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PM Modi UAE Visit : पीएम मोदी ने यूएई की छोटी सी यात्रा के दौरान ही बड़ा खेल कर दिया है. उन्होंने देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने के तत्काल बाद ही यूएई के साथ पेट्रोलियम उत्पादों के रणनीतिक भंडार बढ़ाने पर समझौता किया है. इसके अलावा एलपीजी संकट को दूर करने के लिए भी बड़े समझौते को अंजाम दिया गया है.
भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है.
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूनाइटेड अरब अमीरात यानी यूएई की यात्रा भले ही महज 2 घंटे की रही हो, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने बड़ा खेल कर दिया. आज जब देश में एलपीजी का संकट बढ़ता जा रहा है तो पीएम मोदी ने यूएई के साथ एलपीजी सप्लाई पर बड़ा समझौता किया है. ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते एलपीजी की सप्लाई भयंकर रूप से बाधित हुई है. ऐसे में भारत को अपना स्रोत बढ़ाने की जरूरत थी, जो उसकी जरूरतों को पूरी कर सके. पीएम मोदी का यह दौरा देश को संकट से बाहर निकालने में मददगार साबित होगा.
पीएम मोदी की यूएई की छोटी सी यात्रा भारत के लिए बहुत फायदा लेकर आई है. इस दौरे पर उन्होंने कई समझौते और निवेश पर हस्ताक्षर किए हैं. इसमें सबसे अहम है पेट्रोलियम उत्पादों के रणनीतिक रिजर्व और रसोई गैस की सप्लाई, जिसकी अभी देश को सबसे ज्यादा जरूरत है. पीएम मोदी ने यह समझौता पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी के ठीक बाद किया है. इसका मकसद देश में पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार बढ़ाना और भविष्य में ऐसे किसी संकट की घड़ी से निपटना है.
कितना अहम है यूएई से समझौता
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 60 फीसदी आयात करता है. इसमें सबसे ज्यादा आयात यूएई से ही होता है. अब इस आयात को और बढ़ाने की मंशा है, क्योंकि भारत को होर्मुज बंद होने की वजह से सप्लाई पर असर पड़ा है. यूएई से एलपीजी की सप्लाई बढ़ती है तो संकट की इस घड़ी में भारत को राहत मिलेगी. ईरान के हमलों में कतर और कुवैत सहित आसपास के तमाम देशों के एलपीजी उत्पादन पर भी असर पड़ा है, जिससे भारत को सप्लाई कम हो गई है.
भारत कहां से खरीदता है ज्यादा एलपीजी
- यूएई : भारत अपने कुल आयात का करीब 35 से 40 फीसदी यूएई से मंगाता है.
- सऊदी अरब : कुल एलपीजी आयात का 20 से 25 फीसदी एलपीजी यहां से आता है.
- कतर : भारत के एलपीजी आयात का 8 से 10 फीसदी सप्लाई करता है.
- अमेरिका : कुल एलपीजी आयात का 6 से 8 फीसदी यहां से आता है.
- कुवैत : भारत 4 से 6 फीसदी एलपीजी कुवैत से मंगाता है.
- ओमान : 3 से 4 फीसदी एलपीजी की सप्लाई भारत को करता है.
यूएई से कितना एलपीजी खरीदा
जैसा कि आपको पता है कि भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा एलपीजी यूएई से खरीदता है .साल 2024 के आंकड़े देखें तो भारत ने यूएई से करीब 4.4 अरब किलोग्राम यानी 44 लाख टन एलपीजी खरीदा था. साल 2025 के आंकड़े देखें तो देश में कुल एलपीजी की खपत करीब 3.13 करोड़ टन रही है, जबकि घरेलू उत्पादन 1.28 करोड़ टन रहा. लिहाजा खपत को पूरा करने के लिए विदेश से 2 करोड़ टन एलपीजी का आयात करना पड़ा. यह आंकड़ा दिखाता है कि अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी एलपीजी भारत को आयात करना पड़ता है.
पेट्रोलियम रिजर्व पर भी बड़ा समझौता
भारत और यूएई के बीच पेट्रोलियम रिजर्व बनाने पर भी बड़ा समझौता हुआ है. अभी देश में करीब 5 अरब बैरल कच्चे तेल का रिजर्व है, जबकि रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व भी देश में तीन स्थानों पर बना हुआ है. अभी विशाखापत्तनम, मैंगलुरु और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाया गया गया है. इन तीनों रिजर्व में अभी करीब 53 लाख टन तेल का भंडार है, जो देश की 9 से 10 दिन की जरूरत को पूरी कर सकता है. इसका मतलब है कि देश में अभी 5 अरब बैरल कच्चा तेल तो 3.8 करोड़ बैरल का तैयार तेल का भंडार है. पीएम मोदी ने अपने दौरे पर पेट्रोलियम और एलपीजी के अलावा वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने पर भी समझौता किया है. साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, RBL बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 अरब डॉलर के निवेश का भी ऐलान किया गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें