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गुमला जिला मुख्यालय के नगर भवन में शनिवार को दिव्यांगजनों के मामलों के त्वरित निष्पादन और जन-जागरूकता के लिए एक दिवसीय चलंत न्यायालय (मोबाइल कोर्ट) सह जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। आयोजन महिला, बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार तथा राज्य निःशक्तता आयुक्त कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। शिविर में राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री, उपायुक्त दिलेश्वर महतो, डीडीसी अनिमेष रंजन, विभाग के अवर सचिव विक्रमा राम शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर आने वाले कई मामले जिले में ही निपटाए जा सकते हैं। इसी आधार पर मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया जा रहा है। इससे दिव्यांगजनों को राजधानी तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थानीय स्तर पर समाधान मिलेगा। कीर्तिश्री ने कहा कि दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए कार्यालय में विशेष प्रकोष्ठ बनाया गया है। शिविर में मेडिकल बोर्ड की मौजूदगी से दिव्यांगता प्रमाण पत्र से जुड़ी विसंगतियों का मौके पर समाधान किया जा रहा है। डीसी दिलेश्वर महतो ने कहा कि दिव्यांगजनों को सहानुभूति से अधिक अवसर और सहयोग की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिविर में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण निष्पादन किया जाए। उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने कहा कि न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर प्रमाण पत्र जारी होता है। इससे शिक्षा, रोजगार आरक्षण, परिवहन रियायत जैसी सुविधाएं मिलती हैं। उन्होंने बताया कि गुमला सदर अस्पताल में हर बुधवार मेडिकल बोर्ड के माध्यम से प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था है।
अवर सचिव विक्रमा राम ने कहा कि योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, प्रशासनिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए ऐसे शिविर किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने बताया कि गुमला में 12,374 दिव्यांगजन चिन्हित हैं। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत 11,586 लाभुकों को प्रति माह 1,000 रुपये पेंशन दी जा रही है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 628 पेंशनधारियों को जुलाई 2026 तक, स्वामी विवेकानन्द निःशक्त स्वावलंबन प्रोत्साहन योजना के 10,958 पेंशनधारियों को सितंबर 2026 तक भुगतान किया जा चुका है। शेष चिन्हित दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए।