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अपराधियों के लिए आफत QR Code, पुलिस ने बताया ‘रक्षक ऐप’ का...


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अपराध और चोरी जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पलामू पुलिस अब हाईटेक तकनीक का सहारा ले रही है. बड़े शहरों की तर्ज पर पलामू जिले में भी क्यूआर कोड आधारित पुलिसिंग की शुरुआत की गई है.. जिले के संवेदनशील इलाकों में 650 क्यूआर कोड लगाए गए हैं. इनके माध्यम से पुलिस गश्ती व्यवस्था की निगरानी करेगी. 

पलामू: अपराध और चोरी जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पलामू पुलिस अब हाईटेक तकनीक का सहारा ले रही है. बड़े शहरों की तर्ज पर पलामू जिले में भी क्यूआर कोड आधारित पुलिसिंग की शुरुआत की गई है. जिले के संवेदनशील इलाकों में 650 क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से पुलिस गश्ती व्यवस्था की निगरानी करेगी. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस पेट्रोलिंग को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है.

पलामू पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने लोकल18 को बताया कि जिले में अपराध की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया गया है. इनमें चोरी, लूट और डकैती की आशंका वाले इलाके शामिल हैं. सबसे अधिक क्यूआर कोड मेदिनीनगर क्षेत्र में लगाए गए हैं, जहां करीब 110 स्थानों को चिह्नित किया गया है. इसके अलावा शहर और ग्रामीण इलाकों के लिए अलग-अलग पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि हर क्षेत्र में नियमित गश्ती सुनिश्चित हो सके.

अएज कहा कि झारखंड पुलिस द्वारा ‘रक्षक ऐप’ लॉन्च किया गया है. इसी के तहत विभिन्न स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं. पुलिस अधिकारी और जवान गश्त के दौरान इन क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे, जिससे यह रिकॉर्ड होगा कि संबंधित क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी रही है. इससे गश्ती व्यवस्था की वास्तविक मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी.

उन्होंने बताया कि दिन और रात दोनों समय पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजकर स्कैनिंग कराई जा रही है. इन सभी क्यूआर कोड की निगरानी सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय से की जा रही है. इतना ही नहीं, वरीय पदाधिकारी भी किसी क्षेत्र में जाकर क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं, जिससे उनके भ्रमण और निगरानी की जानकारी भी रिकॉर्ड में दर्ज होगी.

पुलिस का मानना है कि इस नई व्यवस्था से अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा. लगातार गश्त और डिजिटल मॉनिटरिंग से चोरी, लूट और डकैती जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि पुलिस बल तय क्षेत्रों में नियमित रूप से पहुंच रहा है या नहीं.

पुलिस अधीक्षक ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर किसी इलाके के लोगों को लगता है कि वहां गश्त की जरूरत है तो वे निकटतम थाने को सूचना दें. पुलिस द्वारा उस क्षेत्र को भी चिन्हित कर वहां क्यूआर कोड लगाया जाएगा.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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