“पिता और मुझे बहुत उम्मीद थी कि मैं झारखंड में ही अफसर बनूंगा। अपने गांव का नाम रौशन करूंगा। पर एग्जाम में हो रही धांधली की वजह से ऐसा ना हो सका। मैं अब भी बेरोजगार हूं और पिता का कुछ दिनों पहले देहांत हो गया।”
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यह कहना है जयपाल सिंह स्टेडियम में आदोलन में शामिल छात्र तारा कुमार का। वो रांची के बुढ़मू के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने बारे में बताया कि वो 2019 से ही सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हुए हैं। उन्हें तमिलनाडु में गवर्नमेंट जॉब मिली भी थी पर उसे इसलिए छोड़ दिया। क्योंकि वो झारखंड में अफसर बनना चाहते थे।

छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार को दूसरे राउंड की बातचीत हुई, लेकिन यह भी बेनतीजा रही।
बताते चलें कि झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में धांधली को लेकर जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार को दूसरे राउंड की बातचीत हुई, लेकिन यह भी बेनतीजा रही। यह बैठक करीब एक घंटे तक चली।
इधर, आंदोलन में शामिल छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। कई ऐसे छात्र भी हैं, जो बड़ी मुश्किल के साथ रांची में रहकर इन भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। हमने ऐसे ही कुछ छात्रों से बात की और उनकी कहानी समझी।

तारा कुमार ने कहा- पिता को काफी विश्वास था कि मैं झारखंड में अफसर बनूंगा। पर जब एग्जाम देता, वो रद्द हो जाता या कुछ ना कुछ समस्या हो जाती। कुछ दिनों पहले पिता का देहांत हो गया। मैं अब भी बेरोजगार हूं।
पिता को थी उम्मीद बेटा जरूर अफसर बनेगा तारा कुमार ने बताया कि वे चार भाई-बहन हैं और इन चारों में वह सबसे मेधावी छात्र रहे। यही वजह रही कि उनके पिता को उन पर काफी उम्मीद थी कि बेटा जरूर अफसर बनेगा और उनका व पूरे गांव का नाम रौशन करेगा। तारा कुमार ने बताया कि उच्च शिक्षा पूरी करते ही 2019 से वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए।
जेपीएससी, जेएसएससी सहित अलग-अलग कई प्रतियोगी परीक्षाओं का फॉर्म भरने व उसकी तैयारी करते हुए उन्हें पूरी उम्मीद थी कि कभी न कभी सफलता जरूर मिलेगी। लेकिन बीते 7 वर्षों से उनका यह सपना अधूरा ही रह गया है। हर बार वे परीक्षा दे रहे हैं और हर बार कोई न कोई समस्या उत्पन्न हो जा रही है।

आंदोलनरत छात्रों ने शनिवार शाम फ्लैश लाइट मार्च निकाला।
गांव वाले तो अब ताना भी मारते हैं तारा कुमार कहते हैं कि अब तो गांव वाले लगातार उन्हें ताना मारते हैं कि पता नहीं यह कौन सी पढ़ाई कर रहा है कि इसे नौकरी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि गांव वालों के तानों को सुनकर अब वे परेशान हो चुके हैं।
तारा कहते हैं कि मेरे से छोटी उम्र के बच्चे पढ़ाई छोड़ छोटी-मोटी नौकरी में लग गए और आज वे अपना मकान बनाकर खुशहाली भरी जिंदगी जी रहे हैं। ये सब देखने के बाद उन्हें और भी पीड़ा होती है।

नीतीश कुमार ने कहा- 14वीं जेपीएससी की पीटी मैंने पास कर ली है। रांची में रहकर मेंस की तैयारी कर रहा हूं। पर इस परीक्षा में जिस तरह से धांधली हुई है, आप लोग देख ही रहे हैं।
संघर्ष की कसौटी पर झारखंड का भविष्य: नीतीश कुमार
झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं का इतिहास केवल कागजों पर परिणाम दर्ज करने का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के टूटे हुए सपनों और अंतहीन इंतजार की कहानी है। गिरिडीह जिले के रहने वाले नीतीश कुमार इसी व्यवस्था की चक्की में पिस रहे एक आम युवा का जीवंत उदाहरण हैं।
नीतीश ने झारखंड की लगभग सभी प्रमुख परीक्षाएं जैसे 14वीं जेपीएससी (JPSC), झारखंड सीजीएल और उत्पाद सिपाही परीक्षा पूरी मेहनत और लगन के साथ पास की है। इसके बावजूद, आज भी वे नौकरी की एक अदद उम्मीद के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

मेडिकल टीम ने भूख हड़ताल कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की।
एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले नीतीश कहते हैं, मेरे लिए पढ़ाई करना ही किसी संघर्ष से कम नहीं था। पिता ने खेत में खून-पसीना बहाकर मुझे पढ़ाया। इस उम्मीद में कि एक दिन सरकारी नौकरी मिलने से परिवार की गरीबी दूर होगी।
नीतीश कहते हैं कि 14वीं जेपीएससी की पीटी भी पास कर गया और रांची आकर मेंस की तैयारी में जुट गया। पर इस एग्जाम में हुई धांधली ने फिर सब खत्म कर दिया है। परीक्षाओं के फॉर्म भरने, कोचिंग और बड़े शहर में रहकर तैयारी करने का कर्ज बढ़ता चला गया। पिता की उम्मीदें अब नाउम्मीदगी में बदलने लगी हैं। ————————
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‘बातचीत का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। विधानसभा का सत्र चल रहा है। हम इंतजार कर रहे हैं कि सरकार बातचीत के लिए बुलाए। हम किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं जुड़ना चाहते, लेकिन सभी का नैतिक समर्थन चाहिए।’
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल कर रहे छात्र रूपेश इतना कहते-कहते रुक जाते हैं। इशारे में कहते हैं, ‘गला सूख रहा है, अब और बोल नहीं सकता।’
रूपेश पिछले छह दिन से अनशन पर हैं। वह जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलन में शामिल हैं। इस आंदोलन में हजारों छात्र शामिल हैं। भारी बारिश के बीच इनका जोश कम नहीं हो रहा है। पढ़िए पूरी खबर…