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Sugar Price Update : चीनी की बढ़ती कीमत से परेशान हैं तो जल्द ही आपको राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने कहा है कि एक्स-मिल की कीमत कम हो चुकी है और अब खुदरा कीमतों में भी गिरावट आने की उम्मीद है. त्योहारी सीजन में चीनी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कई उपाय भी किए हैं.
चीनी की खुदरा कीमतों में गिरावट आने की संभावना है.
नई दिल्ली. त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है. रिटेल बाजार में भी कीमतों में कमी का रुख शुरू हो गया है और सप्लाई चेन में इसका असर जल्द पूरी तरह दिखाई देने की उम्मीद है.
सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. हाल में कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी मुख्य रूप से जमाखोरी और सट्टेबाजी की वजह से हुई. देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सरकार लगातार चीनी के स्टॉक, कीमतों और आवाजाही पर निगरानी रख रही है.
सरकार की जांच में सामने आया सच
- सरकार ने देशभर में चीनी मिलों के स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया.
- जांच में कई मिलों के पास उनके सरकार को दिए गए मासिक रिटर्न में घोषित मात्रा से ज्यादा चीनी का स्टॉक पाया गया.
- इससे साफ हुआ कि देश में चीनी की वास्तविक उपलब्धता पर्याप्त है और किसी तरह की कमी नहीं है.
- सरकार ने उपभोक्ताओं से पैनिक बाइंग और जरूरत से ज्यादा चीनी जमा नहीं करने की अपील की है.
- कुछ मिलों में शॉर्ट सेलिंग भी पाई गई. यानी उन्हें जितनी मात्रा का मासिक कोटा मिला था, उससे कम चीनी बाजार में बेची गई.
- सरकार के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों से पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में कृत्रिम रूप से सप्लाई कम दिखाई देती है.
सितंबर से बदल जाएगा कोटा सिस्टम
- सरकार ने चीनी की सप्लाई तेज करने के लिए मासिक कोटा सिस्टम को बदलकर पखवाड़ेवार कर दिया है.
- सितंबर से मिलों को चीनी का कोटा पखवाड़े के हिसाब से दिया जाएगा.
- मिलों को पहले सप्ताह में आवंटित मात्रा का कम से कम 40% बेचने को कहा जाएगा.
- बाकी मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी.
- इससे बाजार में एक साथ महीने के अंत में चीनी पहुंचने की समस्या कम होगी.
- सरकार मांग और सप्लाई की स्थिति पर ज्यादा तेजी से नजर रख सकेगी.
- जरूरत पड़ने पर सरकार अतिरिक्त कोटा जारी कर सकेगी.
चीनी बिकने के 7 दिन के भीतर होगा डिस्पैच
- सरकार ने चीनी मिलों को पहले ही निर्देश दिया है कि बिक्री के बाद चीनी को 7 दिन के भीतर मिल से डिस्पैच करना होगा.
- इसका मकसद चीनी को मिल से डीलर और फिर रिटेल बाजार तक जल्द पहुंचाना है.
- सप्लाई चेन में अनावश्यक देरी कम होगी.
- स्टॉक जमा करके रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी.
- बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी.
- सट्टेबाजी और कृत्रिम स्टॉकिंग को हतोत्साहित किया जा सकेगा.
- बड़े थोक खरीदारों को भी अपनी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा नहीं करने की सलाह दी गई है.
नए सत्र से और बढ़ेगी सप्लाई
- नया चीनी सीजन 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू होने के साथ शुरू हो जाएगा.
- अक्टूबर में 10 लाख टन (10 LMT) से ज्यादा चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है.
- अक्टूबर में उत्पादित चीनी को मिलों को बिना किसी प्रतिबंध के बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है.
- नवंबर में करीब 45 लाख टन (45 LMT) चीनी उत्पादन का अनुमान है.
- कर्नाटक और महाराष्ट्र की चालू मिलों से सितंबर में करीब 2 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है.
- इससे घरेलू बाजार में उपलब्धता और मजबूत होगी.
अतिरिक्त चीनी भी बाजार में आ रही
Advance Authorisation Scheme के तहत लाई गई और रिफाइन की गई चीनी को बेचने की अनुमति दी गई है. जिन डीलरों और थोक उपभोक्ताओं के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक है, वे भी चीनी बाजार में उतार रहे हैं. इससे बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है. सरकार के मुताबिक, एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की गिरावट के बाद अब रिटेल कीमतों में भी गिरावट शुरू हो गई है. सप्लाई चेन में कीमतों का असर पूरी तरह पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम नीचे आने की उम्मीद है.
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आज तक से टीवी पत्रकारिता शुरू करने वाली प्रियंका कांडपाल को अब तक तकरीबन 11 साल का अनुभव है. तकरीबन चार साल आज तक में रिपोर्टिंग के साथ एंकरिंग भी कर चुकी हैं. उसके बाद इंडिया टीवी में पांच साल तक काम किया. 201…
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