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NTA विवाद: 21 जून का पेपर लीक नहीं होगा क्या गारंटी? संसद...


देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के गंभीर मुद्दों के बीच शिक्षा मंत्रालय की संसद की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में आज भारी हंगामा देखने को मिला. कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के चेयरमैन और हायर एजुकेशन सेक्रेटरी की जमकर क्लास लगाई. बैठक का माहौल उस समय बेहद आक्रामक और गंभीर हो गया जब दिग्विजय सिंह ने सीधे अधिकारियों की आंख में आंख डालकर पूछा कि इसकी क्या गारंटी है कि 21 जून को होने वाला एग्जाम दोबारा लीक नहीं होगा? इस संवेदनशील मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद एक सुर में नजर आए. सभी सांसदों का साफ कहना था कि यह देश के लाखों बच्चों के भविष्य का सीधा मामला है इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार और अधिकारियों की टालमटोल नीति पर तीखे सवाल उठाते हुए कमेटी ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है.

शिक्षा मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक की 5 मुख्य बातें
• 21 जून की परीक्षा पर तीखा सवाल: कमेटी अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने NTA चेयरमैन और हायर एजुकेशन सेक्रेटरी से सीधे पूछा कि आगामी 21 जून को होने वाली परीक्षा के लीक न होने की उनके पास क्या गारंटी है.
• अधिकारियों की सफाई: अधिकारियों ने दलील दी कि पुरानी खामियों को सुधारने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं. जिस दोबारा परीक्षा (Re-exam) को कराने में 5 महीने का वक्त लगता है, उसे वे महज 37 दिनों में आयोजित कर रहे हैं.
• दलगत राजनीति से ऊपर उठा मुद्दा: इस गंभीर विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद पूरी तरह एकजुट दिखे. सभी ने एक सुर में कहा कि यह छात्रों के भविष्य का सवाल है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.
• CBT और हैकिंग पर चिंता: दिग्विजय सिंह ने अगले साल होने वाले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में जब हैकिंग आम हो चुकी है, तो सीबीटी के जरिए पेपर लीक नहीं होगा, यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?
• कमेटी गठन का आश्वासन: हैकिंग और सीबीटी सुरक्षा के सवाल पर अधिकारियों ने बताया कि एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो 3 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद ही इस पर विस्तार से चर्चा संभव होगी.

छात्रों के भविष्य पर गारंटी बनाम टालमटोल की राजनीति

संसद की स्टैंडिंग कमेटी की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है. जब अधिकारी 5 महीने का काम 37 दिनों में करने की पीठ थपथपा रहे थे, तब दिग्विजय सिंह का यह कहना कि “पहले भी लीक होने पर आपने यही कहा था” सीधे तौर पर सिस्टम की साख पर प्रहार है.

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ी बात यह है कि अब यह लड़ाई सिर्फ विपक्ष बनाम सरकार की नहीं रह गई है बल्कि स्टैंडिंग कमेटी में सत्ता पक्ष के सांसदों का सुर मिलाना यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा कितना ज्यादा है. अधिकारियों द्वारा विशेष कमेटी और 3 महीने में रिपोर्ट की बात कहना प्रशासनिक ढर्रे की याद दिलाता है. दिग्विजय सिंह की यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है कि सरकार अधिकारियों को आगे करके सिर्फ टालमटोल कर रही है और अगर दोबारा कुछ गलत हुआ तो इसका अंजाम सीधे तौर पर इन अधिकारियों को ही भुगतना पड़ेगा. यह बयान साफ करता है कि अब नौकरशाही अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती.

 सवाल-जवाब

स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में दिग्विजय सिंह ने NTA चेयरमैन से 21 जून की परीक्षा को लेकर क्या तीखा सवाल पूछा?

कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने NTA चेयरमैन और हायर एजुकेशन सेक्रेटरी की क्लास लगाते हुए सीधा सवाल किया कि इस बात की क्या गारंटी है कि आगामी 21 जून को होने वाला एग्जाम दोबारा लीक नहीं होगा? उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी पेपर लीक होने पर अधिकारियों ने सुरक्षा के ऐसे ही दावे किए थे.

दिग्विजय सिंह के कड़े सवालों पर NTA और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने क्या दलील दी?

अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि पुरानी परीक्षा में जो भी खामियां सामने आई थीं, उन्हें सुधारने के लिए सभी कड़े कदम उठाए गए हैं. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि दोबारा एग्जाम आयोजित करने में आमतौर पर 5 महीने का लंबा वक्त लगता है, लेकिन वे इसे रिकॉर्ड 37 दिनों के भीतर ही संपन्न करा रहे हैं.

कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) को लेकर बैठक में क्या चिंताएं जताई गईं और अधिकारियों का इस पर क्या जवाब था?

दिग्विजय सिंह ने तकनीकी सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज के दौर में जब हैकिंग बेहद आम हो चुकी है, तो अगले साल से होने वाले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) के सुरक्षित होने और पेपर लीक न होने का फैसला कैसे तय होगा? इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि इसके लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है, जो 3 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी.



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