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एक ही कमरे में चल रहीं 3 विषयों की कक्षाएं:जमीन विवाद में...




बीआईटी प्लस-2 उच्च विद्यालय, मेसरा में विद्यार्थियों को किताबी पढ़ाई के साथ विज्ञान का व्यावहारिक ज्ञान देने की योजना जमीन विवाद में फंस गई है। स्कूल में भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान के लिए तीन अलग-अलग लैब भवन बनाने के उद्देश्य से झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल (जेईपीसी) ने 38 लाख 19 हजार रुपए आवंटित किए हैं। लेकिन बीआईटी मेसरा प्रबंधन की ओर से स्कूल परिसर की जमीन पर निर्माण कार्य रोके जाने के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। बीआईटी मेसरा प्रबंधन का दावा है कि स्कूल जिस जमीन पर संचालित है, वह संस्थान की संपत्ति है। वहीं, स्कूल की ओर से निर्माण की अनुमति मांगी गई है। इस संबंध में करीब एक महीने पहले पत्राचार भी किया गया था। सोमवार को विवाद के समाधान के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) के समक्ष दोनों पक्षों की बैठक हुई। स्कूल की ओर से प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मंजुल बिलुंग, जूनियर इंजीनियर और सीनियर इंजीनियर शामिल हुए। बीआईटी मेसरा की ओर से उत्कर्ष मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्कूल के पास जमीन से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं। डीईओ ने संस्थान को दस्तावेजों की जांच के लिए कुछ दिनों का समय दिया है। जांच के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। पदाधिकारी (डीईओ) के समक्ष दोनों पक्षों की बैठक हुई। स्कूल की ओर से प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मंजुल बिलुंग, जूनियर इंजीनियर और सीनियर इंजीनियर शामिल हुए। बीआईटी मेसरा की ओर से उत्कर्ष मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्कूल के पास जमीन से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं। डीईओ ने संस्थान को दस्तावेजों की जांच के लिए कुछ दिनों का समय दिया है। जांच के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। प्रैक्टिकल कक्षाएं संचालित करने में परेशानी बीआईटी प्लस-2 उच्च विद्यालय में पिछले कई वर्षों से विज्ञान विषयों के लिए अलग-अलग लैब की व्यवस्था नहीं है। फिलहाल एक ही कमरे में 11वीं कक्षा की थ्योरी पढ़ाई के साथ भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान तीनों विषयों के प्रैक्टिकल भी कराए जाते हैं। इसी कमरे में तीनों विषयों के प्रयोग से संबंधित उपकरण और अन्य सामग्री भी हैं। इससे शिक्षकों के सामने भी असमंजस की स्थिति बनी रहती है कि एक ही कमरे में थ्योरी की कक्षा संचालित करें या प्रैक्टिकल कराएं। स्कूल में कुछ महीने पहले विज्ञान विषयों की प्रैक्टिकल परीक्षा भी हुई थी, लेकिन अलग-अलग लैब नहीं होने के कारण प्रयोगात्मक पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जमीन के दस्तावेज की जांच के बाद होगा फैसला
लैब भवन निर्माण के मामले को लेकर दोनों पक्ष बैठक में उपस्थित हुए थे। आगे जमीन के दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। – वसीम अहमद, जिला शिक्षा पदाधिकारी, रांची



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