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PM Modi to Attend G7 Summit : मैक्रों के बुलावे पर फ्रांस...


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मैक्रों के बुलावे पर फ्रांस जाएंगे पीएम मोदी, अरसे बाद ट्रंप से मुलाकात संभव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने 15 से 17 जून तक फ्रांस में होने वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं, जहां पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी संभावित महामुलाकात पर टिकी हैं. मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष और अमेरिकी टैरिफ विवाद के बाद दोनों नेताओं के बीच बढ़ी तल्खी के बाद ये पहला ऐसा बड़ा मंच होगा जहां दोनों साथ दिख सकते हैं. इसके साथ ही पीएम मोदी फ्रांस के नीस और पेरिस का दौरा करने के बाद स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर भी जाएंगे, जो 1993 में राजनयिक संबंध बनने के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा होगा.

मैक्रों के बुलावे पर फ्रांस जाएंगे पीएम मोदी, अरसे बाद ट्रंप से मुलाकात संभवZoom

G7 में शामिल होंगे पीएम मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर जाने वाले हैं. इस दौरान पूरी दुनिया की नजरें फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में होने वाले 52वें G7 समिट पर टिकी होंगी. इस पूरे दौरे में सबसे ज्यादा चर्चा पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर हो रही है. पिछले कुछ समय में टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर दोनों नेताओं के रिश्तों में जो थोड़ी दूरियां आई थीं, उसके बाद ये दोनों बड़े नेता अरसे बाद पहली बार एक-दूसरे के सामने होंगे.

G7 समिट में ट्रंप और मोदी का आमना-सामना

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी आमने-सामने की मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी. उसके बाद से दोनों नेताओं ने फोन पर कई बार बात तो की लेकिन रिश्तों में जमी कड़वाहट कम नहीं हुई. मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हुआ तो ट्रंप ने बिना मांगे बीच में कूदते हुए मध्यस्थता का दावा ठोक दिया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद अमेरिका ने भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक जंग छिड़ गई थी. अब फ्रांस का यह G7 समिट दोनों नेताओं के लिए अपनी तल्खी को भुलाकर एक नई शुरुआत करने का सबसे बड़ा मौका साबित हो सकता है.

मैक्रों का खास न्योता और रूबियो की फेल कूटनीति?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत को इस 52वें G7 शिखर सम्मेलन में एक ‘आउटरीच पार्टनर’ के रूप में खास तौर पर इनवाइट किया है. ये समिट 15 से 17 जून तक चलने वाला है, जहां दुनिया के सबसे ताकतवर देश जुट रहे हैं. वैसे, कुछ समय पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी भारत आए थे ताकि बिगड़े रिश्तों को पैच-अप किया जा सके लेकिन कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि उनका वह दौरा कुछ खास कमाल नहीं कर पाया. उस दौरे में सिर्फ क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर ही थोड़ी-बहुत बात आगे बढ़ पाई थी. ऐसे में अब सीधे मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात ही दोनों देशों के रिश्तों की असली दिशा तय करेगी.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर युद्ध तक का खेल

इस बार का G7 आउटरीच सत्र बेहद गरमा-गरम रहने वाला है, क्योंकि इसमें उन मुद्दों पर चर्चा होगी जो पूरी दुनिया का भविष्य तय कर रहे हैं. इस महामंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नियम-कायदों से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन, देशों के बीच चल रहे व्यापार विवाद और पर्यावरण में आ रहे बदलावों पर बात होगी. इतना ही नहीं, यूक्रेन और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में मचे भीषण युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी भारत अपनी मजबूत आवाज बुलंद करेगा. दुनिया जानती है कि इन वैश्विक संकटों का हल भारत की भागीदारी के बिना मुमकिन नहीं है.

स्लोवाकिया में पहली बार कदम रखेंगे कोई भारतीय पीएम

फ्रांस के नीस और पेरिस का दौरा खत्म करने के बाद पीएम मोदी एक नया इतिहास रचने के लिए स्लोवाकिया रवाना होंगे. साल 1993 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बनने के बाद यह पिछले 33 सालों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा होगी. आपको बता दें कि इसी साल फरवरी में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी भारत आए थे और उन्होंने पीएम मोदी को अपने देश आने का न्योता दिया था. दोनों देशों के बीच व्यापार अब 1.3 अरब यूरो की भारी-भरकम रकम को पार कर चुका है और यह दौरा इस दोस्ती को एक नए लेवल पर ले जाएगा.

भारत का यूरोप में बढ़ता दबदबा

भारत और स्लोवाकिया के बीच सिर्फ बातचीत नहीं हो रही है, बल्कि जमीन पर बड़ा बिजनेस चल रहा है. दोनों देश ऑटोमोबाइल, रक्षा (डिफेंस), इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे बड़े सेक्टर्स में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं. पीएम मोदी का यह दौरा असल में यूरोप के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक ताकत का सबसे बड़ा सबूत है. पिछले कुछ महीनों में मोदी ने नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के बड़े नेताओं के साथ ताबड़तोड़ बैठकें की हैं, जिससे साफ है कि भारत अब यूरोप की राजनीति का एक बेहद अहम खिलाड़ी बन चुका है.

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Utkarsha Srivastava

Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें





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