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Fish And Ship farming Tips: समस्तीपुर के किसानों के लिए खुशखबरी है. अब मछली पालन के साथ तालाबों में सीप पालन कर मोती उत्पादन से डबल मुनाफा कमा रहे हैं. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) किसानों को ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देकर इस आधुनिक तकनीक से जोड़ रहा है. जानें कैसे एक ही तालाब से हो रही है दोगुनी कमाई.
समस्तीपुर: हर किसान का सपना होता है कि वह कम लागत में अधिक से अधिक आमदनी प्राप्त करे. इसी सोच को साकार करने की दिशा में मछली पालन के साथ शीप (सीप) पालन एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है. समस्तीपुर जिले में कई किसान इस तकनीक को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार मछली पालन के लिए तैयार तालाबों में ही शिप पालन किया जा सकता है. जिससे अलग से जमीन या बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं पड़ती. यही वजह है कि एक ही संसाधन का उपयोग कर किसान दो अलग-अलग स्रोतों से कमाई कर सकते हैं. शिप पालन के माध्यम से मोती उत्पादन भी संभव है. जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है.
वैज्ञानिक किसानों को दे रहे प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मत्स्य पालन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा शीप पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इच्छुक किसान विभाग से संपर्क कर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं.विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रकार के शिप उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान लेकर इस कार्य की शुरुआत कर सकते हैं. वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को शिप के रखरखाव, भोजन, देखभाल और मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया सिखाई जाती है. डॉ. कुमार के अनुसार शिप के अंदर विशेष प्रकार का न्यूक्लियस डालकर मनचाहे डिजाइन के मोती तैयार किए जा सकते हैं. यदि किसी किसान को गणपति, फूल या अन्य आकृति वाला मोती चाहिए तो उसी प्रकार का न्यूक्लियस शिप के भीतर स्थापित किया जाता है.
17 से 18 महीने में तैयार होता है मोती
वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि मोती उत्पादन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है. जिसमें धैर्य और तकनीकी जानकारी दोनों की आवश्यकता होती हैं. सामान्य तौर पर एक गुणवत्तापूर्ण मोती तैयार होने में 17 से 18 महीने का समय लगता है. इस दौरान शिप सूक्ष्म शैवाल, बैक्टीरिया और कार्बनिक पदार्थों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है. उचित देखभाल और सही तकनीक अपनाने पर किसानों को अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि शिप पालन न केवल अतिरिक्त आय का साधन है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है. विश्वविद्यालय लगातार किसानों को इस तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रहा है ताकि वे पारंपरिक मछली पालन के साथ मोती उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकें.
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