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PhD Admission 2026: पीएचडी करने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लोक भवन की मंजूरी मिलने के बाद जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) में करीब तीन साल बाद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया फिर शुरू होने जा रही है. विश्वविद्यालय में नया पीएचडी ऑर्डिनेंस लागू कर दिया गया है, जिसके तहत UGC-NET के माध्यम से प्रवेश का प्रावधान किया गया है. साथ ही पार्ट-टाइम पीएचडी के नए नियम भी लागू होंगे, जिससे नौकरीपेशा और अन्य शोधार्थियों को भी शोध का अवसर मिलेगा. नए नियमों का उद्देश्य शोध कार्य को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और यूजीसी मानकों के अनुरूप बनाना है.
पीएचडी करने का इंतजार खत्म,लोक भवन की मंजूरी के बाद तीन साल बाद खुलेगा प्रवेश का रास्ता
जोधपुर: जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में पीएचडी करने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. करीब तीन साल से रुकी पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया अब नए नियमों के साथ शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. विश्वविद्यालय के नए पीएचडी ऑर्डिनेंस को लोक भवन से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया गया है. इसका सीधा लाभ उन अभ्यर्थियों को मिलेगा, जो यूजीसी-नेट के जरिए शोध में प्रवेश लेना चाहते हैं. अब जेएनवीयू में पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया यूजीसी के वर्ष 2022 के नियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी.
नए प्रावधानों के अनुसार पीएचडी में प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट को प्रमुख आधार बनाया गया है.अभ्यर्थियों को तीन श्रेणियों में रखा गया है, जिनमें नेट-जेआरएफ, नेट तथा पीएचडी प्रवेश के लिए पात्र नेट अभ्यर्थी शामिल हैं. चयन प्रक्रिया में यूजीसी-नेट स्कोर को 70 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा, जबकि इंटरव्यू और प्रेजेंटेशन के आधार पर 30 प्रतिशत अंक निर्धारित होंगे। इंटरव्यू और प्रेजेंटेशन दोनों के लिए 15-15 प्रतिशत अंक तय किए गए हैं. ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए केवल नेट परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इंटरव्यू और शोध विषय की प्रस्तुति भी चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
नौकरीपेशा अभ्यर्थियों के लिए पार्ट टाइम पीएचडी का विकल्प
नए ऑर्डिनेंस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में पार्ट टाइम पीएचडी के लिए किए गए स्पष्ट प्रावधान भी शामिल हैं.इससे नौकरी या अन्य पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ शोध करने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा.इसके अलावा सीजीपीए, क्रेडिट पॉइंट, कोर्स वर्क और शोध से जुड़े कई नियमों में यूजीसी के अनुरूप बदलाव किए गए हैं। बाह्य परीक्षक और विदेशी संस्थानों से संबंधित प्रावधानों को भी नए नियमों के अनुसार संशोधित किया गया है.
ऑर्डिनेंस 199 से 224 तक संशोधन, शोध की गुणवत्ता पर जोर
विश्वविद्यालय ने पीएचडी से जुड़े ऑर्डिनेंस 199 से 224 तक संशोधित किए हैं। विभागीय शोध प्रक्रिया को मूल रूप से बरकरार रखते हुए प्रवेश प्रक्रिया और शोध की गुणवत्ता से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों के लागू होने से अब पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी। अभ्यर्थियों को सलाह है कि प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना में पात्रता, विषयवार सीटों, आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी जरूर जांच लें।
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Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें