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कजरी की महिलाएं स्वरोजगार कर लाल सोने की चमक से लिख रही...


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हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड का कजरी गांव आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गया है। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर और प्रखंड मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव लाह उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। चुरचू और डाड़ी प्रखंड के 26 से अधिक गांवों जिनमें कजरी, बाली, चनारो, लशोध, करगी, दासोखाप, कुरकुट्टा, कुर्रा, खपिया, कनकी, होन्हेमोढ़ा और चैनपुर शामिल हैं। लाह उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। लाह का उत्पादन वर्ष में दो बार होता है। जुलाई महीने में कुसुम, बेर और सेमियालता के पेड़ों पर, जबकि जनवरी में मुख्यतः कुसुम के पेड़ पर लाह का उत्पादन किया जाता है। किसान 5 किलो से लेकर 300 किलो तक लाह का उत्पादन करते हैं और इससे मिलने वाला तैयार लाह छह गुना तक बढ़कर प्राप्त होता है। वर्तमान में सपोर्ट संस्था से जुड़ी लगभग एक हजार महिला किसान कुसुमी और रंगीनी लाह का उत्पादन कर हर साल 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। लाह से बने उत्पादों की देशभर में अच्छी मांग है। यहां की महिलाओं द्वारा लाह की चूड़ियां, बाला, कैप्सूल, लिपस्टिक, लकड़ी पर पुताई के रंग, सिल, मूर्तियों पर चमक बढ़ाने वाली परत समेत कई आकर्षक वस्तुएं तैयार की जाती हैं। संस्था के चूड़ी सेंटर में गरम लाह के बाला, ठंडा लाह की चूड़ियां, गणेश–लक्ष्मी की मूर्तियां, पेन स्टैंड, पेपर वेट, फोटो फ्रेम और दिवाली लैंप जैसे हस्तशिल्प उत्पाद बनाए जाते हैं। यहां तैयार उत्पादों की थोक बिक्री रांची, जमशेदपुर (जुगसलाई), हजारीबाग, ओडिशा के संबलपुर, बरगढ़ और टीटलागढ़ तक होती है। साथ ही नाबार्ड और सरकारी विभागों द्वारा आयोजित मेलों रांची के मोरहाबादी मैदान और पटना गांधी मैदान में भी इन उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाती है।

देशभर में लाह की चुड़ियों की अच्छी मांग



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