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देवघर के किसानों के लिए गेहूं की खेती को लेकर अच्छी सलाह सामने आई है. कम पानी वाले इलाकों में किसान लोकवन, शक्तिवर्धक और सरबती जैसी उन्नत किस्में लगा सकते हैं. इन किस्मों को केवल एक से दो पटवन की जरूरत होती है. इससे सिंचाई का खर्च बचेगा और फसल भी अच्छी तैयार होगी.
देवघरः देश के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं की बुवाई का समय शुरू हो चुका है. ऐसे में किसान अब खेतों की तैयारी में जुट गए हैं. लेकिन गेहूं की खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता सिंचाई यानी पटवन की होती है. कई इलाकों में किसानों को फसल की अच्छी पैदावार के लिए बार-बार पटवन करना पड़ता है. इससे खेती की लागत काफी बढ़ जाती है और किसानों की आधी कमाई पानी और सिंचाई के इंतजाम में ही खर्च हो जाती है. वहीं, इस साल मौसम को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ी हुई है. अलनीनो के प्रभाव और मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच कम बारिश की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में किसानों के सामने सवाल है कि आखिर गेहूं की ऐसी कौन सी किस्म लगाएं, जिसमें कम पानी की जरूरत पड़े और उत्पादन भी अच्छा मिले?
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
दरअसल, किसानों की इसी परेशानी को देखते हुए देवघर के कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि गेहूं की कुछ ऐसी किस्मों की जानकारी दी है, जिनकी खेती कम सिंचाई में भी की जा सकती है. कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक गेहूं की खेती के लिए वर्तमान समय काफी अनुकूल है. किसान खेत में पर्याप्त नमी रहने पर बुवाई की तैयारी कर सकते हैं. खास बात यह है कि गेहूं की कुछ ऐसी उन्नत किस्में भी हैं, जिन्हें एक से दो पटवन में भी अच्छी पैदावार के लिए जाना जाता है. इससे किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है.
1 से 2 पटवन में फसल तैयार
कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा के अनुसार लोकवन, शक्तिवर्धक 4282, शक्तिवर्धक 8292 और सरबती गेहूं की ऐसी किस्में हैं, जिन पर किसान विचार कर सकते हैं. इन किस्मों की खासियत यह है कि अनुकूल परिस्थितियों में करीब 120 दिनों के अंदर फसल तैयार हो सकती है. इनके दाने भी आकार में बड़े होते हैं. ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं या जिन्हें पटवन के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं, वे अपने क्षेत्र और मिट्टी के हिसाब से इन किस्मों का चयन कर सकते हैं. हालांकि बेहतर उत्पादन के लिए बीज की गुणवत्ता, समय पर बुवाई और फसल प्रबंधन का ध्यान रखना भी जरूरी है.
बीजोपचार करके ही बुवाई करे :
वहीं, गेहूं की बुवाई से पहले किसानों को एक और जरूरी काम बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए. वह है बीजोपचार. अक्सर किसान सीधे खेत में बीज डालकर बुवाई कर देते हैं, लेकिन ऐसा करने से बीज और शुरुआती फसल में रोग लगने का खतरा बना रहता है. कृषि विशेषज्ञ की सलाह है कि बुवाई से पहले बीजों का कार्बेन्डाजिम या थायरम से निर्धारित मात्रा और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार जरूर करें.इससे बीज जनित रोगों से बचाव में मदद मिलती है और फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर हो सकती है.
सही समय पर करे बुवाई :
ऐसे में इस बार गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए जरूरी है कि वे केवल अधिक उत्पादन वाली किस्मों के पीछे न भागें, बल्कि अपने खेत में उपलब्ध पानी और सिंचाई के साधनों को भी ध्यान में रखें.सही किस्म का चुनाव, समय पर बुवाई और बीजोपचार जैसे छोटे-छोटे उपाय खेती की लागत कम करने में मददगार हो सकते हैं. यानी अगर किसान शुरुआत में ही थोड़ी सावधानी बरतें, तो कम पानी की चुनौती के बीच भी गेहूं की अच्छी फसल लेने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…