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Mother’s Day 2026: मदर्स डे पर पढ़ें संघर्ष की अद्भुत कहानी. दिल्ली की यामिनी ने तीन महीने की गर्भावस्था से ही अकेले जीवन की जंग शुरू की. तलाक, नौकरी और कोर्ट केस की अनगिनत चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने बेटे हार्दिक को अकेले पाला. आज यामिनी का एक ही सपना है. अपने बेटे को IPS अधिकारी बनाना, ताकि वह समाज की बुराइयों को खत्म कर एक सकारात्मक बदलाव ला सके. एक मां के अटूट साहस और उम्मीद की दास्तां.
नई दिल्ली: दिल्ली की रहने वाली यामिनी के जीवन में सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था. नौकरी भी अच्छी चल रही थी. माता-पिता का साथ था. ससुराल पक्ष में भी शादी होकर के गई तो शुरू में सब कुछ मन मुताबिक था लेकिन अचानक से हालात उनके खिलाफ जाने लगे. देखते ही देखते सब कुछ बिगड़ गया. जब वह 3 महीने की गर्भवती थी तभी उनको पति से अलग होना पड़ा. 3 महीने का बच्चा पेट में लेकर ही उन्होंने संघर्ष शुरू किया और वह संघर्ष आज तक जारी है. यह आगे भी रहेगा क्योंकि यामिनी सिंगल पैरंट हैं. यानी अकेले अपने बच्चों को पाल रही है. मदर्स डे (10 मई) जोकि रविवार को है. उस पर दिल्ली की इस मां की कहानी जानने के लिए जब लोकल 18 ने इनसे खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि यामिनी का तलाक 2024 में हो गया था. लेकिन तलाक होने की प्रक्रिया तभी शुरू हो गई थी, जब उनका बच्चा हार्दिक उनके पेट में था और वह 3 महीने की गर्भवती थी.
बच्चे के लिए मां और पिता दोनों बनी
यामिनी ने बताया कि उनका जन्म सरोजिनी नगर दिल्ली में हुआ था. शादी मॉडल टाउन में हुई थी और अब वह किराए का मकान लेकर पालम में रह रही है. उनके बेटे की उम्र अब 5 साल हो गई है. बेटे का नाम हार्दिक है. उन्होंने बताया कि वह खुद अच्छी नौकरी कर रही है. उन्होंने बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ नहीं रहती बल्कि किराए का मकान लेकर पालम में रहती है, लेकिन जब नौकरी में ओवरटाइम करना होता है तब बेटे को अपने माता-पिता के पास छोड़ देती है. उन्होंने यह भी बताया कि तलाक होने का कारण यह था कि उनके और उनके पति के जो विचार है वह नहीं मिल सके और शायद पति इनके साथ नहीं रहना चाहते थे.
उन्होंने बताया कि तलाक के बाद एक आदमी की जिंदगी नहीं रुकती लेकिन एक औरत की जिंदगी रुक जाती है. इनकी रुकी हुई जिंदगी को आगे बढ़ाने का काम किया है उनके बेटे ने. उनका बेटा उनके लिए बहुत भाग्यशाली है. जब से जीवन में आया है तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह लगातार नौकरी करते हुए अपने बेटे के हर छोटे-बड़े खर्चे को उठा रही है. उसकी इच्छाओं को पूरा कर रही है.
शिक्षालॉजी ने दिया साथ
यामिनी ने बताया कि जब उनके बेटे का जन्म हुआ तब उनकी मेडिकल कंडीशन बिल्कुल भी नहीं सही थी. उनको बार-बार कोर्ट जाना पड़ रहा था. वकील को भी पैसे देने पड़ रहे थे. ऐसे में उनका बच्चा बोलना नहीं सीख पा रहा था. इसीलिए जब उन्होंने शिक्षालॉजी स्कूल द्वारका में उसका एडमिशन करवाया. तब उनके बच्चे ने मां बोलना सीखा और तब से लेकर लगातार उनका बच्चा काफी एक्टिव हो गया है. खेलने और कूदने लगा है अब साफ बोल लेता है. उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने बेटे को एक आईपीएस ऑफिसर बनाना चाहती हैं. उसकी परवरिश इस तरह से कर रही हैं ताकि वह बड़ा होकर एक अच्छा मर्द बन सके. ताकि जो दिक्कत है उन्होंने एक महिला होने के नाते एक मर्द की वजह से झेली हैं वो कोई और लड़की या महिला ना झेले.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें