोब्बरसिल्ली, वॉच टावर आदि एक से बढ़कर ऐतिहासिक व रहस्यमई चीजें मौजूद हैं. उसी में से एक है 52 कोठी 53 दरवाजा. जानिए इसका इतिहास.
पानी कहां से आता है यह आजतक रहस्यमयी
यहां मौजूद सभी चीजों का अपना धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है. यहां ऊंचे पहाड़ों से होकर पानी गिरता है लेकिन पानी कहां से आता है यह आजतक रहस्य बना हुआ है. चाहे कितनी भी गर्मी क्यों न पड़े यहां का पानी कभी नहीं सूखता है व पानी भी बहुत मीठा व टेस्टी होता है. गोबर सिल्ली पत्थर के ऊपर बड़ा पत्थर ऐसा लगता है मानो किसी ने सजा के रखा है. मान्यता है कि इसके ऊपर से ठेला या पत्थर फेंककर मन्नत मांगने से वह जरूर पूर्ण होती है. इसी में से एक है नागवंशी काल का 52 कोठरी 53 दरवाजा का अद्भुत व अनोखा महल. जिसे देखने के लिए सैलानियों का आना जाना लगा रहता है. लेकिन देखरेख व रखरखाव के कारण यह अनोखा महल खंडहर बन गया है. आज अपने अस्तित्व का लड़ाई लड़ रहा है.
यह नागवंशी राजाओं का खास महल
स्थानीय विवेक कुमार मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि गुमला जिले के पालकोट प्रखंड प्राकृतिक संपदाओं से भरा पड़ा है. यहां देखने व घूमने लायक एक से बढ़कर एक धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल है. इसी में से एक है हमारे प्रखंड के लालगढ़ में स्थित 52 कोठरी 53 दरवाजा का ऐतिहासिक महल. यह नागवंशी राजाओं का महल है. यहां नागवंशी राजा अपने शासन काल के समय यहां रहा करते थे.
वहीं महल से कुछ दूरी में मां दशभुजी मंदिर आज भी है. वहीं यह उनके काल का बना हुआ अद्भुत व अनोखा महल था. लेकिन देखरेख के अभाव में यह अब खंडहर में तब्दील होते जा रहा है. वहीं उन्होंने आगे कहा कि नागवंशी राजा यहां अपनी बैठक, सभा आयोजित करते थे. लेकिन यह ऐतिहासिक धरोहर अब खंडहर बन चुकी है ,इसकी संरक्षण की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में हमारी आने वाली पीढ़ी इसकी बनावट व संरचना को देख सकते हैं.
इस तरह से पहुंचे यह ऐतिहासिक महल
उन्होंने आगे बताया किया गुमला शहर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी में स्थित है. यहां जाने के लिए आपको गुमला से पालकोट रोड पकड़ के पहले गोबर सिल्ली पहुंचना होगा. उसके बाद पश्चिम की ओर एक रास्ता जाता है. उस रास्ता में लगभग 2 से 3 किलोमीटर जाने पर आप यह ऐतिहासिक स्थल पहुंच जाएंगे.
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