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PM मोदी फोन कर पार्टी में आने को कहें तो क्या करेंगे?...


नई दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने मौजूदा राजनीतिक हालात, खासकर विपक्ष में मची भगदड़ पर अपनी राय दी. उन्होंने न्यूज18 इंडिया से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि विपक्ष में भागम-भाग के पीछे लालच, डर या मजबूरी हो सकती है, जैसे डूबते जहाज से लोग भागते हैं. टीएमसी में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच विवाद पर सिन्हा ने स्पष्ट किया कि उनका नेता सिर्फ ममता बनर्जी हैं, और उन्होंने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया है, इसलिए वे भी उनका साथ देंगे. अभिषेक बनर्जी पर लगे आरोपों पर उन्होंने कहा कि वे उन्हें अपना नेता नहीं मानते.

भाजपा में अपने 30 साल के अनुभव को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि अगर किसी पार्टी से फोन आता है, तो वे पहले सुनेंगे, फिर सोचेंगे, लेकिन फिलहाल ममता बनर्जी की पार्टी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने विपक्ष की एकता और मजबूती पर जोर दिया, खासकर 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए. प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल की तारीफ की और उनकी ऊर्जा व सक्रियता की सराहना की. अमित शाह को उन्होंने योग्य और तर्कशील बताया. साथ ही, राहुल गांधी के संदर्भ में उन्होंने राजनीति में शब्दों की मर्यादा को जरूरी बताया.

पेश है बातचीत के मुख्य अंश:

सवाल: राजनीतिक पार्टियों में भागमभाग क्यों मची है?
जवाब: किसी भी निवारण से पहले आपको कारण पे जाना बहुत ज़रूरी है. ये कारण क्या है? क्यों भागम भागम भाग मची है ये मचाया गया है. ये सीन क्रिएट किया गया है. इसके पीछे कहीं बहुत ज्यादा लालच, प्रलोभन या भय या फिर कई बार ऐसा होता है. डूबते हुए जहाज को जब लगता है कि वो जहाज डूब रहा है, कई लोग भागने की दिशा में आ जाते हैं.

सवाल: टीएमसी के बागी गुट ने ममता बेनर्जी को चेयरमैन पद से हटा दिया. अभिषेक बेनर्जी को भी सस्पेंड कर दिया है. इस पूरी घटना पर आप क्या कहते हैं? अब ममता बेनर्जी अपनी पार्टी से बाहर हो गई हैं. क्या भतीजे के मोह ने उन्हें मार दिया पॉलिटिकली?
जवाब: अभी इसका फैसला नहीं हुआ है.

सवाल: वो कह रहे है कि ममता जी अभिषेक बेनर्जी का मोह नहीं छोड़ पा रही, इसलिए हमें उन्हें पार्टी से बाहर करना पड़ा.
जवाब: उनको तो मुझसे दूर जाना था तो बहाने बना लिए.

सवाल: आपने कोई बहाना नहीं बनाया. इस मुश्किल घड़ी में दो बिहारी सब पर भारी पड़ गए.
जवाब: देखो हमारा, खासकर अगर मेरा आप जानना चाहोगे, फिर से तो अमिश मैं आपसे कह सकता हूं कि मेरा तो मामला इमोशनल ज्यादा है. पॉलिटिकली कोई बात नहीं की मैंने. मैंने कहा कि इमोशनल रीजन है, जिन्होंने सुख-दुख की दुःख की घड़ी है, मुसीबत की घड़ी है… मेरा साथ दिया ममता जी ने, तो आज मेरा फर्ज और कर्तव्य बनता है. मैं ममता जी का साथ दूं, उनकी इस मुसीबत की घड़ी में.

