Last Updated:
Jamshedpur Laxmi Nagar Garden: जमशेदपुर के प्रेम नगर स्थित लक्ष्मी नगर उद्यान में रोज शाम बुजुर्गों की चौपाल सजती है. सभी बुजुर्ग ताश, हरि कीर्तन और बातचीत से पुरानी मेलजोल की परंपरा जिंदा रखे हुए हैं. आइये जानते हैं बुजुर्गों ने क्या कुछ कहा.
जमशेदपुर: तेजी से भागती शहर की जिंदगी में आज इंसान सफलता, पैसे और अपने करियर के पीछे इतना व्यस्त हो चुका है कि आपसी मेलजोल और साथ बैठने की परंपरा कहीं पीछे छूटती नजर आती है. जहां एक ओर गांवों में आज भी पेड़ के नीचे बैठकर बुजुर्गों की चौपाल सजती है. वहीं, शहरों में ऐसे दृश्य अब बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन जमशेदपुर का एक कोना आज भी इस खूबसूरत परंपरा को जिंदा रखे हुए है.
यहां प्रेम नगर के लक्ष्मी नगर उद्यान में हर रोज शाम ठीक 5 बजे एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो आधुनिक दौर में भी रिश्तों की गर्माहट का एहसास कराता है. यहां कदम के पेड़ के नीचे 7 से 8 बुजुर्गों की एक टोली जुटती है, जो न सिर्फ समय बिताती है. बल्कि जिंदगी के असली मायनों को भी जीवंत करती है.
पुरानी यादों को यहां साझा करते हैं बुजुर्ग
इन बुजुर्गों के बीच बैठने पर ऐसा लगता है मानो समय कुछ देर के लिए ठहर गया हो. कोई पुरानी यादें साझा करता है तो कोई हंसी-मजाक में डूब जाता है. कभी-कभी ये लोग ताश के पत्तों के साथ खेल में मशगूल हो जाते हैं तो कभी भक्ति में लीन होकर हरि कीर्तन करते हैं. यह नजारा बताता है कि मनोरंजन के लिए हमेशा मोबाइल या इंटरनेट की जरूरत नहीं होती, बल्कि सच्ची खुशी तो आपसी बातचीत और साथ बैठने में ही छिपी होती है.
इस टोली के सदस्य राम नारायण शर्मा बताते हैं कि दिनभर घर के कामों में व्यस्त रहने के बावजूद वे शाम का यह समय कभी नहीं छोड़ते हैं. उनके अनुसार, ‘शाम को दोस्तों के साथ बैठना हमारे दिन का सबसे सुकून भरा पल होता है. कभी हम कीर्तन करते हैं तो कभी ताश खेलते हैं, लेकिन असली खुशी साथ बैठने में ही है. वहीं, लक्ष्मीकांत कहते हैं कि दिनभर की थकान इस एक घंटे में पूरी तरह खत्म हो जाती है. वह बताते हैं कि आजकल के युवा ज्यादातर समय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं. चार दोस्त भी साथ बैठते हैं, तो सब अपने-अपने फोन में लगे रहते हैं, लेकिन हमारी पीढ़ी में जब चार लोग बैठते हैं तो चारों आपस में बात करते हैं, हंसते हैं और एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं.’
यह है बहुत ही पुरानी परंपरा
यह दृश्य न केवल एक परंपरा को जीवित रखे हुए है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए भी एक संदेश है. तकनीक और आधुनिकता अपनी जगह जरूरी है, लेकिन इंसानी रिश्तों की गर्माहट और आपसी संवाद का कोई विकल्प नहीं हो सकता है. जमशेदपुर के इस छोटे से उद्यान में हर शाम सजने वाली यह महफिल यह साबित करती है कि सच्ची खुशी महंगे साधनों में नहीं, बल्कि अपने लोगों के साथ बिताए गए पलों में होती है.
About the Author
बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें