भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Thalapathy Vijay Government In TN | OPINION: थलापति विजय के सामने सबसे...


होमताजा खबरदेश

थलापति विजय के सामने सबसे बड़ा संकट: सिस्टम साफ करेंगे या उसी में डूब जाएंगे?

Last Updated:

Thalapathy Vijay Politics: थलापति विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में एंट्री से ही खलबली मचा दी है. जनता ने उन्हें पुराने द्रविड़ शासन के विकल्प के तौर पर चुना था. हालांकि, उन्हें सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, लेफ्ट और VCK जैसे दलों का साथ लेना पड़ रहा है. सवाल यह है कि क्या विजय पुरानी व्यवस्था के साथ हाथ मिलाकर अपने वादे से भटक रहे हैं? विजय के सामने कई नैतिक और राजनीतिक चुनौतियां हैं. क्या वह सिस्टम साफ करेंगे या उसी का हिस्सा बन जाएंगे?

थलापति विजय के सामने सबसे बड़ा संकट: सिस्टम साफ करेंगे या उसी में डूब जाएंगे?Zoom

कांग्रेस, लेफ्ट और VCK जैसी पार्टियों को साथ लेकर जनादेश का अपमान कर रहे थलापति विजय? (File Photo : PTI)

Thalapathy Vijay: तमिलनाडु की राजनीति में इस समय थलापति विजय सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे हैं. उनकी पार्टी टीवीके की जीत को जनता के भरोसे की जीत माना जा रहा है. लोगों का मानना है कि विजय के आने से राज्य में बड़ा बदलाव आएगा. राजभवन की देरी के कारण विजय के प्रति लोगों की सहानुभूति भी बढ़ी है. लेकिन इस पूरी कहानी के पीछे एक बड़ा और गहरा राजनीतिक सवाल छिपा है. क्या विजय वास्तव में वह बदलाव ला पाएंगे जिसका उन्होंने वादा किया था? जनता ने डीएमके और एआईएडीएमके के पुराने ढांचे को पूरी तरह नकार दिया है. विजय ने खुद को भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ एक विकल्प के तौर पर पेश किया था. अब जब वह सत्ता के करीब हैं तो उनकी चुनौतियां और बढ़ गई हैं.

क्या पुरानी पार्टियों का साथ लेने से विजय का मिशन कमजोर हो जाएगा?

जनता की नजर में ये पार्टियां उसी पुराने सिस्टम की जड़ें हैं जिसे लोग खत्म करना चाहते थे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विजय उन्हीं लोगों के साथ मिलकर नया सिस्टम बना पाएंगे? क्या यह जनादेश के साथ धोखा नहीं होगा? अगर लोगों को वही पुराने गठबंधन चाहिए होते तो वे सीधे पुरानी पार्टियों को ही वोट न दे देते.

द्रविड़ राजनीति का नया चेहरा बने ‘थलापति’ विजय का ‘चेंज’ क्या सिर्फ एक समझौता बनकर रह जाएगा? (File Photo : PTI)

सत्ता के लिए समझौता करना क्या विजय की छवि को नुकसान पहुंचाएगा?

विजय के पास इस समय दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं. पहला रास्ता यह है कि वह बिना किसी पुरानी पार्टी के समर्थन के फिर से चुनाव में जाएं. इससे उनकी पार्टी की नैतिक छवि साफ बनी रहेगी. भले ही इसमें रिस्क है लेकिन यह उन्हें भविष्य के लिए बड़ा नेता बना सकता है. अरविंद केजरीवाल और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अतीत में ऐसे ही कड़े फैसले लिए थे.

दूसरा रास्ता यह है कि वह गठबंधन करके सत्ता हासिल कर लें. लेकिन ऐसा करने से ‘बदलाव’ और ‘सत्ता के लालच’ के बीच की लकीर धुंधली हो जाएगी. विजय को यह साबित करना होगा कि वह सिर्फ सरकार चलाने नहीं बल्कि सिस्टम बदलने आए हैं. क्या वह अपनी पारदर्शिता बरकरार रख पाएंगे? यह आने वाला वक्त ही बताएगा.

About the Author

दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें





Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top