सवाल: बीजेपी में 30 साल रहे… सुख-दुःख कि तो वो भी आपकी साथी रही है.
जवाब: बिल्कुल-बिल्कुल साथ दिया. 30 साल आपने खुद ही कह के सवाल में जवाब जोड़ दिया, आपने जी कितना बढ़िया आ रहा 30 साल रहा अच्छा रहा… मैं तो हमेशा कहता हूं, मेरा लालन-पालन तो भारतीय जनता पार्टी में ही हुआ. मेरा तो आज भी जो रेगार्ड्स है अटल जीके बारे में, आडवाणी जीके लिए… तो ये लोग तो बहुत अच्छे हैं, उनकी याद जाएगी नहीं, उनका रेगार्ड्स जाएगा नहीं.

सवाल: क्या आपको लगता है कि खाली बहाना नहीं हो सकता? अभिषेक बेनर्जी पर सिलसिलेवार तरीके से आरोप लगे हैं. क्या आपको लगता है कि कहीं ना कहीं तो कोई चूक हुई होगी? ऐसे ही तो कोई बेवफ़ा नहीं होता.
जवाब: हां ठीक… कहा कुछ तो मजबूरियां नहीं होंगी. यूं ही कोई बेवफ़ा नहीं होता, ये ठीक है लेकिन किस समय… टाइमिंग देखिए… आप जब उनकी नजरों में जहाज़ डूब रहा था तब छोड़ने की घड़ी में जम करने की जम्पिंग कर रहा है. और उसके बाद जंपिंग जैक बनकर बहाना नहीं मिल रहा. ममता जी के बारे में कह नहीं सकते. ममता जी का सबको पता है तो एक वहां डैशिंग, डायनामिक, डैशिंग, डायनामिक छोरा है.. वहां पे जो बढ़िया कर रहा है और वो है अभिषेक बेनर्जी तो उसी पे लगा है. बिकॉज़ सेक्रेटरी जनरल है वो. अभिषेक जो करते होंगे देखिए हमने देखा है मेरा तो नेता नहीं है अभिषेक. ना मैं उनको जानता हूं इतनी अच्छी तरह से, ना ही मैं उनको अपना नेता मानता हूं. मेरे नेता सिर्फ और सिर्फ ममता बनर्जी हैं. अभिषेक बनर्जी को अपना नेता नहीं मानता. मैं ममता जी के आग्रह पे गया था.

सवाल: अभिषेक बनर्जी की रेपुटेशन कैसी है? अभिषेक बनर्जी के बारे में बहुत सारे आरोप लगते है बहुत सारी. बातें कही जा रही है और कुछ तथ्य भी सामने आ रहे हैं. आपका उनके साथ कैसा तालमेल था?
जवाब: बहुत अच्छी. तो हम जो बैठते थे वो अच्छे से बैठते थे, बातचीत होती थी, रिस्पेक्टफुली बात करते थे.

सवाल: आपने पॉलिटिक्स में हमेशा एक बड़ा शिष्टाचार रखा और आपने शब्दों की मर्यादा को हमेशा बरकरार रखा. राहुल गांधी ब्रांड ऑफ पॉलिटिक्स स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स को जिस तरह की वो तू तड़ाक की भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रधानमंत्री के लिए रोएगा मोदी, ये होगा मोदी के साथ… क्या आपको लगता है वो सही है?
जवाब: शब्दों का चयन और भाषा के मर्यादा का सबको ध्यान रखना चाहिए. राजनीति में बड़े-बड़े जो काम होते हैं. हमने एक चीज़ सीखी है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है. पहले तो कूल रहो, हमेशा कूल रहो… आपने अच्छे-अच्छे जनरल्स को भी देखा होगा. उनसे सीखा है. कितनी बड़ी-बड़ी बातें भी आती है. आपने उनको कूल देखा है. आपने ईरान के लोगों को देखा है, कितना कूल होकर… कितने बड़े बड़े डिसीजन लिए? उन्होंने अमेरिका के प्रेसिडेंट साहब का जिक्र अगर ना करे ट्रंप साहब का तो बहुत लोगों को देखा, बहुत कूल रहते हैं और कूल रहे.

