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Indias Energy Sector : भारत के ऊर्जा सेक्टर ने दिखा दिया कि ईरान संकट के बीच जब दुनिया परेशान थी तो भी यहां ज्यादा असर नहीं दिखा. ग्लोबल परामर्श एजेंसी एसएंडपी ने बताया कि एनर्जी सेक्टर में भारत ने खुद को मजबूत स्थिति में लाने के लिए डाईवर्सिफिकेशन पर खासा काम किया है.
ईरान युद्ध के समय भी भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर दिखाया.
नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान युद्ध के समय जब पूरी दुनिया परेशान थी और तेल-गैस संकट से जूझ रही थी तो भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा असर नहीं दिखा. यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि आखिर कैसे इतने बड़े संकट के बीच सरकार ने स्थिति को संभाला. अब ग्लोबल एजेंसी एसएंडपी के विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि खतरा देखकर मोदी सरकार ने कौन से मास्टर स्ट्रोक चले, जिससे आर्थिक जोखिम के असर को बेहद कमजोर बना दिया गया.
एसएंडपी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने एलएनजी और अन्य ईंधन की खरीद के लिए विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल किया जिससे उसे संकट से निपटने में मदद मिली. विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आवाजाही बंद होने से वैश्विक एलएनजी आपूर्ति करीब 17 फीसदी बाधित हुई. हालांकि, विश्व के चौथे सबसे बड़े एलएनजी खरीदार भारत के ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला को शामिल कर आपूर्ति स्रोतों का सफलतापूर्वक विस्तार करने से एलएनजी आयात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा. इससे अप्रैल और मई, 2026 में सालाना आधार पर इसमें क्रमश: 5 फीसदी और 2 फीसदी की ही कमी आई.
फिर मजबूत होगा भारत
एसएंडपी की इकाई एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के साथ होर्मुज के दोबारा खुलने से ऊर्जा के प्रवाह में सुधार और बाजार की धारणा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, बाजार के सामान्य होने और रणनीतिक भंडार के स्तर को फिर से भरने में समय लगेगा. ये घटनाक्रम बताता है कि डाईवर्सिफाई सप्लाई चेन, मजबूत बुनियादी ढांचा और रणनीतिक स्रोत तक पहुंच महत्वपूर्ण हैं. खोज एवं उत्पादन बाजार, एलएनजी व्यापार एवं समुद्री लॉजिस्टिक के क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता ही लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात बनकर उभरी है.
भारत के बाजार ने दिखाई मजबूती
शोध और परामर्श सेवाएं देने वाली एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने कहा कि भारत के एलएनजी समेत ईंधन बाजार ने मजबूती दिखाई है. होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक एलएनजी आपूर्ति करीब 17 फीसदी बाधित हुई. हालांकि, विश्व के चौथे सबसे बड़े एलएनजी खरीदार भारत ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई. ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला को शामिल कर आपूर्ति स्रोतों का सफलतापूर्वक विस्तार करने से भारत के एलएनजी आयात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा है. इसी तरह, भारत ने कच्चे तेल के मामले में रूस के अलावा वेनेजुएला और अमेरिका समेत अन्य देशों से भी खरीद की है.
भविष्य के लिए भी तैयार हो रहा भारत
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के प्रधान शोध विश्लेषक जोहान उतामा ने कहा कि भविष्य में आने वाली रुकावटों को कम करने के लिए भारत एलएनजी खरीद के अलग-अलग तरीकों में से कुछ को बनाए रखेगा जिससे उसकी लंबी अवधि की खरीद रणनीतियों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण खाड़ी क्षेत्र में तरल ईंधन उत्पादन में प्रतिदिन 1.5 करोड़ बैरल की कमी आई. हालांकि, चीन और जापान द्वारा कच्चे तेल का आयात तेजी से घटाने और अमेरिका से अधिक निर्यात सहित आक्रामक भंडार और वैश्विक स्तर पर मांग प्रबंधन के कारण कीमत में उतार-चढ़ाव आश्चर्यजनक ढंग से सीमित रहा.
होर्मुज बंद होना इतिहास की सबसे बड़ी बाधा
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के उपाध्यक्ष एवं शोध प्रमुख (तेल बाजार, ऊर्जा एवं मोबिलिटी) जिम बुरखर्द ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी तौर पर बंद होना, इतिहास में तेल आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा थी. यह बाधा अब भी है लेकिन कीमतों की सीमित प्रतिक्रिया सबसे आश्चर्य में डालने वाली है. यदि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति और उत्पादन में सुधार होता भी है तो इसमें समय लगेगा और जून-जुलाई तक दुनियाभर में तेल भंडार में कमी बनी रहेगी. इसका मतलब है कि भंडार के और निचले स्तर पर आने से कीमतें बढ़ने का दबाव लौट सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें