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कमाई में इंजीनियर को टक्कर दे रहे किसान छोटन महतो, बड़ी कंपनियों...


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कमाई में इंजीनियर को टक्कर दे रहे छोटन महतो,महज 2 एकड़ में करते इस चीज की खेती

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रांची के किसान छोटन महतो ने दो एकड़ खेत में स्वीट कॉर्न उगाया है. उन्हें इसकी बंपर पैदावार मिल रही है. अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों से उनका टाइअप है. वे महीने के 60 हजार रुपये तक कमा रहे हैं. यह मुनाफा किसी कॉर्पोरेट इंजीनियर की सैलरी जैसा है.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले किसान छोटन महतो ने कृषि क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल पेश की है. उन्होंने अपने दो एकड़ खेत में स्वीट कॉर्न की खेती की है, जिससे उन्हें जबरदस्त उपज मिल रही है. खास बात यह है कि उनकी इस फसल को खरीदने के लिए अमूल, मदर डेयरी, कुक और ईजी किचन जैसी बड़ी-बड़ी नामचीन कंपनियों ने उनके साथ बंपर टाइअप (कॉन्ट्रैक्ट) किया हुआ है. कंपनियां खुद खेत पर आकर फसल ले जाती हैं. छोटन महतो बताते हैं कि इस खेती से वे हर महीने आराम से 50,000 से 60,000 रुपये तक की कमाई कर रहे हैं, जो किसी कॉर्पोरेट इंजीनियर की सैलरी से कम नहीं है. उनके खेत से हर महीने लगभग 50 से 60 क्विंटल स्वीट कॉर्न निकल रहा है.

कमाई के पीछे कड़ी मेहनत का राज
छोटन महतो का कहना है कि इस अच्छी कमाई के पीछे कड़ी मेहनत छिपी है. स्वीट कॉर्न की फसल में पानी की बहुत अधिक आवश्यकता होती है, जिसके लिए वे दिन में दो बार पटवन (सिंचाई) करते हैं. पानी रोकने के लिए उन्होंने खेत में विशेष प्रकार की क्यारियाँ बनाई हैं, जिनमें चार से पांच घंटे तक पानी आराम से टिका रहता है. खाद प्रबंधन के लिए वे जैविक और रासायनिक तत्वों का बेहतरीन संतुलन बनाते हैं. वे मुख्य रूप से गोबर, केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) और डीएपी (DAP) को मिलाकर इस्तेमाल करते हैं.

मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए भूसे का अचूक नुस्खा
खेती को अधिक प्रभावी बनाने के लिए छोटन महतो एक खास देसी नुस्खा अपनाते हैं. वे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और बेहतरीन खाद तैयार करने के लिए भूसे का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए वे भूसे में गोबर की खाद, डीएपी और यूरिया मिलाकर कम से कम 6 से 7 दिनों के लिए छोड़ देते हैं. जब यह खाद अच्छी तरह तैयार हो जाती है, तो हर 20 से 25 दिनों में एक बार इसे पौधों की जड़ों में डाला जाता है. इस विधि से फसल की ग्रोथ बहुत शानदार होती है. इसी का नतीजा है कि तीन महीने में उन्हें 180 क्विंटल से अधिक की कुल पैदावार मिल रही है. ज्यादातर हिस्सा कंपनियां ले जाती हैं, जबकि कुछ हिस्सा वे स्थानीय बाजार में भी बेचते हैं, जहां उन्हें 40 से 50 रुपये प्रति किलो का भाव आसानी से मिल जाता है.

कीटों से सुरक्षा और मिट्टी के पीएच (pH) लेवल का रखें ध्यान
कमाई जितनी अच्छी है, इस फसल में जोखिम भी उतना ही है. छोटन महतो के अनुसार, फसल को कीड़ों से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि यदि जड़ों में कीड़ा लग जाए तो भारी नुकसान हो सकता है. इससे बचने के लिए वे निम्नलिखित सावधानियां बरतते हैं:

  • मिट्टी का पीएच (pH) बैलेंस: मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए वे बीच-बीच में खेत में चूना मिलाते रहते हैं. इससे मिट्टी का पीएच लेवल संतुलित रहता है और मिट्टी अधिक अम्लीय नहीं होती.
  • तरल खाद का छिड़काव: पौधों को पोषण देने के लिए वे पानी के माध्यम से सल्फर और डीएपी जैसी खादों को घोलकर जड़ों तक पहुँचाते हैं.
  • खरपतवार नियंत्रण: वे खेत की नियमित निगरानी करते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले खरपतवारों को समय-समय पर हटाते रहते हैं.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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