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Jamui Divyang Girl Sushma Kumari Story: सुषमा जब सड़क पर चलती है तो सड़क पर गिट्टियां चुभती हैं तो और ज्यादा दिक्कत होती है. बारिश में रास्ते में कीचड़ हो जाता है, तब स्कूल जाना बंद हो जाता है. सुषमा के विद्यालय के प्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि सुषमा प्रतिदिन स्कूल आती है. उसे परेशानी होती है, लेकिन वह उसे दरकिनार कर प्रतिदिन स्कूल आती है.

जमुई: एक दस साल की लड़की जो चल नहीं सकती, बचपन से ही पैर उल्टे हैं खड़ी होती है तो कांपती है, सड़क पर चलती है तो पैर में कंकड़ चुभ जाते हैं और चलना मुश्किल हो जाता है. इतना ही नहीं उसकी बड़ी बहन भी पैरों से दिव्यांग है तो उसकी मां सुन नहीं सकती है. लेकिन इन सब के बावजूद इस छोटी सी लड़की के हौसले बड़े हैं और वह बड़े होकर पुलिस की वर्दी पहनना चाहती है. यह कहानी है जमुई जिले के एक छोटे से गांव खुटौना की रहने वाली सुषमा कुमारी की, जो उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुटौना की कक्षा चार की छात्रा है. सुषमा बचपन से ही दिव्यांग है और उसे चलने में काफी परेशानी आती है. लेकिन इन परेशानियों के बावजूद भी वह हार नहीं मानी और प्रतिदिन तमाम तरह की परेशानियां झेलकर भी वह स्कूल जाती है.

मुड़ा हुआ पैरों का एक बड़ा हिस्सा
बताते चलें कि सुषमा अपने दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, उसके टखने से नीचे का हिस्सा पूरी तरह से मुड़ा हुआ है. इस कारण वह चप्पल तक नहीं पहन सकती. सुषमा के घर से स्कूल की दूरी डेढ़ किलोमीटर की आसपास है. और सड़क पर वह इन पैरों के सहारे चलकर स्कूल नहीं पहुंच पाती, इसलिए वह खेतों के रास्ते स्कूल जाती है. जहां एक तो चलने के लिए उसे मिट्टी वाली सतह मिल जाती है और स्कूल की दूरी भी कम हो जाती है. लेकिन बारिश का मौसम उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती लेकर आता है. कच्ची सड़कें और पगडंडियां कीचड़ से भर जाती हैं. ऐसे में सामान्य व्यक्ति के लिए भी चलना कठिन होता है, लेकिन सुषमा के लिए यह लगभग असंभव जैसा हो जाता है. कई बार वह चाहकर भी विद्यालय नहीं पहुंच पाती. सुषमा की दादी सिया देवी ने बताया कि वह कीचड़ भरे रास्ते पर कई बार गिर गई, जिस कारण वह बारिश के दिनों में स्कूल ही नहीं जा पाती.

पढ़-लिखकर पहनना चाहती है पुलिस की वर्दी
सुषमा ने बताया कि मैं पढ़-लिखकर पुलिस बनना चाहती हूं. उसने कहा कि ऐसा पैर होने के कारण मुझे चलने-फिरने में बहुत समस्या होती है. सड़क पर गिट्टियां चुभती हैं तो और ज्यादा दिक्कत होती है. बारिश में रास्ते में कीचड़ हो जाता है, तब स्कूल जाना बंद हो जाता है. सुषमा के विद्यालय के प्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि सुषमा प्रतिदिन स्कूल आती है. उसे परेशानी होती है, लेकिन वह उसे दरकिनार कर प्रतिदिन स्कूल आती है. सुषमा की एक बड़ी बहन भी दिव्यांग है, वो भी यहां पढ़ती थी. सुषमा के परिवार ने बताया कि आज तक सुषमा को ऐसी कोई सरकारी सहायता नहीं मिल सकी, जिससे उसका स्कूल आना-जाना आसान हो सके. उसे अब तक एक ट्राई साइकिल तक उपलब्ध नहीं कराई गई है. परिवार के लोग बताते हैं कि यदि उसके पास ट्राई साइकिल होती, तो रोज का सफर काफी आसान हो सकता था और बारिश के दिनों में भी उसकी पढ़ाई कम प्रभावित होती. सुषमा की यह कहानी कई और लोगों को भी प्रेरणा देती है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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