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Srisailam Mallamma Kanneru: श्रीशैलम स्थित मल्लम्मा कन्नेरु में मन्नत मांगने के लिए ओखली में मूसल को बिना सहारे सीधा खड़ा करने की अनोखी परंपरा जारी है. 14वीं शताब्दी की शिव भक्त हेमारेड्डी मल्लम्मा से जुड़े इस स्थान पर मान्यता है कि मूसल सीधा खड़े रहने पर मनोकामना पूरी होती है. तेलंगाना और रायलसीमा से आने वाले शिवभक्त मल्लिकार्जुन दर्शन के साथ यहाँ अनुष्ठान करते हैं. विज्ञान इसे संतुलन मानता है, वहीं भक्त इसे मल्लम्मा का चमत्कार मानते हैं.
Srisailam Mallamma Kanneru: तेलंगाना की सीमा से सटे और दक्षिण भारत के लाखों शिवभक्तों की आस्था के प्रमुख केंद्र श्रीशैलम में स्थित मल्लम्मा कन्नेरु इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. नल्लामाला के घने जंगलों में स्थित इस पवित्र स्थल पर सदियों पुरानी एक बेहद अनोखी धार्मिक परंपरा निभाई जाती है. यहाँ मन्नत मांगने के लिए ओखली में मूसल को बिना किसी सहारे के सीधा खड़ा किया जाता है. इस पावन स्थल का संबंध 14वीं शताब्दी की महान शिव भक्त हेमारेड्डी मल्लम्मा से जुड़ा हुआ है.
दक्षिण भारत और विशेष रूप से तेलंगाना व रायलसीमा क्षेत्र के जनमानस में मल्लम्मा की भक्ति की गाथाएं अत्यंत लोकप्रिय हैं. लोक मान्यताओं के अनुसार भगवान मल्लिकार्जुन की अनन्य साधना के दौरान मल्लम्मा के आंसुओं से ही यहाँ एक पावन जल स्रोत प्रकट हुआ था, जिसे कन्नेरु यानी ‘आंसू’ कहा जाता है. यहाँ आने वाले श्रद्धालु मल्लम्मा के ऐतिहासिक ओखली और मूसल के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और मल्लम्मा का स्मरण कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.
ओखली में मूसल खड़ा करने की अनोखी परंपरा
परंपरा के अनुसार भक्त अपने मन में मनोकामना लेकर भगवान शिव और माता मल्लम्मा का ध्यान करते हुए मूसल को ओखली के ठीक बीचों-बीच बिना किसी सहारे के सीधा खड़ा करने का प्रयास करते हैं. श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि यदि मूसल बिना किसी सहारे के संतुलित होकर सीधा खड़ा रह जाए, तो उनकी प्रार्थना ईश्वर द्वारा स्वीकार कर ली जाती है और मनोकामना जल्द पूरी होती है. तेलंगाना के महबूबनगर, नागरकुरनूल, हैदराबाद और रंगारेड्डी जिलों से श्रीशैलम पहुँचने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मल्लिकार्जुन स्वामी के दर्शन के बाद मल्लम्मा कन्नेरु जाकर यह अनुष्ठान करना यात्रा का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है.
विज्ञान का संतुलन या अटूट आस्था
यदि भौतिक विज्ञान के नजरिए से देखा जाए तो यह गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और वस्तु के केंद्र संतुलन (Center of Gravity) का एक बेहतरीन उदाहरण है. हालांकि, वैज्ञानिकों की इस थ्योरी से परे श्रद्धालुओं के लिए यह शुद्ध रूप से आस्था, भक्ति और माता मल्लम्मा के दिव्य आशीर्वाद का ही प्रतीक बना हुआ है. हर साल हजारों भक्त इस अनोखे चमत्कार के साक्षी बनते हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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