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SC CGL Preparation As Per New Pattern: एसएससी ने सीजीएल परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया है. नए नियम के अनुसार अब हर विषय के लिए अलग फिक्स समय मिलेगा, न कि कुल समय. यानी आप एक विषय का बचा हुआ समय दूसरे विषय पर खर्च नहीं कर सकेंगे. इस नए पैटर्न के हिसाब से परफेक्ट तैयारी कैसे करें, जानते हैं.
रांची. एसएससी की कुछ प्रमुख परीक्षाओं में अब पैटर्न बदला है. पहले सभी विषयों के लिए एक तय समय मिलता था, लेकिन अब रीजनिंग, मैथ्स समेत अलग-अलग सेक्शन के लिए अलग समय निर्धारित किया जा रहा है. ऐसे में रांची के एसएससी और रीजनिंग एक्सपर्ट हितेश बताते हैं कि पहले परीक्षा में बचा हुआ समय दूसरे विषय में इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा. किसी विषय को जल्दी खत्म करने पर बचा हुआ समय दूसरे विषय में इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा.
अब टाइमर लगाकर करें प्रैक्टिस
• हितेश बताते हैं कि अब छात्रों को 45 मिनट का टाइमर लगाकर प्रैक्टिस करनी होगी. चाहे मैथ्स हो या रीजनिंग, 45 मिनट में पूरा पेपर हल करने की आदत डालनी होगी. घर पर कम से कम 30 से 35 मिनट में पूरा पेपर हल करने का अभ्यास करना चाहिए. अब टाइम सेट करके पढ़ाई करनी होगी. बिना टाइमर के काम नहीं चलेगा.
• पहले अगर किसी का मैथ्स मजबूत होता था, तो वह जल्दी सवाल हल करके बचा समय रीजनिंग में लगा देता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. ऐसे में रीजनिंग में भी मजबूत पकड़ बनानी जरूरी होगी. रीजनिंग लोगों को कठिन इसलिए लगती है, क्योंकि यह स्कूल के समय से ज्यादा पढ़ाई नहीं जाती.
• हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि इसमें एक्सपर्ट नहीं बना जा सकता. अगर हर दिन एक घंटा रीजनिंग को दिया जाए, तो यह मुश्किल नहीं रहेगी. सबसे पहले अरिहंत या कोई दूसरी स्टैंडर्ड बुक लें. ध्यान रखें कि सिर्फ एक ही बुक चुनें.
• इसके बाद उसी बुक को कम से कम 25 से 30 बार हल करें. एक चैप्टर को टाइमर लगाकर 30 मिनट में खत्म करने की कोशिश करें. एक चैप्टर में 30 से 35 सवाल होते हैं, जबकि कुछ में 35 से 45 सवाल भी हो सकते हैं. किसी भी हाल में 30 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए.
• एक बात का खास ध्यान रखें, रीजनिंग का सबसे बड़ा फंडा है कंसिस्टेंसी. अगर आप हर दिन एक घंटा लगातार 6 महीने तक देते हैं, तो यह काफी है. एक दिन भी गैप नहीं करना चाहिए. जितनी ज्यादा प्रैक्टिस करेंगे, उतनी ही पकड़ मजबूत होती जाएगी.
• सबसे बड़ी गलती यह होती है कि कई छात्र 10-15 किताबें पढ़ना शुरू कर देते हैं. उन्हें लगता है कि इससे वे एक्सपर्ट बन जाएंगे, जबकि यही सबसे बड़ी गलती है. कई लोग 100-200 किताबें देख लेते हैं, लेकिन परीक्षा में दो सवाल भी हल नहीं कर पाते. एक ही बुक को बार-बार हल करना ज्यादा फायदेमंद है. क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी पर भरोसा करें.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें