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कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने आधुनिक खेती अपनाकर नई मिसाल पेश की है. उन्होंने 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में ग्रीन नेट हाउस बनाकर जरबेरा फूलों की खेती शुरू की है. जिला उद्यान विभाग की सहायता और विशेष प्रशिक्षण के बाद वे हर सप्ताह करीब 1500 फूलों का उत्पादन कर रहे हैं. फूलों की बिक्री से उन्हें हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है.
कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं. जहां पहले ज्यादातर किसान धान, गेहूं और मौसमी सब्जियों की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब कुछ किसान नई और लाभकारी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं. इसी कड़ी में डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने अपने गांव में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर जरबेरा फूल की खेती शुरू कर एक नई पहचान बनाई है. आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर वे आज हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं.
जरबेरा फूल की खेती
सुमन मेहता बताते हैं कि उन्हें जिला उद्यान विभाग के माध्यम से जरबेरा फूल की खेती के लिए प्रेरित किया गया. विभाग के उद्यान मित्र ने उन्हें इस खेती से होने वाले लाभ और इसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी. इसके बाद उन्होंने इस दिशा में काम करने का फैसला किया. खेती शुरू करने से पहले उन्होंने रांची में छह दिनों का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जहां उन्हें फूलों की खेती, पौधों की देखभाल, उत्पादन बढ़ाने के तरीके और आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई.
आधुनिक तरीके से खेत का विकास
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने खेत को आधुनिक तरीके से विकसित किया. करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में ग्रीन नेट हाउस तैयार किया गया, जिसमें ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग कर जरबेरा के पौधे लगाए गए. इस तकनीक से पौधों को जरूरत के अनुसार पानी मिलता है और खेत में खरपतवार की समस्या भी काफी कम हो जाती है.
फूलों की गुणवत्ता बेहतर
सुमन मेहता के अनुसार ग्रीन नेट हाउस में खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पौधे तेज धूप, भारी बारिश और कीटों के प्रकोप से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं. नियंत्रित वातावरण मिलने के कारण फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी लगातार बना रहता है.
1500 जरबेरा फूलों का उत्पादन
वर्तमान में उनके बागान से हर सप्ताह लगभग 1500 जरबेरा फूलों का उत्पादन हो रहा है. स्थानीय माली और फूल विक्रेता सीधे खेत पर पहुंचकर इन फूलों की खरीदारी करते हैं. बाजार में एक जरबेरा फूल की कीमत 5 से 6 रुपये तक मिल जाती है, जिससे उन्हें नियमित आय हो रही है. उन्होंने बताया कि जरबेरा फूलों की मांग गुलदस्ते, शादी-विवाह, समारोहों और सजावट के कार्यों में सबसे अधिक रहती है.
ग्रीन नेट हाउस का पूरा सेटअप
सुमन मेहता ने बताया कि इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि उन्हें जरबेरा के पौधे और ग्रीन नेट हाउस का पूरा सेटअप उद्यान विभाग की सरकारी योजना के तहत निशुल्क उपलब्ध कराया गया. इससे उन्हें शुरुआती निवेश नहीं करना पड़ा और अब उनकी आय का बड़ा हिस्सा सीधे मुनाफे के रूप में मिल रहा है.
किसानों के लिए भी प्रेरणा
उनके बागान में लाल, पीले, गुलाबी, सफेद, नारंगी समेत कई आकर्षक रंगों के जरबेरा फूल खिले हुए हैं, जो दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं. सुमन मेहता की सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है और कई किसान आधुनिक फूलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें