कांग्रेस चुनावी मोड से जब भी बाहर आती है, तो घर के अंदर मचे बवंडर को संभालने में जुट जाती है. ऐसा ही कुछ फिर हुआ है. मामला कर्नाटक में कुर्सी का है. सीएम सिद्धारमैया कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं, और डीके शिवकुमार कुमार बगल में टेबल पर बैठे इंतजार कर रहे हैं, बिल्कुल इस फोटो की तरह… लेकिन एक ट्विस्ट भी है. इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह बैठे कि “मेरे बारे में फैसला तो सोनिया गांधी ही लेती हैं”… क्या ये सिर्फ बयान है, या फिर 10 जनपथ की डोर में फंसा पेंच… बात कुछ भी कुर्सी तो फंसी ही है.
मई 2023 में जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, तो कांग्रेस की प्रचंड जीत के जश्न के बीच ही ‘अगला मुख्यमंत्री कौन?’ का सवाल खड़ा हो गया था. एक तरफ अनुभवी सिद्धारमैया थे, तो दूसरी तरफ संकटमोचक और संगठन पर मजबूत पकड़ रखने वाले डीके शिवकुमार. घंटों चली बैठकों के बाद एक कथित ‘पावर शेयरिंग फॉर्मूला’बना, जिसके तहत सिद्धारमैया को पहले कार्यकाल की कमान सौंपी गई.
फार्मूला देखकर नारागी
20 नवंबर 2025 को इस सरकार ने अपना आधा कार्यकाल यानी ढाई साल पूरा कर लिया. जैसे ही यह तारीख गुजरी, डीके शिवकुमार के खेमे में हलचल तेज हो गई. समर्थकों ने मांग शुरू कर दी कि अब समझौते के मुताबिक सत्ता ट्रांसफर हो जानी चाहिए. लेकिन सिद्धारमैया आसानी से कुर्सी छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहे हैं, और यहीं से कांग्रेस में ‘भारी बवाल’ की शुरुआत होती है.
खरगे का नाम और ‘मास्टरस्ट्रोक’
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने एक नया दांव चलते हुए कह दिया कि अगर मल्लिकार्जुन खरगे मुख्यमंत्री बनते हैं, तो पूरी पार्टी उनका स्वागत करेगी. यह बयान आग में घी डालने जैसा था. परमेश्वर का यह सुझाव डीके शिवकुमार की राह में रोड़ा अटकाने और सिद्धारमैया को सुरक्षित रास्ता देने की कोशिश के रूप में देखा गया.
जब मीडिया ने खरगे से पूछा कि क्या वे मुख्यमंत्री बनेंगे? इस पर खरगे कह बैठे, ‘मीडिया और कुछ लोग कहते हैं कि अगर मैं मुख्यमंत्री बन जाऊं तो बेहतर होगा. लेकिन भाग्य से ज्यादा मेरी विचारधारा और पार्टी के लिए मेरी सेवा के आधार पर सोनिया गांधी ही मेरे बारे में निर्णय लेती हैं. अभी यह सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि राज्य में पहले से ही एक मुख्यमंत्री हैं. अगर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मैं मिलकर कोई फैसला लेते हैं, तो उसमें समय लगेगा. फिलहाल इंतजार करना होगा.’
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे.
सोनिया को आगे कर क्या मैसेज दे रहे खरगे?
खरगे इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. सैद्धांतिक रूप से वे पार्टी में सबसे बड़े पद पर हैं. लेकिन यह कहकर कि उनका फैसला सोनिया गांधी लेती हैं, उन्होंने यह संदेश दिया कि वे आज भी गांधी परिवार के सबसे वफादार सिपाही हैं. यह बयान उन आलोचकों के लिए भी जवाब है जो कहते हैं कि खरगे केवल रबर स्टैंप अध्यक्ष हैं. उन्होंने इसे अपनी ताकत के रूप में पेश किया कि उनका रिश्ता सीधे आलाकमान से है.
खरगे जानते हैं कि सिद्धारमैया और डीके की लड़ाई में किसी एक का पक्ष लेना पार्टी के लिए आत्मघाती हो सकता है. सोनिया गांधी का नाम लेकर उन्होंने गेंद दिल्ली के पाले में डाल दी और खुद को एक न्यूट्रल लेकिन निर्णायक भूमिका में बनाए रखा.
दलित कार्ड और मुख्यमंत्री की रेस
खरगे कर्नाटक से आते हैं और राज्य के सबसे बड़े दलित नेताओं में से एक हैं. उनके नाम की चर्चा होने से डीके शिवकुमार के दावों को चुनौती मिलती है. अगर स्थिति हाथ से निकली, तो आलाकमान खरगे को ‘कॉम्प्रोमाइज कैंडिडेट’ के रूप में बेंगलुरु भेज सकता है.
डीके शिवकुमार की बेचैनी और ‘सीक्रेट एग्रीमेंट’
डीके शिवकुमार ने हाल ही में स्वीकार किया कि सरकार गठन के समय कुछ गोपनीय समझौते हुए थे. उनके समर्थक अब दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. डीके कहते हैं कि उन्होंने 2023 के चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत और संसाधन लगा दिए थे, और अब उनका हक बनता है. लेकिन सिद्धारमैया की लोकप्रियता राजनीति कांग्रेस के लिए लोकसभा और आगामी चुनौतियों के लिहाज से जरूरी है.