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बोलबम की है तैयारी, तो कोडरमा में यहां सज रहा है स्पेशल...


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सावन को लेकर कोडरमा में तैयारियां जोरों पर हैं. शिवभक्तों के लिए पश्चिम बंगाल के विशेष बांस से मजबूत और हल्के कांवड़ बनाए जा रहे हैं. इसमें पीतल की घंटियों और आकर्षक सजावट का खास ध्यान रखा गया है. इनकी कीमत 250 से 1200 रुपये तक है. जानिए क्या है इनमें खास!

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कोडरमा: सावन के पवित्र महीना को लेकर भगवान शिव के भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. देशभर से लाखों श्रद्धालु जल लेकर विभिन्न शिवालयों की ओर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं. झारखंड के देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में भी कोडरमा समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में शिवभक्त सुल्तानगंज से पैदल यात्रा कर जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. इसी आस्था और श्रद्धा के बीच कोडरमा के कांवड़ कारीगर भी पूरी मेहनत से भक्तों के लिए आकर्षक और सुंदर कांवड़ तैयार करने में जुटे हुए हैं.

कोडरमा स्टेशन रोड पर पिछले 18 वर्षों से कांवड़ बनाने का कार्य कर रहे कारीगर शीतल लाल ने बताया कि सावन शुरू होने के साथ ही कांवड़ की मांग तेजी से बढ़ जाती है. भक्तों की पसंद और जरूरत के अनुसार अलग-अलग डिज़ाइन के काँवर तैयार किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि इस वर्ष महंगाई का असर कांवड़ निर्माण पर भी साफ दिखाई दे रहा है. पिछले साल की तुलना में काँवर सजाने में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के सजावटी सामान, पीतल की घंटियों और अन्य सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. जिससे निर्माण लागत भी बढ़ गई है. कोडरमा में बड़ी संख्या में गांवों से कांवरियां कांवड़ का ऑर्डर भी दे रहे है.

कितनी है कांवड़ की कीमत
शीतल लाल ने बताया कि कोडरमा में तैयार किए जाने वाले कांवड़ के लिए खासतौर पर पश्चिम बंगाल से मंगाए गए बांस का उपयोग किया जाता है. मजबूत और हल्के बांस से तैयार कांवड़ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक होता है. इसके बाद कांवड़ को आकर्षक बनाने के लिए लकड़ी के चक्के, प्लास्टिक के चक्के, रंग-बिरंगे प्लास्टिक के नाग, फूल, शिवलिंग की प्रतिकृतियां, रस्सी और अन्य सजावटी सामग्री लगाई जाती है. उन्होंने बताया कि सामान्य कांवर की शुरुआती कीमत 250 से शुरू होती है.

वहीं, यदि कोई श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार विशेष डिजाइन, अतिरिक्त सजावट या पीतल की घंटियों से सजा हुआ कांवड़ बनवाता है तो उसकी कीमत 700 तक पहुंच जाती है. विशेष रूप से पीतल की घंटियों वाले कांवड़ इस बार महंगे हो गए हैं. उन्होंने बताया कि घंटियों और अन्य सजावटी सामग्री की कीमत बढ़ने के कारण पीतल की घंटियों से सजे कांवड़ की कीमत बढ़ी है. उन्होंने बताया कि सजावट के अनुसार कांवड़ की कीमत 1000-1200 तक भी पहुंचती है.

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Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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