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जिले के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मिलने वाली मध्याह्न भोजन योजना पिछले पांच माह से आर्थिक संकट से जूझ रही है। अप्रैल माह से योजना के मुख्य मद की राशि स्कूलों को नहीं मिली है। जिले में इस योजना के तहत हर माह करीब 99 लाख रुपए खर्च होते हैं। इस हिसाब से पांच माह की राशि करीब 4.95 करोड़ रुपये होती है। राशि का भुगतान लंबित रहने से विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए चावल के अलावा दाल, सब्जी, तेल, मसाले और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जाती है। राशि नहीं मिलने के बावजूद बच्चों का भोजन बंद न हो, इसके लिए स्कूलों के प्रधानाध्यापक किसी तरह स्थानीय स्तर पर उधार लेकर अथवा अन्य माध्यमों से व्यवस्था कर योजना को संचालित कर रहे हैं। पांच माह से नहीं मिली मुख्य मद की राशि : जिला शिक्षा अधीक्षक दीपक कुमार राम ने बताया कि अप्रैल माह से मध्याह्न भोजन योजना के मद में राशि प्राप्त नहीं हुई है। विभागीय स्तर पर राशि की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि अंडा और फल के लिए प्राप्त राशि स्कूलों को उपलब्ध करा दी गई है,लेकिन मुख्य भोजन मद की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। विभागीय स्तर पर राशि की मांग किए जाने के बावजूद भुगतान लंबित रहने से विद्यालयों में बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है।हर माह करीब 99 लाख रुपये के खर्च को देखते हुए पांच माह में यह राशि करीब 4.95 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। उधार के सहारे बच्चों की थाली : राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण कई स्कूलों के प्रधानाध्यापक स्थानीय दुकानदारों से खाद्य सामग्री उधार लेकर बच्चों के लिए भोजन तैयार करा रहे हैं। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण दुकानदारों का बकाया भी बढ़ता जा रहा है। प्रधानाध्यापकों के सामने अब यह चिंता भी है कि यदि राशि जल्द उपलब्ध नहीं कराई गई तो उधार में खाद्य सामग्री मिलना भी मुश्किल हो सकता है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना जरूरी है। राशि नहीं मिलने के बावजूद बच्चों के हित में किसी तरह योजना को जारी रखा जा रहा है। लेकिन पांच माह तक लगातार भुगतान नहीं होने से विद्यालय स्तर पर आर्थिक प्रबंधन करना मुश्किल होता जा रहा है। बच्चों के भोजन पर संकट न आए,विभाग जल्द करे भुगतान मध्याह्न भोजन योजना सिर्फ स्कूल में भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है,बल्कि यह बच्चों के पोषण और विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति से भी जुड़ी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल में मिलने वाला भोजन महत्वपूर्ण है। ऐसे में करीब पांच करोड़ रुपये की राशि लंबित रहने से योजना के सुचारू संचालन पर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल प्रधानाध्यापक किसी तरह व्यवस्था संभाल रहे हैं,लेकिन यदि भुगतान में और देरी हुई तो विद्यालयों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों ने विभाग से जल्द राशि जारी कर बकाया भुगतान करने की मांग की है।
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