सवाल: ट्रंप आपको कूल नहीं लगते.
जवाब: उनके अंदर बड़ी जोश भी है. कई बार इरिटेट हो जाते हैं, चिढ़ जाते हैं, ज़ोर से बोल देते हैं.

सवाल: एक सवाल है मेरा… अचानक अगर देश के गृह मंत्री अमित शाह का फ़ोन आए या देश के प्रधानमंत्री का? फ़ोन आए और बोले कि भाई 30 साल पुराना हमारा रिश्ता है, आ जाओ तो क्या करेंगे फिर आप?
जवाब: फोन तो आए पहले… अभी कैसे बता सकता हूं?

सवाल: अगर फ़ोन आया तो हमें जवाब देंगे.
जवाब: फिलहाल मेरा कोई इरादा नहीं है ममता बनर्जी को छोड़ने का या किसी और तरफ जाने का.

सवाल: मैंने तो सवाल पूछा कि अगर फ़ोन आएगा पहले तो… हाइपोथ्रेटिकल सवाल है ना, हाइपोथ्रेट? ऑब्वियस्ली ऑब्वियस्ली फिर भी तो 30 साल पुरानी पार्टी?
जवाब: पहले मैं उनकी बातों… उनका फ़ोन आएगा… भले मैं एक्सेप्ट करूं या ना करूं उनकी उनकी बात को. उनके कॉल को रिस्पेक्ट जरूर दूंगा.

सवाल: 2026 में हम बैठे हैं. 2029 का लोकसभा चुनाव आएगा, क्या आपको लगता है विपक्ष को अपने आप को बहुत मजबूत करना पड़ेगा, आज कमजोर दिशा में है.
जवाब: किसी भी चुनाव को चुनौती समझना हमारा कर्तव्य है. इसलिए किसी भी चुनाव में किसी को हो, चाहे सत्ताधारी हो, चाहे विपक्ष हो, उनको मजबूत होना ही पड़ेगा. वो कहते हैं ना यूनिटी, आपकी एकता बहुत ज़रूरी है. मजबूती बहुत ज़रूरी है.

सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्गेस्ट सर्विंग… कंटिन्यूवस्ली प्राइम मिनिस्टर का एक नया रिकॉर्ड बनाया है. 12 साल उनकी सरकार को हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आप क्या कहना चाहते?
जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जो 12 साल हुए हैं, उनको एक तरह से तो लॉन्गेस्ट टेन्योर है और जैसे भी आपका हम उसको देखें, बट बधाई के पात्र हैं और मैंने उनको बधाई का ट्वीट कर बहुत दिल से बधाई दी उनको.

सवाल: अच्छी बात मोदी में क्या लगती है आपको?
जवाब: एक तो उनका एनरजी लेवल ज़बरदस्त लगता है, मुझे ज़बरदस्त लगता है एनर्जी लेवल और वो बहुत सरहनीय और प्रशंसनीय है और मैं कहूंगा बहुत सारे. वो 24 घंटे 24/7 पॉलिटिकल हैं. उनको चाहे पार्षद का चुनाव हो, चाहे नगर निगम का हो कि आपका एम एलए का हो, एमपी का हो, किसी में हो… सबके लिए सिर्फ चिंतित ही नहीं रहते. बहुत व्यस्त भी रहते हैं उसमें.

सवाल: गृह मंत्री अमित शाह के बारे में आप क्या कहना चाहते हैं?
जवाब: मैं उनको बहुत नजदीक से तो नहीं जानता हूं, लेकिन मानता हूं कि बहुत काबिल है, योग्य हैं और बहुत अच्छा उनके पास तर्क रहता है और किसी चीज़ को अपनी तर्क से बुलडोज करने कि उनको पार्लियामेंट में एक अच्छी आदत है या बुरी आदत है.



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