श्री हरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित रामकली देवी सरस्वती शिशु मंदिर में बुधवार को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के अध्यक्ष वीरेंद्र मित्तल व प्रधानाध्यापिका सुधा देवी के द्वारा दीप प्रज्वलित व पुष्प अर्पित कर किया गया। वहीं विद्यालय के बच्चों के बीच रामचरितमानस चौपाई का प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यालय के आचार्य सुधांशु कुमार ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास अपने जीवनकाल में दर्जनों ग्रंथ लिखे और संस्कृत के विद्वान होने के साथ हिंदी भाषा के प्रसिद्ध और सर्वश्रेष्ठ कवियों में एक माने जाते है। उन्हें महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। उन्होंने रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली, गीतावली आदि रचनाएं की। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन को सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाया। हनुमान चालीसा भी तुलसीदास की ही अमर रचना है। विद्यालय की बहन अनुप्रिया राय ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान कवि और भक्त थे। वे भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त माने जाते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के राजापुर में हुआ था। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सत्य, धर्म, प्रेम, त्याग और अच्छे आचरण का संदेश दिया। वहीं विद्यालय के बच्चे अनन्या कुमारी, नवीन कुमार, अविनाश उरांव, शिवांश ठाकुर, आरुष कुमार, मुस्कान लाईबा ने उनके जीवन के बारे में प्रकाश डाला।
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