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Success Story: दिन में 9 घंटे नौकरी, रात में पढ़ाई… किसान के...


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BPSC Success Story: देवघर के रतनपुर गांव के किसान पुत्र रमेश कुमार ने BPSC परीक्षा में 285वीं रैंक हासिल की है. वह पटियाला आर्मी कैंट में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की 9 घंटे नौकरी के साथ तैयारी कर रहे थे. अब वह बिहार में अधिकारी के रूप में तैनात होंगे.

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा का परिणाम बीते दिनों जारी कर दिया गया, जिसमे कई छात्र छात्राओं ने बाजी मारी है. वहीं, रिजल्ट जारी होते ही देवघर के जसीडीह स्थित रतनपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. गांव के बेटे रमेश कुमार ने बीपीएससी में 285वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता हासिल की.

रमेश कुमार वर्तमान में पंजाब के पटियाला आर्मी कैंट में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं. नौकरी की जिम्मेदारियां इतनी थी कि आम आदमी शायद अपने सपनों को किनारे रख देता, लेकिन रमेश ने ऐसा नहीं किया. रोजाना 9 से 10 घंटे नौकरी करने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. दिनभर की थकान के बावजूद रात को देर तक जागकर किताबों के साथ समय बिताना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था. कई बार शारीरिक थकान और मानसिक दबाव भी आया, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई और लगातार मेहनत करते रहे.

रमेश की प्रारंभिक शिक्षा देवघर के संत अरविंदो स्कूल में हुई. बचपन से ही पढ़ाई के प्रति उनका रुझान था और कुछ बड़ा करने की इच्छा हमेशा उनके मन में रही. हालांकि उनके सामने संसाधनों की कमी और जिम्मेदारियों का बोझ भी था, लेकिन उन्होंने कभी इन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उनका मानना था कि इंसान की असली ताकत उसकी मेहनत और आत्मविश्वास में होती है. यही सोच उन्हें हर दिन आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही और उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा.

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इस सफलता के पीछे सिर्फ रमेश की मेहनत ही नहीं, बल्कि उनके परिवार का त्याग और सहयोग भी शामिल है. रमेश बताते हैं कि उनके पिता का आशीर्वाद और शिक्षकों का मार्गदर्शन हमेशा उनके साथ रहा, लेकिन सबसे बड़ा सहयोग उनकी पत्नी का रहा, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया. जब नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता था, तब परिवार ने उन्हें टूटने नहीं दिया. यही वजह है कि रमेश हर चुनौती का सामना करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहे और आखिरकार सफलता हासिल कर ली.

एक किसान के बेटे के लिए इतने बड़े मुकाम तक पहुंचना किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है. गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर बीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल करना यह दिखाता है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती है. यदि मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो और मेहनत करने का साहस हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है. रमेश की कहानी इसी सोच को मजबूत करती है और युवाओं को यह विश्वास दिलाती है कि संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता है.

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