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Icchadhari Naag-Nagin: पलामू में सर्प विशेषज्ञ डॉ. डी एस श्रीवास्तव ने कहा कि इच्छाधारी नागिन का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. टीवी सीरियल से लोगों में अंधविश्वास बढ़ा है. उन्होंने सांप को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. आइये जानते हैं इसके बारे में.
पलामू: भारत में सदियों से लोककथाओं और पौराणिक कहानियों का विशेष महत्व रहा है. गांव-देहात से लेकर शहरों तक कई ऐसी कहानियां सुनाई जाती हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उन्हें सच मानते आ रहे हैं. इन्हीं चर्चित कहानियों में एक है इच्छाधारी नाग और नागिन की कहानी. टीवी सीरियल और फिल्मों में इसे रहस्य, रोमांच और चमत्कार के साथ दिखाया जाता है, जिससे खासकर महिलाएं और बच्चे इसे वास्तविक मान बैठते हैं, लेकिन क्या सच में इच्छाधारी नागिन होती है? इस सवाल का जवाब विज्ञान और विशेषज्ञ दोनों अलग तरीके से देते हैं.
जानें सर्प विशेषज्ञ से
दरअसल, भारतीय पौराणिक कथाओं में यह मान्यता है कि नाग-नागिन 100 वर्षों की तपस्या के बाद रूप बदलने की शक्ति हासिल कर लेते हैं. कई कहानियों में उन्हें इंसान का रूप लेते और बदला लेते हुए दिखाया जाता है. यही वजह है कि फिल्मों और टीवी सीरियलों में इच्छाधारी नागिन का विषय हमेशा लोगों को आकर्षित करता रहा है. पलामू जिले के सर्प विशेषज्ञ डॉ. डी एस श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया कि इच्छाधारी नाग नागिन को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि कोई सांप इंसान या किसी दूसरे रूप में बदल सकता है.
जानें कोबरा कब फैलाते हैं फन
उन्होंने कहा कि कि नाग कोई अलग जीव नहीं, बल्कि कोबरा प्रजाति का सांप होता है. जिन सांपों में फन होता है, वे सामान्य तौर पर कोबरा परिवार से जुड़े होते हैं. दुनिया में कोबरा की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें अधिकांश जहरीले होते हैं. कोबरा देखने में बेहद आकर्षक और रोचक लगते हैं. जब उन्हें खतरा महसूस होता है, तब वे अपना फन फैलाकर खड़े हो जाते हैं, जिससे लोग डर जाते हैं. यही वजह है कि नाग को लेकर रहस्य और डर दोनों जुड़े हुए हैं.
उन्होंने बताया कि टीवी सीरियल और फिल्मों में इच्छाधारी नागिन को किसी भी रूप में बदलते हुए दिखाया जाता है, जो पूरी तरह काल्पनिक और मनोरंजन का हिस्सा है. इन कहानियों का वास्तविक जीवन या विज्ञान से कोई संबंध नहीं है. कई बार ऐसे सीरियल लोगों के मन में अंधविश्वास और भ्रम पैदा कर देते हैं. खासकर बच्चे और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन कहानियों को सच मान लेते हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि सांप प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें रहस्य या डर से ज्यादा संरक्षण की जरूरत है. इसलिए लोगों को फिल्मों और सीरियलों में दिखाई जाने वाली काल्पनिक कहानियों और वास्तविकता के बीच अंतर समझना चाहिए. इच्छाधारी नागिन की कहानी भले ही मनोरंजन का हिस्सा हो, लेकिन आज तक इसका कोई वैज्ञानिक या वास्तविक प्रमाण सामने नहीं आया है. वहीं, टीवी सीरियल में इसे बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है. जिससे कि आज कल का जेनरेशन बर्बाद हो रहा है. सांपों को लेकर अपभ्रंश फैल रहा है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें