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आर्मी चीफ बनते ही धीरज सेठ ने पाकिस्तान पर क्या कहा, बता...


जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें थल सेनाध्यक्ष का पद संभाल लिया है. इस मौके पर जनरल धीरज सेठ ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में भारतीय सेना की रणनीति केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी, तकनीकी बढ़त, आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर आधारित होगी. उन्होंने अपने पहले संबोधन में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका पूरा संदेश यही था कि भारत अब किसी भी चुनौती का जवाब पुराने तरीके से नहीं, बल्कि नई सोच और आधुनिक सैन्य क्षमता के साथ देगा.

जनरल धीरज सेठ ने कहा कि भारतीय सेना पहले से ही कम्बैट रेडी और बैटल हार्डेंड फोर्स है. यानी सेना हर तरह के युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सेना हर समय पूरी तरह तैयार रहेगी.

पाकिस्तान के लिए क्या था संदेश?

भारत के सामने सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और नियंत्रण रेखा (LoC) पर संघर्ष विराम उल्लंघन जैसे मुद्दे लगातार बने हुए हैं. ऐसे में जनरल सेठ के पहले संबोधन को केवल औपचारिक भाषण नहीं, बल्कि भारत की नई सैन्य रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमाओं पर विजिलेंस एंड रेडिनेस यानी चौबीसों घंटे सतर्कता और उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी सेना की पहली प्राथमिकता होगी. इसका सीधा संदेश यही है कि सीमा पार से होने वाली किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए सेना हर समय तैयार रहेगी.

‘VIJAY’ में छिपा नई सेना का रोडमैप

अपने विजन को जनरल सेठ ने VIJAY नाम के एक विशेष मंत्र में समेटा. यही आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की कार्ययोजना होगी.

V – Vigilance and Readiness: यानी सीमा पर लगातार निगरानी, तेज प्रतिक्रिया क्षमता और हर परिस्थिति में युद्ध के लिए तैयार रहना.

I – Innovation and Transformation: यानी ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमता और नई सैन्य तकनीकों को तेजी से अपनाना, ताकि भविष्य के युद्धों में भारत तकनीकी रूप से आगे रहे.

J – Jointness and Integration: यानी थल सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना. इसके साथ ही पूरे राष्ट्र की क्षमता को रक्षा तैयारियों से जोड़ना और सैन्य-नागरिक सहयोग बढ़ाना.

A – Aatmanirbharta: यानी विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी रक्षा उपकरण, हथियार और तकनीकों को प्राथमिकता देना. उनका संदेश साफ था कि भविष्य के युद्ध भारतीय तकनीक से जीतने होंगे.

Y – Yoddha First: यानी अग्निवीरों, नियमित सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और तकनीकी दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना.

‘JAI’ से ‘VIJAY’ तक का सफर

जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के JAI विजन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि JAI से आशय ज्वांटनेस (Jointness), इनोवेशन (Innovation) और आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) को आधार बनाकर भारतीय सेना परिवर्तन के इस दशक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपना नया मंत्र दिया- जय से विजय.

आधुनिकीकरण पर जोर

नए सेना प्रमुख ने माना कि दुनिया का सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. आधुनिक युद्ध अब केवल टैंक और तोप तक सीमित नहीं हैं. साइबर युद्ध, ड्रोन, स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र भविष्य की लड़ाइयों का स्वरूप तय करेंगे. इसी वजह से उन्होंने भारतीय सेना को टेक्नोलॉजी एनेबल्ड और फ्यूचर रेडी आर्मी बनाने का लक्ष्य रखा है. उनका कहना है कि सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन के लिए तैयार किया जाएगा, जहां जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर सभी क्षेत्रों में एक साथ प्रभावी कार्रवाई की क्षमता विकसित की जाएगी.

पूर्व सेना प्रमुखों को दिया सम्मान

जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन की शुरुआत इस जिम्मेदारी को गर्व और विनम्रता का क्षण बताते हुए की. उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का भरोसा जताने के लिए आभार व्यक्त किया. साथ ही पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी समेत सभी पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को नमन किया और देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

भारत का साफ संदेश

जनरल धीरज सेठ ने भले ही अपने पहले भाषण में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संदेश स्पष्ट था. भारत की रणनीति अब केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता, आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति, तीनों सेनाओं के बेहतर समन्वय और हर समय युद्ध के लिए तैयार रहने वाली सेना पर आधारित होगी.



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