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सिटी एंकर सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत बोकारो जिले में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित लक्ष्य के करीब 30 हजार आवेदन जमा हुए हैं। जिले में 8वीं से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं को योजना का लाभ देने के लिए कुल 34,265 आवेदन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन अब तक 30,033 आवेदन ही जमा हुए हैं। इस तरह लक्ष्य के विरुद्ध करीब 87.6 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए हैं। हालांकि, आवेदन जमा होने के बावजूद बड़ी संख्या में छात्राओं को योजना का लाभ मिलने का इंतजार है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 3,428 आवेदन अभी लंबित हैं, जबकि 804 आवेदन डुप्लीकेट पाए गए हैं। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बालिकाओं को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत आठवीं से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाली छात्राओं को अलग-अलग चरणों में सहायता राशि दी जाती है। लंबित आवेदनों का निष्पादन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। खासकर जिन छात्राओं ने समय पर आवेदन जमा कर दिया है, उन्हें अब स्वीकृति और भुगतान का इंतजार है। योजना का प्रखंडवार आवेदन की स्थिति प्रखंड लाभुक लक्ष्य डुप्लीकेट लंबित आवेदन बेरमो 2,030 1,864 31 135 चंदनकियारी 4,591 4,078 114 399 चंद्रपुरा 1,649 1,436 47 166 चास 8,685 7,794 162 729 गोमिया 4,662 3,893 115 654 जरीडीह 2,424 1,987 52 385 कसमार 3,327 2,920 137 270 नावाडीह 3,841 3,495 93 253 पेटरवार 3,056 2,566 53 437 कुल 34,265 30,033 804 3,428 कक्षा के अनुसार मिलती है आर्थिक सहायता योजना के तहत आठवीं और नौवीं की छात्राओं को 2,500-2,500 रुपए व 10वीं, 11वीं और 12वीं की छात्राओं को पांच-पांच हजार रुपए मिलते हैं। इसके अलावा 18 से 19 वर्ष की पात्र युवतियों को एकमुश्त 20 हजार रुपए की सहायता दी जाती है। योजना से छात्राओं को मदद पहुंचाना लक्ष्य योजना के तहत आवेदन करने वाली छात्राओं के दस्तावेजों और पात्रता की जांच के बाद ही सहायता राशि स्वीकृत की जाती है। डुप्लीकेट आवेदन मिलने पर उनकी छंटनी और सत्यापन जरूरी होता है, ताकि एक ही लाभुक को दोहरा लाभ नहीं मिले। वहीं, लंबित आवेदनों में आवश्यक दस्तावेजों, पात्रता संबंधी जानकारी और अन्य प्रक्रियागत कारणों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है। योजना का मकसद सिर्फ छात्राओं को आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि बालिकाओं को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा से जोड़कर स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना भी है। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली छात्राओं को इससे काफी राहत मिल सकती है। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकारी स्कूल की छात्राएं।
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