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Success Story: जुनून और खुद पर आत्मविश्वास के दम पर महानगरों की नौकरी छोड़कर भी अपने घर-गांव में सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है. इसे सच कर दिखाया है झारखंड के बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड की रहने वाली पिंकी कुमारी ने. कभी आसमान में उड़ान भरने की तैयारी करने वाली और कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंची सैलरी पाने वाली पिंकी आज अपने दम पर फास्ट फूड बिजनेस में एक नई और मिसाल देने योग्य पहचान बना रही हैं. आइए जानते हैं इनकी कहानी.
पिंकी कुमारी ने एक खास बातचीत में अपने इस दिलचस्प सफर को साझा किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के गुड़गांव (गुरुग्राम) में लगभग 8 वर्षों तक कॉर्पोरेट और सर्विस सेक्टर में काम किया था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मशहूर एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट के साथ बतौर एयर होस्टेस की थी. इसके बाद उन्होंने कई बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों में भी अपनी सेवाएं दीं. हालांकि, इतनी अच्छी नौकरियों के बावजूद उनका मन हमेशा खुद का कुछ बिजनेस शुरू करने की ओर ही लगा रहता था.
जब खुद का काम करने की इच्छा बढ़ने लगी, तो पिंकी ने बोकारो लौटकर अपने सपनों को नई उड़ान देने का कड़ा फैसला किया. चूंकि उन्हें बचपन से ही फूड और कुकिंग में काफी रुचि थी, इसलिए उन्होंने फास्ट फूड बिजनेस को चुना. उन्होंने चंद्रपुरा में अपने स्टॉल की शुरुआत की और इसका नाम बेहद अनोखा बांसा घर रखा. पिंकी बताती हैं कि मिथिलांचल और मैथिली संस्कृति में रसोई घर को बांसा घर कहा जाता है. इसी सांस्कृतिक लगाव के कारण उन्होंने यह नाम चुना.
पिंकी ने अपने बिजनेस की शुरुआत मुख्य रूप से मोमोज की अलग-अलग वैरायटी के साथ की थी. आज उनके स्टॉल पर मलाई मोमोज, अफगानी मोमोज, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के स्वादिष्ट फास्ट फूड आइटम्स मिलते हैं. इनके आउटलेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मिलने वाले सभी फूड आइटम पूरी तरह से शाकाहारी होते हैं. लेकिन इनके मसालों और बनाने के तरीके का स्वाद ऐसा है कि लोग यहां बार-बार खाने पहुंचते हैं.
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पिंकी कुमारी कहती हैं कि चंद्रपुरा जैसे छोटे इलाके में आमतौर पर पहले फास्ट फूड की ज्यादा वैरायटी देखने को नहीं मिलती थी. ऐसे में उन्होंने स्थानीय लोगों को महानगरों जैसा कुछ नया और प्रीमियम स्वाद देने की कोशिश की. जिसे अब ग्राहकों का बेहद शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है. उनके यहां इस समय सबसे ज्यादा डिमांड मलाई मोमोज की रहती है. जिसकी रोजाना लगभग 100 प्लेट तक की खपत आसानी से हो जाती है.
यह फूड स्टॉल रोजाना शाम 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक खुलता है. पिंकी के अनुसार महज कुछ ही घंटों के इस बिजनेस से आज वह हर महीने लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक की शानदार कमाई कर लेती हैं, जो किसी भी बड़े शहर की नौकरी के मुकाबले काफी सुकून देने वाली है.
अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर पिंकी भावुक होते हुए बताती हैं कि उनके पिता नौकरी करते हैं, जबकि कोरोना काल के कठिन समय में उनकी माता जी का निधन हो गया था. माता के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खुद के दम पर पैरों पर खड़े होने व आगे बढ़ने का फैसला किया. भविष्य में उनका इरादा अपने इस बांसा घर ब्रांड को और भी बड़े लेवल पर ले जाने का है.
ग्राहक इशिता ने बताया कि चंद्रपुरा जैसे छोटे इलाके में पहले फास्ट फूड की अच्छी और हाइजीनिक वैरायटी मिलना बेहद मुश्किल था. जब से पिंकी के स्टॉल का फास्ट फूड ट्राई किया है. वह इसकी दीवानी हो गई हैं. उन्हें यहां का स्वाद और वैरायटी काफी पसंद आ रही है. जिसके चलते यहां अब हर उम्र के फूड लवर्स की भीड़ उमड़ रही है.