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अभी शुरू करें इस चीज की खेती, 3 माह बाद रोजाना ₹1800...


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रांची के नगड़ी में किसान पेपची की खेती कर रहे हैं. इसकी बुवाई के तीन महीने बाद कमाई शुरू हो जाती है. बाजार में पेपची 40 रुपये और इसके पत्ते 20 रुपये किलो बिकते हैं. इससे हर दिन करीब 1800 रुपये का मुनाफा होता है. किसान इसमें देसी जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं.

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रांची: अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कम समय में बंपर मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो पेपची (अरबी की एक प्रजाति) की खेती एक बेहतरीन विकल्प है. झारखंड की राजधानी रांची के पास स्थित नगड़ी गांव के किसान इन दिनों बड़े पैमाने पर पेपची की खेती कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि बुवाई के ठीक 3 महीने बाद से ही इससे हर दिन करीब 1800 रुपये तक की नियमित कमाई शुरू हो जाती है. बाजार में इसके फल और पत्ते दोनों की भारी मांग रहती है, जिससे किसानों को दोहरा मुनाफा मिल रहा है.

फल के साथ पत्ते भी देते हैं डबल मुनाफा
नगड़ी गांव की महिला किसान प्रमिला बताती हैं कि वे लगभग एक एकड़ जमीन पर पेपची की खेती कर रही हैं. बाजार में इसकी कीमत कभी कम नहीं होती और यह आसानी से 40 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है. इसके अलावा, पेपची के पत्तों की सब्जी भी लोग चाव से खाते हैं, जिससे इसके पत्ते भी बाजार में 20 रुपये प्रति किलो की दर से बिक जाते हैं. इस तरह एक ही फसल से किसानों की डबल कमाई हो जाती है. प्रमिला के अनुसार, सीजन में हर दिन आराम से 30 से 40 किलो पेपची और उतनी ही मात्रा में पत्ते निकल आते हैं, जिससे रोजाना ₹1800 तक की आमदनी तय हो जाती है.

पारंपरिक और जैविक तरीकों से कीड़ों का इलाज
पेपची की बेहतर पैदावार के लिए किसान प्रमिला कुछ खास और देसी तरीकों का इस्तेमाल करती हैं. वे बताती हैं कि हर 15 दिन में पौधों की जड़ों के पास लकड़ी की राख डाली जाती है. राख में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो जड़ों को मजबूती देते हैं. इसके साथ ही, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए नीम का पानी और नीम की खली का उपयोग किया जाता है. इससे बिना किसी रासायनिक कीटनाशक के फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.

कृषि वेस्ट से तैयार करते हैं दमदार जैविक खाद
यहां के किसान खाद खरीदने के लिए बाजार पर निर्भर नहीं हैं. वे मकई की खेती से निकलने वाले वेस्ट (पत्ते और डंठल) और गन्ने के अवशेषों को मिलाकर जैविक खाद तैयार करते हैं. इसमें थोड़ी नीम की खली, किचन का कचरा और गोबर मिलाकर 10 से 15 दिनों के लिए सड़ने छोड़ दिया जाता है. इस तरह एक बेहतरीन खाद बनकर तैयार हो जाती है, जिसे हर 15 दिन में पौधों में डाला जाता है.

शुरुआती दो-तीन महीनों की सही देखरेख और इन देसी नुस्खों को अपनाकर नगड़ी के किसान पेपची की खेती से शानदार मुनाफा कमा रहे हैं. यही वजह है कि इस क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में आजकल हर तरफ पेपची की रोपनी जोर-शोर से चल रही है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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