प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए एक दिव्यांग(बोलने -सुनने में असमर्थ) पिछले एक साल से प्रखंड कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक किसी अधिकारी की संवेदनशीलता उस तक नहीं पहुंच सकी है। मामला रातू प्रखंड के जाड़ी गांव का है। यहां रहने वाला अनवारुल अंसारी, पिता अलीहसन अंसारी, बेहद जर्जर और टूटे-फूटे घर में रहने को मजबूर है। उसकी अपनी जमीन तो है, लेकिन रहने लायक पक्का घर नहीं होने के कारण उसे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। अनवारुल अंसारी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनवाने की मांग को लेकर लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहा है। मंगलवार को वह एक बार फिर जनता दरबार पहुंचा और सीओ से मदद की अपील की, लेकिन आरोप है कि उसकी बात सुनने के बजाय उसे बाहर जाने को कह दिया गया। रातू| उपायुक्त के निर्देश पर प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाला रातू प्रखंड का जनता दरबार अब लोगों की समझ से परे होता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि आम लोग भी धीरे-धीरे जनता दरबार से दूरी बनाने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें केवल समझाने-बुझाने का प्रयास किया जाता है। लोगों का कहना है कि रातू का जनता दरबार बंद कमरे में आयोजित किया जाता है। एक समय में कुछ ही लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी जाती है, जबकि बाकी लोग बाहर दरवाजे पर घंटों इंतजार करते रहते हैं। इस व्यवस्था को लेकर अब लोगों में संदेह और नाराजगी दोनों बढ़ने लगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पत्रकारों को भी जनता दरबार के दौरान अंदर खड़े रहने या कवरेज करने की अनुमति नहीं दी जाती। इससे पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। इधर, सीओ रवि कुमार के पास एक-दो नहीं बल्कि चार विभागों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे सीओ, बीडीओ, सीडीपीओ और तसर विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों का दबाव बढ़ने से आम जनता की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। वहीं, लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों से फोन पर संपर्क करना भी बेहद मुश्किल हो गया है। अनवारुल ने अधिकारियों को वह आवेदन भी दिखाया, जिस पर गांव के मुखिया के हस्ताक्षर 25 जुलाई 2025 को किए गए हैं। आवेदन के अनुसार उसका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रतीक्षा सूची में शामिल है और सूची में उसका क्रमांक 204 है। इसके बावजूद अब तक उसे योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इधर, मामले को लेकर जब सीओ रवि कुमार से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब जरूरतमंद और दिव्यांग लोगों को भी योजनाओं का लाभ पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ें, तो सरकार की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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